Donald Trump: भारत के चुनावी मॉडल के मुरीद हुए ट्रंप, अमेरिका में वोटर ID अनिवार्य करने की मांग क्यों हुई तेज?
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत की चुनाव व्यवस्था और मतदाता पहचान पत्र के नियमों का उदाहरण देते हुए अमेरिका में कड़े चुनावी नियम लागू करने की मांग दोहराई है। ट्रंप ने कहा कि भारत में करोड़ों लोगों ने मतदान किया और मतदाताओं के लिए पहचान पत्र जरूरी था। उन्होंने इसी आधार पर सेव अमेरिका एक्ट पारित करने की मांग की। अमेरिका में इस कानून को लेकर इतना विवाद क्यों है? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
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विस्तार
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत की चुनाव व्यवस्था का उदाहरण देते हुए अमेरिका में हर मतदाता के लिए फोटो पहचान पत्र अनिवार्य करने की अपनी मांग फिर दोहराई है। ट्रंप ने दावा किया कि भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने उनके प्रशासन से सवाल किया था कि अमेरिका में वैध फोटो पहचान पत्र के बिना चुनाव कैसे कराए जा सकते हैं। ट्रंप ने भारत की व्यवस्था का हवाला देते हुए कहा कि अमेरिका को भी चुनाव में पहचान और नागरिकता से जुड़े नियम कड़े करने चाहिए।
US Ambassador to India Sergio Gor tweets, "President Donald J. Trump is absolutely correct! 646 MILLION voters, every single one required an ID in India’s last election. Congress should pass the Save America Act." pic.twitter.com/dSCg4fkBW0
— ANI (@ANI) August 18, 2026
भारत के चुनाव को लेकर ट्रंप ने क्या दावा किया?
ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि भारत के हालिया आम चुनाव में करीब 64.6 करोड़ लोगों ने मतदान किया और एक प्रतिशत से भी कम मतदाताओं ने डाक मतपत्र का इस्तेमाल किया। उन्होंने यह भी कहा कि हर मतदाता के लिए वैध फोटो पहचान पत्र जरूरी था। ट्रंप ने भारत के चुनावी मॉडल को अमेरिका में अनिवार्य फोटो पहचान की जरूरत के समर्थन में उदाहरण के तौर पर पेश किया। उनका कहना है कि इससे चुनाव में धोखाधड़ी की आशंका को कम किया जा सकता है।
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सेव अमेरिका एक्ट में क्या बदलाव प्रस्तावित हैं?
ट्रंप जिस सेव अमेरिका एक्ट के समर्थन में लगातार आवाज उठा रहे हैं, उसका पूरा नाम सेफगार्ड अमेरिकन वोटर एलिजीबिलिटी एक्ट है। प्रस्तावित कानून के तहत अमेरिका में मतदान के लिए पंजीकरण कराने वाले लोगों को अपनी नागरिकता का प्रमाण देना होगा। इसके अलावा देशभर में मतदाता पहचान पत्र की व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव है। कानून डाक से मतदान की सुविधा पर भी कड़े प्रतिबंध लगाने की दिशा में है। ट्रंप इसे चुनावी धोखाधड़ी रोकने के लिए जरूरी कदम बताते हैं।
क्या अमेरिका में इस कानून को लेकर सहमति है?
सेव अमेरिका एक्ट को लेकर अमेरिका में राजनीतिक सहमति नहीं बन पाई है। रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों दलों के भीतर इस मुद्दे पर मतभेद हैं। ट्रंप लगातार कानून पारित कराने की मांग कर रहे हैं, लेकिन सीनेट में इसे आगे बढ़ाने को लेकर अब तक ठोस कदम नहीं उठे हैं। अगस्त की शुरुआत में अमेरिकी सीनेट पांच सप्ताह के अवकाश पर चली गई थी और कानून को लेकर कोई अंतिम प्रगति नहीं हुई। ऐसे में ट्रंप का भारत का उदाहरण देना उनकी राजनीतिक मुहिम को आगे बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
ट्रंप ने फिर क्यों कहा सेव अमेरिका एक्ट अभी पारित करें?
ट्रंप का तर्क है कि मतदाता की पहचान और नागरिकता की पुष्टि चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता के लिए जरूरी है। भारत की चुनाव व्यवस्था का हवाला देते हुए उन्होंने अमेरिका में भी ऐसे नियम लागू करने की मांग की है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका को चुनावी धोखाधड़ी रोकने के लिए सेव अमेरिका एक्ट पारित करना चाहिए। हालांकि, कानून को लेकर राजनीतिक मतभेद अभी कायम हैं। भारत का उदाहरण देकर ट्रंप ने एक बार फिर अमेरिकी चुनाव व्यवस्था में पहचान पत्र और नागरिकता के सवाल को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।
भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने क्या कहा?
ट्रंप के बयान के समर्थन में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप बिल्कुल सही हैं। गोर ने दावा किया कि भारत के पिछले चुनाव में 64.6 करोड़ मतदाता थे और हर मतदाता के लिए पहचान पत्र जरूरी था। उन्होंने इसी उदाहरण का हवाला देते हुए अमेरिकी कांग्रेस से सेव अमेरिका एक्ट पारित करने की अपील की।