US Laws: बच्चों को अकेले खेलने की आजादी पर अमेरिका में बदली सोच, देश के 13 राज्यों ने क्यों दी कानून में ढील?
अमेरिका में बच्चों की सुरक्षा के नाम पर बनाए गए सख्त नियमों को लेकर अब सोच बदल रही है। 13 राज्यों ने बाल-उपेक्षा कानूनों में ढील दी है, ताकि बच्चों को उम्र के अनुसार अकेले खेलने या आसपास जाने की आजादी मिल सके। एक छह साल के बच्चे के पार्क में अकेले खेलने का मामला भी बहस का कारण बना। सवाल है कि बच्चों की सुरक्षा जरूरी है, लेकिन क्या हर समय निगरानी उनकी स्वतंत्रता रोक रही है? आइए, विस्तार से सबकुछ समझते हैं...
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
अमेरिका में बच्चों की सुरक्षा को लेकर लंबे समय से बनाए गए सख्त नियमों पर अब बहस तेज हो रही है। कई जगह अभिभावकों को बच्चों को अकेले पार्क भेजने, आसपास खेलने देने या छोटी दूरी पर अकेले जाने देने पर कार्रवाई का डर रहता था। अब इस सोच में बदलाव दिखाई दे रहा है। 13 अमेरिकी राज्यों ने बाल-उपेक्षा से जुड़े नियमों में ढील दी है, ताकि बच्चों को उम्र के हिसाब से कुछ स्वतंत्रता देने पर माता-पिता को कानूनी कार्रवाई का सामना न करना पड़े।
छह साल के बच्चे के पार्क जाने पर क्यों मचा विवाद?
अटलांटा में एक छह साल के बच्चे के अकेले पार्क में खेलने का मामला इस बहस का उदाहरण बना। बच्चे को पार्क में अकेले देखकर एक महिला ने बाल कल्याण विभाग में उसके माता-पिता के खिलाफ शिकायत कर दी। इसके बाद मैलरी शर्ली और उनके पति क्रिस्टोफर प्लेसेंट्स से पूछताछ हुई। लंबी कानूनी प्रक्रिया और अपील के बाद दंपती को आरोपों से बरी कर दिया गया। इस मामले ने सवाल खड़ा किया कि बच्चों की सुरक्षा और उन्हें स्वतंत्रता देने के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।
13 राज्यों ने नियमों में ढील क्यों दी?
अमेरिका में फ्री-रेंज किड्स आंदोलन को मिल रहे समर्थन के बीच 13 राज्यों ने अपने बाल-उपेक्षा कानूनों में बदलाव किया है। इसका मकसद यह स्पष्ट करना है कि बच्चों को उनकी उम्र और समझ के मुताबिक अकेले बाहर खेलने या आसपास जाने की अनुमति देना अपने आप में उपेक्षा नहीं माना जाए। समर्थकों का तर्क है कि बच्चों को हर समय निगरानी में रखने के बजाय सीमित स्वतंत्रता देना उनके आत्मविश्वास और जिम्मेदारी की भावना को मजबूत कर सकता है।
आज के बच्चे पिछली पीढ़ी से कब बाहर निकलते हैं?
बच्चों की स्वतंत्रता को लेकर सोच में बदलाव के बीच आंकड़े भी दिलचस्प तस्वीर दिखाते हैं। द ब्रिटिश चिल्ड्रन प्ले सर्वे के अनुसार, पिछली पीढ़ी के बच्चों को औसतन 8.9 वर्ष की उम्र में अकेले बाहर खेलने की अनुमति मिल जाती थी। आज यह उम्र बढ़कर औसतन 10.7 वर्ष हो गई है। यानी बच्चों को स्वतंत्र रूप से बाहर जाने की अनुमति अब करीब दो साल देर से मिल रही है। वहीं करीब 34 फीसदी बच्चे स्कूल के बाद बाहर खेलने नहीं जाते हैं।
बच्चों के लिए बाहर खेलना क्यों जरूरी माना जा रहा है?
बच्चों के लिए खेलना केवल मनोरंजन नहीं है। इससे उनका शारीरिक विकास होता है और वे दूसरे बच्चों के साथ बातचीत करना, छोटे फैसले लेना और परिस्थितियों को समझना सीखते हैं। आंकड़ों के मुताबिक, पांच से 17 वर्ष की उम्र के बच्चों को रोज करीब 60 मिनट खेलना-कूदना चाहिए। इसके बावजूद करीब 20 फीसदी बच्चे सप्ताहांत में भी बाहर नहीं खेलते। इसी वजह से बच्चों की सुरक्षा के साथ उनकी स्वतंत्रता पर भी ध्यान देने की मांग बढ़ रही है।