इंडोनेशिया: मूसलाधार बारिश ने मचाई भीषण तबाही, सुमात्रा द्वीप पर बाढ़-भूस्खलन से 17 की मौत, कई लापता
सिबोलगा के पुलिस प्रमुख एडी इंगंटा ने कहा कि आपातकालीन आश्रय स्थल स्थापित कर दिए गए हैं और अधिकारियों ने उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों के निवासियों से तत्काल घर खाली करने का आग्रह किया है।
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इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप पर मूसलाधार बारिश के कारण अचानक बाढ़ आ गई और भूस्खलन में कम से कम 17 लोगों की मौत हो गई और छह अन्य लापता हो गए। पुलिस ने बुधवार को एक बयान में कहा कि पिछले हफ्ते हुई मानसूनी बारिश की वजह से नदियों के बांध टूट गए।
पुलिस ने बताया कि पहाड़ी गांवों में कीचड़ भर गया, चट्टानें और पेड़ गिर गए, जिससे भारी तबाही हुई। इन घटनाओं के बाद बचाव दल उत्तरी सुमात्रा प्रांत के छह क्षेत्रों में प्रभावित इलाकों तक पहुंचने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
बयान के अनुसार बचावकर्मियों ने बुधवार तक सबसे ज्यादा प्रभावित सिबोल्गा शहर से कम से कम पांच शव बरामद किए हैं। साथ ही तीन घायल लोगों को अस्पताल पहुंचाया है। पड़ोसी जिले मध्य तपनौली में भूस्खलन की चपेट में आकर कई घर तबाह हो गए, जिसमें कम से कम चार लोगों का एक परिवार मारा गया और बाढ़ से लगभग 2,000 घर और इमारतें जलमग्न हो गईं।
बाढ़ और भूस्खलन के कारण पेड़ों के उखड़ने से दक्षिण तपनौली जिले में एक ग्रामीण की मौत हो गई और एक अन्य घायल हो गया। मंडेलिंग नटाल जिले में एक पुल नष्ट हो गया और 470 घर जलमग्न हो गए। बयान में कहा गया है कि नियास द्वीप में कीचड़ और मलबे की वजह से एक मुख्य सड़क बाधित हो गई है।
सिबोलगा के पुलिस प्रमुख एडी इंगंटा ने कहा कि आपातकालीन आश्रय स्थल स्थापित कर दिए गए हैं और अधिकारियों ने उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों के निवासियों से तत्काल घर खाली करने का आग्रह किया है। पहाड़ी शहर में छह भूस्खलनों में 17 घर और एक कैफे ध्वस्त होने के बाद उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि लगातार बारिश से और ज्यादा भूस्खलन हो सकता है।
इंगंटा ने कहा कि खराब मौसम और भूस्खलन के कारण बचाव अभियान में रुकावट आई है। उन्होंने कहा कि बचावकर्मियों के कठिन परिस्थितियों से जूझने के कारण पहुंच सीमित बनी हुई है। राष्ट्रीय आपदा एजेंसी ने इंडोनेशिया के मुख्य द्वीप जावा के दो इलाकों में 17 दिनों के अभियान के बाद राहत कार्यों की मंगलवार को आधिकारिक समाप्ति का एलान किया था। कुछ ही घंटों बाद सुमात्रा द्वीप पर बारिश की वजह से बाढ़ और भूस्खलन का कहर देखने को मिला।
वहीं, मध्य जावा के सिलाकैप और बंजारनेगारा जिलों में मूसलाधार बारिश के कारण हुए भूस्खलन में दबे लोगों की तलाश के लिए 1,000 से ज्यादा बचावकर्मियों को तैनात किया गया था। भारी बारिश के कारण हुए भूस्खलन में 38 लोगों की मौत हो गई थी।
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