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US: अमेरिका में ट्रंप प्रशासन का बड़ा फैसला, आपातकालीन गर्भपात की गाइडलाइन को किया रद्द; डॉक्टरों में चिंता

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: शुभम कुमार Updated Wed, 04 Jun 2025 04:41 AM IST
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सार

ट्रंप प्रशासन ने 2022 की उस गाइडलाइन को रद्द कर दिया है, जिसमें अस्पतालों को मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति में महिलाओं को जीवनरक्षक गर्भपात की अनुमति दी गई थी। यह निर्देश बाइडन प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रीय गर्भपात अधिकार खत्म किए जाने के बाद जारी किया था। अब ट्रंप प्रशासन के फैसले से डॉक्टरों और महिला अधिकार संगठनों ने गहरी चिंता जताई है।

Trump administration revokes guidance requiring hospitals to provide emergency abortions News In Hindi
डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति - फोटो : ANI
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विस्तार

अमेरिका के ट्रंप प्रशासन ने मंगलवार को घोषणा की कि वह अस्पतालों को दी गई उस गाइडलाइन को रद्द कर रहा है, जिसमें गंभीर हालत में महिलाओं को जीवन बचाने के लिए आपातकालीन गर्भपात की अनुमति दी गई थी। यह गाइडलाइन अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन की प्रशासन ने 2022 में उस समय जारी की थी जब सुप्रीम कोर्ट ने अमेरिका में गर्भपात के अधिकार को खत्म कर दिया था।

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बता दें कि बाइडन प्रशासन ने यह निर्देश इमरजेंसी मेडिकल ट्रीटमेंट एंड एक्टिव लेबर एक्ट के तहत दिया था, जिसके अनुसार मेडिकल इमरजेंसी में मरीज को स्थिर करने के लिए जरूरी इलाज देना अस्पतालों की जिम्मेदारी होती है। चूंकि अमेरिका के लगभग सभी इमरजेंसी रूम चिकित्सा फंड पर निर्भर हैं, इसलिए यह गाइडलाइन बहुत अहम मानी जा रही थी।

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ट्रंप प्रशासन के फैसले पर डॉक्टरों की चिंता
ऐसे में अब ट्रंप प्रशासन द्वारा इसे रद्द करने पर डॉक्टरों और गर्भपात समर्थकों ने चिंता जताई है। सेंटर ऑफ रिप्रोडक्टिव राइट्स की प्रमुख नैन्सी नॉर्थअप ने कहा कि ट्रंप प्रशासन महिलाओं को आपातकालीन कक्षों में मरने देना बेहतर समझता है, बजाय उन्हें जीवन रक्षक गर्भपात देने के।

 

गर्भपात विरोधी संगठनों ने फैसला का किया स्वागत
वहीं, दूसरी ओर गर्भपात विरोधी संगठनों ने इस फैसले का स्वागत किया है। एसबीए प्रो लाइफ अमेरिका की अध्यक्ष मर्जोरी डैनेनफेलसर ने कहा कि बाइडन प्रशासन इस कानून का इस्तेमाल उन राज्यों में गर्भपात बढ़ाने के लिए कर रहा था, जहां यह प्रतिबंधित है।

हालांकि, सेंटर फॉर मेडिकेयर एंड मेडिकेड सर्विसेज (सीएमएस) ने बयान में कहा है कि वह अब भी उस संघीय कानून को लागू करता रहेगा, जिसमें मां या गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए गंभीर खतरे की स्थिति में इलाज देना अनिवार्य है। साथ ही सीएमएस ने कहा कि वह ट्रंप प्रशासन के फैसले से पैदा हुई कानूनी भ्रम की स्थिति को भी स्पष्ट करेगा।

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बाइडन प्रशासन ने किया था मुकदमा
गौरतलब है कि बाइडन प्रशासन ने इससे पहले इडाहो राज्य की सख्त गर्भपात नीति के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में मुकदमा किया था। कोर्ट ने मामले में स्पष्ट निर्णय नहीं दिया, जिससे यह सवाल अब भी बना हुआ है कि क्या सख्त गर्भपात विरोधी राज्यों में डॉक्टर गंभीर स्थिति में गर्भपात कर सकते हैं या नहीं।

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