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फ्रांस में लगातार तीसरे सप्ताह सड़कों पर उतरे हजारों युवा: जर्मनी-इटली तक फैला विरोध; 70 हजार पुलिसकर्मी तैनात

Sat, 31 Oct 2026 08:48 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पेरिस
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पेरिस Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Sat, 31 Oct 2026 08:48 PM IST
सार

फ्रांस में महंगाई और शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ लगातार तीसरे सप्ताह हजारों युवा सड़कों पर उतरे। हिंसा की आशंका के बीच 70 हजार पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। जर्मनी, इटली और स्पेन में भी विरोध प्रदर्शन की तैयारी है। आखिर युवाओं का गुस्सा किन मुद्दों पर है? क्या यह आंदोलन पूरे यूरोप में सरकारों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है और हिंसा रोकने के लिए क्या इंतजाम किए गए हैं? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...

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Thousands of Youth Take to Streets in France for Third Consecutive Weekend: Protests Spread to Germany Italy
फ्रांस में प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

फ्रांस में महंगाई, शिक्षा व्यवस्था और युवाओं की समस्याओं को लेकर विरोध प्रदर्शन लगातार तेज हो रहे हैं। शनिवार को लगातार तीसरे सप्ताह हजारों की संख्या में युवा और अन्य प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए। यह आंदोलन अब फ्रांस तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जर्मनी और इटली समेत यूरोप के कई देशों में भी युवाओं ने प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। हालात को देखते हुए फ्रांस में करीब 70 हजार पुलिसकर्मियों और जेंडरमेरी के जवानों को तैनात किया गया है। सरकार को आशंका है कि पिछले प्रदर्शनों की तरह इस बार भी हिंसा और तोड़फोड़ हो सकती है। खासकर हैलोवीन की रात को लेकर सुरक्षा एजेंसियां अधिक सतर्क हैं।

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फ्रांस में लगातार तीसरे सप्ताह क्यों हो रहे हैं प्रदर्शन?
फ्रांस में यह आंदोलन पिछले महीने स्कूलों की खराब इमारतों, शिक्षकों की कमी और विश्वविद्यालयों में दाखिले की व्यवस्था के खिलाफ शुरू हुआ था। छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालयों में प्रवेश की मौजूदा व्यवस्था गरीब और कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों के साथ भेदभाव करती है। बाद में श्रमिक संगठनों और राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की नीतियों से नाराज दूसरे समूहों ने भी इसमें हिस्सा लेना शुरू कर दिया। शनिवार को पेरिस के पूर्वी इलाके पोर्टे डी बागनोले में हजारों प्रदर्शनकारी जुटे। मार्च की अगुवाई छात्रों को करनी थी। फ्रांस के बड़े श्रमिक संगठनों में शामिल सीजीटी के सुरक्षा स्वयंसेवक भी प्रदर्शनकारियों की निगरानी कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों के हाथों में अलग-अलग मांगों वाले बैनर थे। कोई शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहा था तो कोई महंगाई और जलवायु परिवर्तन के मुद्दे उठा रहा था।
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70 हजार पुलिसकर्मी क्यों किए गए तैनात?
फ्रांस के गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने प्रदर्शन के दौरान अव्यवस्था फैलने की आशंका जताई। उन्होंने खासतौर पर हैलोवीन की रात के बाद हिंसा का खतरा अधिक बताया। इससे पहले 17 और 24 अक्तूबर को हुए प्रदर्शनों में भीड़ के कुछ हिस्सों ने हिंसा, लूटपाट और तोड़फोड़ की थी। इन घटनाओं के बाद पुलिस ने हजारों लोगों को गिरफ्तार किया था। हालांकि, अधिकतर प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे थे, लेकिन कुछ उपद्रवी समूहों ने पुलिस पर पटाखे और दूसरी चीजें फेंकी थीं। पुलिस ने आंसू गैस, पानी की बौछार और भीड़ को तितर-बितर करने वाले हथियारों का इस्तेमाल किया था। इन कार्रवाइयों में कई लोग गंभीर रूप से घायल भी हुए थे। इस बार पेरिस में मार्च का रास्ता शहर के बाहरी हिस्से की ओर रखा गया, ताकि बाजारों और दुकानों को नुकसान से बचाया जा सके।
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हिंसा रोकने के लिए फ्रांस में क्या पाबंदियां लगाई गईं?
सरकार ने इस बार प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए हैं। पेरिस में प्लास द ला रिपब्लिक और लेस हॉल्स जैसे इलाकों में शनिवार और रविवार की रात 11 बजे से सुबह छह बजे तक प्रवेश पर रोक लगाई गई है। इसके अलावा शांज-एलीजे इलाके में अकेले घूमने वाले नाबालिगों के लिए रात नौ बजे से कर्फ्यू लगाया गया है। हालांकि, पेरिस की एक अदालत ने बुधवार को नाबालिगों पर लगाए गए पहले के कर्फ्यू को रद्द कर दिया था। अदालत ने इसे आने-जाने की आजादी में गंभीर और गैरकानूनी दखल माना था। वहीं, प्रदर्शन में शामिल 21 वर्षीय छात्र कोरेंटिन कैब्रू ने अपने छात्रावास की खराब हालत का जिक्र किया। उसने बताया कि दीवारों पर सीलन है, प्लास्टर उखड़ रहा है और परिसर में कॉकरोच तथा चूहे हैं। उसने उम्मीद जताई कि हैलोवीन के मौके पर प्रदर्शन शांतिपूर्ण और उत्सव जैसा रहेगा।

जर्मनी और इटली में युवाओं ने क्यों खोला मोर्चा?
फ्रांस के साथ जर्मनी में भी युवाओं ने प्रदर्शन का आह्वान किया है। 'जेन जी रेगेल्ट' नाम के युवा संगठन ने करीब 30 शहरों में प्रदर्शन करने की अपील की है। संगठन की मांगों में शिक्षा, स्वास्थ्य, जलवायु संरक्षण और सस्ता जीवन शामिल है। इसके अलावा युवा सैन्य भर्ती दोबारा शुरू करने के विरोध में भी आवाज उठा रहे हैं। आयोजकों के अनुसार, ऑनलाइन 1.80 लाख से अधिक लोगों ने प्रदर्शन में शामिल होने के लिए पंजीकरण कराया है। बर्लिन में ब्रांडेनबर्ग गेट पर करीब 10 हजार लोगों के पहुंचने की उम्मीद जताई गई। वहीं, इटली में मिलान, ट्यूरिन और बोलोनिया में पहले हुई झड़पों के बाद पुलिस अलर्ट पर है। बेल्जियम, नीदरलैंड, ऑस्ट्रिया, स्विट्जरलैंड और पुर्तगाल में भी सोशल मीडिया के जरिए प्रदर्शन की अपील की गई है।


स्पेन में भी प्रदर्शन की तैयारी, पुलिस ने क्यों बढ़ाई सतर्कता?
स्पेन के बार्सिलोना में भी पुलिस ने सुरक्षा बढ़ाने की तैयारी की है। यहां कैटलन पुलिस ने सबसे ऊंचे स्तर का अलर्ट लागू करने की योजना बनाई है। सोशल मीडिया मंच टिकटॉक पर 'ब्लोकस' नाम के एक अज्ञात नेटवर्क ने नए प्रदर्शनों का आह्वान किया है। इससे पहले शनिवार को हुए दंगों के दौरान करीब 130 लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जिनमें अधिकतर नाबालिग थे। यूरोप के कई देशों में युवाओं के प्रदर्शन का दायरा बढ़ने से पुलिस और प्रशासन सतर्क हैं। इन आंदोलनों में शिक्षा, रोजगार, महंगाई, स्वास्थ्य और जलवायु जैसे अलग-अलग मुद्दे शामिल हैं। हालांकि, प्रदर्शनकारियों की बड़ी संख्या शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें उठा रही है, लेकिन कुछ जगहों पर हुई हिंसा ने सरकारों की चिंता बढ़ा दी है।

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