'खाड़ी में विदेशी हुक्म नहीं चलेगा': पेजेशकियान की ट्रंप को दो टूक, होर्मुज में नाकाबंदी पर भी दी चेतावनी
फारस की खाड़ी और होर्मुज को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने मौजूदा अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप को साफ चेतावनी दी है कि खाड़ी में विदेशी हुक्म नहीं चलेगा। अगर अमेरिका ने समुद्री पाबंदी लगाई तो उसे मुंह की खानी पड़ेगी। आइए, विस्तार से पूरे मामले को जानते हैं।
विस्तार
फारस की खाड़ी और होर्मुज को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच तनातनी एक बार फिर बहुत ज्यादा बढ़ गई है। 'फारस की खाड़ी राष्ट्रीय दिवस' के मौके पर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने अमेरिका और इस्राइल को बहुत ही कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने साफ शब्दों में कह दिया है कि ईरान किसी भी विदेशी दबाव, समुद्री नाकाबंदी या धमकियों के आगे झुकने वाला देश नहीं है और वह डटकर इसका सामना करेगा।
राष्ट्रपति पेजेशकियन ने अपने बयान में कहा है कि फारस की खाड़ी कोई ऐसा अखाड़ा नहीं है जहां विदेशी ताकतें आकर अपनी मर्जी थोप सकें। उन्होंने मौजूदा अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप के प्रशासन पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि ईरान के खिलाफ समुद्री पाबंदियां लगाना अंतरराष्ट्रीय नियमों का खुला उल्लंघन है। उन्होंने सख्त चेतावनी दी कि अगर फारस की खाड़ी में कोई भी अशांति या खतरा पैदा होता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी सिर्फ और सिर्फ अमेरिका और जायोनी शासन (इस्राइल) की होगी।
پیام رئیس جمهور به مناسبت روز ملی خلیج فارس
— pezeshkian (@drpezeshkian2) April 30, 2026
🔹خلیج فارس | عرصه تحمیل ارادههای خارجی نیست
🔹تنگه هرمز | نماد حاکمیت ملی و نقش ایران در امنیت منطقه است
🔹ایران پاسدار امنیت خلیج فارس و تنگه هرمز است
🔹هرگونه تلاش برای محاصره دریایی ایران محکوم به شکست استhttps://t.co/NYIU3gQWks pic.twitter.com/ncENHljnmH
ईरान ने अमेरिका को क्या कड़ी चेतावनी दी?
- मसूद पेजेशकियन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा है कि फारस की खाड़ी विदेशी मर्जी थोपने की कोई जगह नहीं है।
- होर्मुज ईरान की राष्ट्रीय संप्रभुता (आजादी) और क्षेत्रीय सुरक्षा का सबसे बड़ा प्रतीक है।
- ईरान फारस की खाड़ी और होर्मुज की सुरक्षा का असली रक्षक है।
- ईरान पर समुद्री नाकाबंदी लगाने या पाबंदी लगाने की कोई भी कोशिश पूरी तरह से फेल हो जाएगी।
- उन्होंने 26 अप्रैल को ही साफ कर दिया था कि दबाव, धमकी और घेराबंदी के माहौल में ईरान कभी कोई बातचीत नहीं करेगा।
क्या ट्रंप का प्लान फेल हो गया?
- ईरान की सेना 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन की रणनीति अब बदल चुकी है।
- ट्रंप का प्रशासन अब दुनिया की ऊर्जा को संभालने के बजाय हर जगह 'व्यवधान' (गड़बड़ी) पैदा करने पर उतर आया है।
- आईआरजीसी ने दावा किया कि अमेरिका ने यह 'व्यवधान परियोजना' खास तौर पर चीन, रूस और यूरोप को रोकने के लिए शुरू की थी।
- लेकिन, 20 दिनों के भीतर ही व्हाइट हाउस को यह समझ आ गया है कि उनका यह प्रोजेक्ट बुरी तरह फेल हो गया है।
- अमेरिका की इस चाल के बाद, अब ईरान 'व्यवधान के खिलाफ बने गठबंधन' का मुख्य केंद्र बन गया है।
دولت ترامپ از راهبرد «مدیریت انرژی جهان» به «اختلال» چرخید و محاصره دریایی به عنوان بخشی از کلان پروژه اختلال برای مهار چین،روسیه و اروپا شروع شد؛
— سازمان اطلاعات سپاه (@IRGCIntelli) April 29, 2026
اما با گذشت ۲۰ روز، این ارزیابی در کاخ سفید در حال تعمیق است که پروژه شکست خورده و تهران به کانون "ائتلاف علیه اختلال" تبدیل شده است.
अगर अमेरिका ने दबाव बढ़ाना जारी रखा तो क्या होगा?
ईरानी राष्ट्रपति ने कहा है कि दुनिया में ऊर्जा ले जाने वाले जरूरी रास्तों की सुरक्षा करने में ईरान की नौसेना बहुत अहम भूमिका निभाती है। दुश्मन अब अपनी रणनीति बदलकर ईरान पर आर्थिक और समुद्री व्यापार को लेकर दबाव डाल रहे हैं, जो अंतरराष्ट्रीय कानून के बिल्कुल खिलाफ है। अमेरिका की ये समुद्री पाबंदियां संघर्ष विराम की समझ का सीधा उल्लंघन हैं और संयुक्त राष्ट्र के नियमों को भी तोड़ती हैं। ऐसी धमकियों और पाबंदियों की वजह से कूटनीतिक प्रक्रिया को लेकर अमेरिका की नीयत पर बहुत बड़ा शक पैदा हो गया है। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अपनी सुरक्षा और व्यापार के साथ कोई समझौता नहीं करेगा।
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