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US: दक्षिण कोरिया को छोड़ उत्तर कोरिया के करीब क्यों जा रहे ट्रंप? अमेरिका के सहयोगियों की बढ़ी चिंता
Tue, 18 Aug 2026 08:01 AM IST
निर्मल कांत
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन।
Published by: निर्मल कांत
Updated Tue, 18 Aug 2026 08:01 AM IST
सार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दक्षिण कोरिया के साथ होने वाले सैन्य अभ्यासों का आकार कम करने का आदेश दिया, जिससे लंबे समय के अमेरिकी सहयोगी देश की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई। ट्रंप के फैसले से अमेरिका के पुराने सहयोगियों का भरोसा कमजोर होगा? पढ़िए रिपोर्ट
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डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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विस्तार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दक्षिण कोरिया के साथ होने वाले संयुक्त सैन्य अभ्यासों को कम करने का फैसला किया है। इससे केवल लंबे समय से अमेरिका के सहयोगी रहे दक्षिण कोरिया को ठेस नहीं पहुंची है, बल्कि एशिया और दुनिया के दूसरे हिस्सों में अमेरिका के सुरक्षा हितों को लेकर भी बड़ी चिंताएं पैदा हो गई हैं।
ट्रंप ने अपने फैसले की वजह बताते हुए कहा कि दक्षिण कोरिया ने ईरान के खिलाफ उनकी लड़ाई में शामिल होने से इनकार कर दिया। उन्होंने अलग-थलग रहने वाले उत्तर कोरिया के शासक किम जोंग उन के साथ अपने अच्छे संबंधों का भी जिक्र किया। ट्रंप अक्सर विदेश नीति में फायदे-नुकसान और व्यक्तिगत रिश्तों को ज्यादा अहमियत देते रहे हैं। यही उनके राष्ट्रपति कार्यकाल की एक खास पहचान रही है।
जॉर्ज डब्ल्यू. बुश के राष्ट्रपति कार्यकाल में यूरोपीय मामलों के सहायक विदेश मंत्री रह चुके डैन फ्राइड ने कहा, मुझे इसमें अमेरिका का कोई हित नजर नहीं आता। किसी भी स्तर पर यह समझ में नहीं आता। इससे दक्षिण कोरिया कमजोर होता है, जापान कमजोर होता है, ताइवान डरता है, नाटो चिंतित होता है और चीन को हौसला मिलता है। इतना ही नहीं, उत्तर कोरिया का भी हौसला बढ़ता है।
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ओबामा प्रशासन में पूर्वी एशिया और प्रशांत क्षेत्र के सहायक विदेश मंत्री रह चुके डैनी रसेल ने कहा कि उत्तर कोरिया के पक्ष में ट्रंप का फैसला ऐसी श्रेणी में आता है, जिसमें यह समझना मुश्किल है कि इससे स्थिति और खराब कैसे हो सकती है। उत्तर कोरिया हर साल होने वाले संयुक्त सैन्य अभ्यासों का कड़ा विरोध करता है। उन्होंने कहा, यह दुखद रूप से पूरी तरह उलटा है। ट्रंप एक सहयोगी को सजा दे रहे हैं और एक विरोधी को बढ़ावा दे रहे हैं।
न्यूयॉर्क के एशिया सोसाइटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट से जुड़े रसेल ने कहा, ट्रंप अमेरिका और दक्षिण कोरिया की सुरक्षा की कीमत पर किम जोंग उन को नाराज होने से बचा रहे हैं।
दक्षिण कोरिया को इससे क्या संदेश जाता है?
रविवार को ट्रंप ने अमेरिकी सेना को 11 दिन चलने वाले 'उलची फ्रीडम शील्ड' सैन्य अभ्यास का आकार छोटा करने का आदेश दिया। यह सैन्य अभ्यास सोमवार को तय समय पर शुरू हो गया। हालांकि, यह साफ नहीं था कि अभ्यास के किन-किन हिस्सों को कम किया जाएगा।
ट्रंप के इस एलान से दक्षिण कोरिया में बहुत से लोग आश्चर्यचकित रह गए। दक्षिण कोरिया दशकों से अमेरिका का करीबी सहयोगी रहा है। वहां राष्ट्रीय सुरक्षा को बेहद अहम माना जाता है, क्योंकि उसके सामने परमाणु हथियार रखने वाले उत्तर कोरिया का खतरा मौजूद है।
अमेरिकी कांग्रेस (संसद) में कई डेमोक्रेट सांसदों ने भी तुरंत ट्रंप की आलोचना की। न्यूयॉर्क से डेमोक्रेट सांसद और विदेश मामलों की समिति में सबसे बड़े डेमोक्रेट नेता ग्रेग मीक्स ने एक बयान में कहा, अमेरिका के सबसे करीबी सहयोगियों में से एक के साथ विरोधी जैसा व्यवहार करने से हमारे गठबंधन कमजोर होते हैं और चीन तथा उत्तर कोरिया को फायदा मिलता है।
सोमवार को ट्रंप ने अपने फैसले का फिर समर्थन किया। उन्होंने उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन की फोन पर बात करते हुए एक तस्वीर पोस्ट की। तस्वीर के साथ लिखा था- हे डोनाल्ड... हम दोनों के बीच सब ठीक है, है ना?
रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों ही दलों के राष्ट्रपतियों के कार्यकाल के दौरान काम कर चुके सेवानिवृत्त अमेरिकी राजदूत रॉबर्ट वुड ने कहा कि संयुक्त सैन्य अभ्यास उत्तर कोरिया को रोकने के लिए बेहद अहम हैं। उत्तर कोरिया ने अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका के साथ किसी भी बातचीत से दूरी बना रखी है और उसने हथियारों का परीक्षण भी तेज कर दिया है। वुड ने कहा, हम यह भी नहीं चाहते कि दक्षिण कोरिया यह निष्कर्ष निकाले कि अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उसके पास परमाणु हथियार हासिल करना ही एकमात्र गारंटी है।
रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों तरह के प्रशासन में रक्षा और खुफिया विभाग से जुड़े पदों पर रह चुके मैथ्यू क्रोनिग ने कहा कि सर्वे बताते हैं कि दक्षिण कोरियाई लोगों में अपने परमाणु हथियार विकसित करने के विचार का समर्थन लगातार बढ़ा है।
क्रोनिग ने कहा, अमेरिका दक्षिण कोरिया को यह भरोसा दिलाने के लिए बहुत मेहनत करता रहा है कि वह सुरक्षित है। अब वाशिंगटन के थिंक टैंक अटलांटिक काउंसिल से जुड़े क्रोनिग ने कहा कि सैन्य अभ्यासों का आकार कम करने से संभवत: इस भरोसे को नुकसान पहुंचता है।
ट्रंप को खुश करने की कोशिश कर रहा दक्षिण कोरिया?
ट्रंप ने यह फैसला तब लिया, जब दक्षिण कोरिया उन्हें खुश करने और उनका समर्थन पाने की कोशिश कर रहा था। दक्षिण कोरिया व्यापार और रक्षा जैसे अहम मुद्दों पर अमेरिका का साथ चाहता था। पिछले साल नए राष्ट्रपति ली जे म्युंग जब ट्रंप से मिलने व्हाइट हाउस पहुंचे, तो उन्होंने सबसे पहले वहां की शानदार सजावट की तारीफ की। ओवल ऑफिस को सुनहरे रंग की सजावट से सजाया गया था।
ये भी पढ़ें: एफबीआई मुख्यालय अब कहां बनेगा?: ट्रंप प्रशासन को कोर्ट ने दिया बड़ा झटका, हेडक्वार्टर की शिफ्टिंग पर लगाई रोक
ली ने ट्रंप की इस बात का भी समर्थन किया कि अगर वह 2020 में लगातार दूसरी बार राष्ट्रपति बन जाते, तो किम जोंग उन परमाणु हथियार बनाने की अपनी योजना को आगे नहीं बढ़ाते। ली ने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में उत्तर कोरिया में ट्रंप टावर बनाया जा सकता है। इससे कुछ घंटे पहले ही ट्रंप ने ली के पूर्ववर्ती राष्ट्रपति यून सुक योल के प्रति सहानुभूति दिखाई थी। यून को दिसंबर 2024 में मार्शल लॉ लगाने के बाद पद से हटा दिया गया था।
विदेश मामलों की परिषद के वरिष्ठ सदस्य चार्ल्स कपचन ने कहा कि सैन्य अभ्यासों को कम करने से लंबे समय से अमेरिका के सहयोगी रहे देशों को अमेरिका की मदद के बिना अपनी सुरक्षा के बारे में ज्यादा सोचने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।
डेमोक्रेट राष्ट्रपतियों बिल क्लिंटन और बराक ओबामा के तहत राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद में काम कर चुके कपचन ने कहा, वे उम्मीद कर रहे हैं कि भविष्य में भी अमेरिकी सुरक्षा छतरी उनके लिए मौजूद रहेगी। लेकिन उन्हें कम से कम इस संभावना के बारे में सोचना होगा कि अंकल सैम उनके लिए मौजूद नहीं होंगे।
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ट्रंप ने अपने फैसले की वजह बताते हुए कहा कि दक्षिण कोरिया ने ईरान के खिलाफ उनकी लड़ाई में शामिल होने से इनकार कर दिया। उन्होंने अलग-थलग रहने वाले उत्तर कोरिया के शासक किम जोंग उन के साथ अपने अच्छे संबंधों का भी जिक्र किया। ट्रंप अक्सर विदेश नीति में फायदे-नुकसान और व्यक्तिगत रिश्तों को ज्यादा अहमियत देते रहे हैं। यही उनके राष्ट्रपति कार्यकाल की एक खास पहचान रही है।
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जॉर्ज डब्ल्यू. बुश के राष्ट्रपति कार्यकाल में यूरोपीय मामलों के सहायक विदेश मंत्री रह चुके डैन फ्राइड ने कहा, मुझे इसमें अमेरिका का कोई हित नजर नहीं आता। किसी भी स्तर पर यह समझ में नहीं आता। इससे दक्षिण कोरिया कमजोर होता है, जापान कमजोर होता है, ताइवान डरता है, नाटो चिंतित होता है और चीन को हौसला मिलता है। इतना ही नहीं, उत्तर कोरिया का भी हौसला बढ़ता है।
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ओबामा प्रशासन में पूर्वी एशिया और प्रशांत क्षेत्र के सहायक विदेश मंत्री रह चुके डैनी रसेल ने कहा कि उत्तर कोरिया के पक्ष में ट्रंप का फैसला ऐसी श्रेणी में आता है, जिसमें यह समझना मुश्किल है कि इससे स्थिति और खराब कैसे हो सकती है। उत्तर कोरिया हर साल होने वाले संयुक्त सैन्य अभ्यासों का कड़ा विरोध करता है। उन्होंने कहा, यह दुखद रूप से पूरी तरह उलटा है। ट्रंप एक सहयोगी को सजा दे रहे हैं और एक विरोधी को बढ़ावा दे रहे हैं।
न्यूयॉर्क के एशिया सोसाइटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट से जुड़े रसेल ने कहा, ट्रंप अमेरिका और दक्षिण कोरिया की सुरक्षा की कीमत पर किम जोंग उन को नाराज होने से बचा रहे हैं।
दक्षिण कोरिया को इससे क्या संदेश जाता है?
रविवार को ट्रंप ने अमेरिकी सेना को 11 दिन चलने वाले 'उलची फ्रीडम शील्ड' सैन्य अभ्यास का आकार छोटा करने का आदेश दिया। यह सैन्य अभ्यास सोमवार को तय समय पर शुरू हो गया। हालांकि, यह साफ नहीं था कि अभ्यास के किन-किन हिस्सों को कम किया जाएगा।
ट्रंप के इस एलान से दक्षिण कोरिया में बहुत से लोग आश्चर्यचकित रह गए। दक्षिण कोरिया दशकों से अमेरिका का करीबी सहयोगी रहा है। वहां राष्ट्रीय सुरक्षा को बेहद अहम माना जाता है, क्योंकि उसके सामने परमाणु हथियार रखने वाले उत्तर कोरिया का खतरा मौजूद है।
अमेरिकी कांग्रेस (संसद) में कई डेमोक्रेट सांसदों ने भी तुरंत ट्रंप की आलोचना की। न्यूयॉर्क से डेमोक्रेट सांसद और विदेश मामलों की समिति में सबसे बड़े डेमोक्रेट नेता ग्रेग मीक्स ने एक बयान में कहा, अमेरिका के सबसे करीबी सहयोगियों में से एक के साथ विरोधी जैसा व्यवहार करने से हमारे गठबंधन कमजोर होते हैं और चीन तथा उत्तर कोरिया को फायदा मिलता है।
सोमवार को ट्रंप ने अपने फैसले का फिर समर्थन किया। उन्होंने उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन की फोन पर बात करते हुए एक तस्वीर पोस्ट की। तस्वीर के साथ लिखा था- हे डोनाल्ड... हम दोनों के बीच सब ठीक है, है ना?
रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों ही दलों के राष्ट्रपतियों के कार्यकाल के दौरान काम कर चुके सेवानिवृत्त अमेरिकी राजदूत रॉबर्ट वुड ने कहा कि संयुक्त सैन्य अभ्यास उत्तर कोरिया को रोकने के लिए बेहद अहम हैं। उत्तर कोरिया ने अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका के साथ किसी भी बातचीत से दूरी बना रखी है और उसने हथियारों का परीक्षण भी तेज कर दिया है। वुड ने कहा, हम यह भी नहीं चाहते कि दक्षिण कोरिया यह निष्कर्ष निकाले कि अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उसके पास परमाणु हथियार हासिल करना ही एकमात्र गारंटी है।
रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों तरह के प्रशासन में रक्षा और खुफिया विभाग से जुड़े पदों पर रह चुके मैथ्यू क्रोनिग ने कहा कि सर्वे बताते हैं कि दक्षिण कोरियाई लोगों में अपने परमाणु हथियार विकसित करने के विचार का समर्थन लगातार बढ़ा है।
क्रोनिग ने कहा, अमेरिका दक्षिण कोरिया को यह भरोसा दिलाने के लिए बहुत मेहनत करता रहा है कि वह सुरक्षित है। अब वाशिंगटन के थिंक टैंक अटलांटिक काउंसिल से जुड़े क्रोनिग ने कहा कि सैन्य अभ्यासों का आकार कम करने से संभवत: इस भरोसे को नुकसान पहुंचता है।
ट्रंप को खुश करने की कोशिश कर रहा दक्षिण कोरिया?
ट्रंप ने यह फैसला तब लिया, जब दक्षिण कोरिया उन्हें खुश करने और उनका समर्थन पाने की कोशिश कर रहा था। दक्षिण कोरिया व्यापार और रक्षा जैसे अहम मुद्दों पर अमेरिका का साथ चाहता था। पिछले साल नए राष्ट्रपति ली जे म्युंग जब ट्रंप से मिलने व्हाइट हाउस पहुंचे, तो उन्होंने सबसे पहले वहां की शानदार सजावट की तारीफ की। ओवल ऑफिस को सुनहरे रंग की सजावट से सजाया गया था।
ये भी पढ़ें: एफबीआई मुख्यालय अब कहां बनेगा?: ट्रंप प्रशासन को कोर्ट ने दिया बड़ा झटका, हेडक्वार्टर की शिफ्टिंग पर लगाई रोक
ली ने ट्रंप की इस बात का भी समर्थन किया कि अगर वह 2020 में लगातार दूसरी बार राष्ट्रपति बन जाते, तो किम जोंग उन परमाणु हथियार बनाने की अपनी योजना को आगे नहीं बढ़ाते। ली ने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में उत्तर कोरिया में ट्रंप टावर बनाया जा सकता है। इससे कुछ घंटे पहले ही ट्रंप ने ली के पूर्ववर्ती राष्ट्रपति यून सुक योल के प्रति सहानुभूति दिखाई थी। यून को दिसंबर 2024 में मार्शल लॉ लगाने के बाद पद से हटा दिया गया था।
विदेश मामलों की परिषद के वरिष्ठ सदस्य चार्ल्स कपचन ने कहा कि सैन्य अभ्यासों को कम करने से लंबे समय से अमेरिका के सहयोगी रहे देशों को अमेरिका की मदद के बिना अपनी सुरक्षा के बारे में ज्यादा सोचने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।
डेमोक्रेट राष्ट्रपतियों बिल क्लिंटन और बराक ओबामा के तहत राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद में काम कर चुके कपचन ने कहा, वे उम्मीद कर रहे हैं कि भविष्य में भी अमेरिकी सुरक्षा छतरी उनके लिए मौजूद रहेगी। लेकिन उन्हें कम से कम इस संभावना के बारे में सोचना होगा कि अंकल सैम उनके लिए मौजूद नहीं होंगे।