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अमेरिका पर हमला हुआ तो जापान उसे टीवी पर देखेगा, लेकिन वहां हुआ तो हम लड़ेंगे
Thu, 27 Jun 2019 12:23 PM IST
शिल्पा ठाकुर
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: शिल्पा ठाकुर
Updated Thu, 27 Jun 2019 12:23 PM IST
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
- फोटो : PTI
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर असमान सैन्य गठबंधन को लेकर जापान पर भड़के हैं। उन्होंने दावा करते हुए बुधवार को कहा है कि "अगर अमेरिका पर हमला होता है, तो जापान हमारी मदद करने वाला नहीं है" और "वो ये हमला सोनी टेलीविजन पर देखेगा।"
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ट्रंप से एक टेलीफोनिक इंटरव्यू के दौरान जब सवाल पूछा गया कि जापान में जी-20 सम्मेलन में वह अन्य समकक्षों के साथ जापान के राष्ट्रपति शिंजो आबे से भी मुलाकात करेंगे, तो ऐसे में द्विपक्षीय व्यापार सौदों की संभावना कितनी है? इस सवाल के जवाब में ट्रंप ने जापान की आलोचना की।
ट्रंप ने कहा, "मुझे एक सामान्य कथन के साथ शुरू करने दीजिए, दुनिया में अधिकतर देश अमेरिका का खूब फायदा उठाते हैं। अगर जापान पर हमला होता है, तो हम तीसरा विश्व युद्ध लड़ेंगे... अपने जीवन और खजाने के साथ। लेकिन अगर हमपर हमला होता है, जापान से हमें कोई मदद नहीं मिलेगी। जापान हमले को सोनी टेलीविजन पर देखेगा, ठीक है।"
इससे पहले एक रिपोर्ट में कहा गया था कि ट्रंप लंबे समय पहले जापान और अमेरिका के बीच हुए सैन्य गठबंधन के समझौते को गुप्त रूप से वापस लेने पर विचार कर रहे हैं। क्योंकि वह इसे एकतरफा मानते हैं। अमेरिका 70 से अधिक वर्षों से टोक्यो का एक करीबी सैन्य और राजनयिक सहयोगी रहा है। दोनों देशों ने 1951 में पहली बार सैन फ्रांसिस्को की संधि पर हस्ताक्षर किए थे। जिससे द्वितीय विश्व युद्ध आधिकारिक तौर पर समाप्त हुआ।
इस समझौते को 1960 में "संयुक्त राज्य अमेरिका और जापान के बीच पारस्परिक सहयोग और सुरक्षा की संधि" के रूप में संशोधित किया गया। जो अमेरिका को जापान में सैन्य ठिकानों को इस समझ के साथ बनाए रखने की अनुमति देता है कि अगर जापान पर कभी हमला हुआ तो अमेरिका उसकी रक्षा करेगा।
ट्रंप ने जापान को उत्तर कोरिया के खतरों से रक्षा करने के लिए अधिक अमेरिकी हथियार खरीदने के लिए भी प्रोत्साहित किया। अब माना जा रहा है कि जी-20 सम्मेलन में ट्रंप एक बार फिर प्रमुख सहयोगियों से सैन्य समझौतों पर निराशा व्यक्त कर सकते हैं। ट्रंप ने लंबे समय तक रक्षा पर पर्याप्त खर्च करने और गठबंधन द्वारा जीडीपी लक्ष्य के 2 फीसदी को पूरा करने में विफल रहने पर नाटो देशों की भी आलोचना की है।