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'मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता': ईरान के समझौते से पीछे हटने पर बोले ट्रंप; IRGC का दावा- मार गिराया एमक्यू-9 ड्रोन
Sun, 19 Jul 2026 07:24 PM IST
Devesh Tripathi
एएनआई, वॉशिंगटन
एएनआई, वॉशिंगटन
Published by: Devesh Tripathi
Updated Sun, 19 Jul 2026 07:24 PM IST
सार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के अंतरिम समझौते से पीछे हटने के फैसले को महत्वहीन बताते हुए कहा कि अमेरिका का लक्ष्य केवल ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है। दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिका पर समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए उसे लागू न करने की घोषणा की है। इसी बीच आईआरजीसी ने अमेरिकी एमक्यू-9 ड्रोन को मार गिराने का दावा किया है।
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पश्चिम एशिया तनाव
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार (स्थानीय समयानुसार) को कहा कि अमेरिका-ईरान के बीच हुए अंतरिम समझौते (एमओयू) का पालन नहीं करने के तेहरान के फैसले से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। उन्होंने दोहराया कि अमेरिका की प्राथमिकता ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है।
एक अमेरिकी समाचार चैनल को दिए संक्षिप्त फोन साक्षात्कार में ट्रंप से ईरान के उस एलान पर सवाल किया गया, जिसमें उसने कहा था कि वह पिछले महीने अमेरिका के साथ हुए अंतरिम समझौते का पालन नहीं करेगा। इस पर ट्रंप ने कहा, "मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।" उन्होंने कहा कि इस युद्ध का मुख्य उद्देश्य ईरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देना है।
होर्मुज पर नियंत्रण को लेकर भिड़े अमेरिका-ईरान
अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रबंधन को लेकर छिड़े ताजा संघर्ष के चलते दोनों देशों में मतभेद बढ़ गए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद समझौता जून के मध्य में हुआ था। इसका उद्देश्य अमेरिका और इस्राइल की ओर से फरवरी में शुरू किए गए युद्ध को समाप्त करना था।
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आईआरजीसी का दावा- मार गिराया अमेरिका का एमक्यू-9 ड्रोन
इस बीच ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने दावा किया है कि उसने इराक सीमा से लगे खुजेस्तान प्रांत के अहवाज शहर में अमेरिका के एक एमक्यू-9 ड्रोन को मार गिराया है। अमेरिकी वायुसेना के अनुसार, एमक्यू-9 एक बड़ा मानव रहित विमान है, जिसका इस्तेमाल मुख्य रूप से खुफिया जानकारी जुटाने, निगरानी, टोही और हवाई हमलों के लिए किया जाता है।
ईरान पर आठवें दिन भी जारी रहे अमेरिकी हमले
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ईरान के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर लगातार सैन्य अभियान चला रहा है। यह ईरान समर्थित ठिकानों पर लगातार आठवीं रात की सैन्य कार्रवाई थी। सेंटकॉम ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी बयान में कहा कि यह अभियान शनिवार रात व्हाइट हाउस की मंजूरी के बाद चलाया गया।
बयान में कहा गया, "अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने 18 जुलाई की रात 11:30 बजे (ईटी) राष्ट्रपति के निर्देश पर ईरान के खिलाफ एक और सैन्य कार्रवाई पूरी की।" सेंटकॉम ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मंजूरी से की गई इस कार्रवाई का उद्देश्य "होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों के लिए खतरा पैदा करने की ईरान की क्षमता को और कमजोर करना" था।
मोजतबा खामेनेई ने ट्रंप पर साधा निशाना
इन घटनाक्रमों पर प्रतिक्रिया देते हुए ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने अमेरिकी प्रशासन की कड़ी आलोचना की। उन्होंने एक्स पर जारी बयान में कहा, "ईरान और अमेरिका के राष्ट्रपतियों के बीच हुए समझौते का बार-बार उल्लंघन कर 'महाशैतान' (अमेरिका) ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति के हस्ताक्षर की कोई विश्वसनीयता नहीं है।"
उन्होंने कहा कि मौजूदा घटनाक्रम ने "एक बार फिर सभी को अमेरिकी राष्ट्रपति के हस्ताक्षर की वास्तविक कीमत दिखा दी है।" इससे पहले ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा था कि अमेरिका द्वारा समझौते के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं का उल्लंघन करते हुए ईरान पर सैन्य कार्रवाई बढ़ाने के बाद तेहरान अब पिछले महीने हुए 14 सूत्रीय समझौता ज्ञापन (एमओयू) को लागू करने के लिए खुद को बाध्य नहीं मानता।
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एक अमेरिकी समाचार चैनल को दिए संक्षिप्त फोन साक्षात्कार में ट्रंप से ईरान के उस एलान पर सवाल किया गया, जिसमें उसने कहा था कि वह पिछले महीने अमेरिका के साथ हुए अंतरिम समझौते का पालन नहीं करेगा। इस पर ट्रंप ने कहा, "मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।" उन्होंने कहा कि इस युद्ध का मुख्य उद्देश्य ईरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देना है।
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होर्मुज पर नियंत्रण को लेकर भिड़े अमेरिका-ईरान
अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रबंधन को लेकर छिड़े ताजा संघर्ष के चलते दोनों देशों में मतभेद बढ़ गए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद समझौता जून के मध्य में हुआ था। इसका उद्देश्य अमेरिका और इस्राइल की ओर से फरवरी में शुरू किए गए युद्ध को समाप्त करना था।
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आईआरजीसी का दावा- मार गिराया अमेरिका का एमक्यू-9 ड्रोन
इस बीच ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने दावा किया है कि उसने इराक सीमा से लगे खुजेस्तान प्रांत के अहवाज शहर में अमेरिका के एक एमक्यू-9 ड्रोन को मार गिराया है। अमेरिकी वायुसेना के अनुसार, एमक्यू-9 एक बड़ा मानव रहित विमान है, जिसका इस्तेमाल मुख्य रूप से खुफिया जानकारी जुटाने, निगरानी, टोही और हवाई हमलों के लिए किया जाता है।
ईरान पर आठवें दिन भी जारी रहे अमेरिकी हमले
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ईरान के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर लगातार सैन्य अभियान चला रहा है। यह ईरान समर्थित ठिकानों पर लगातार आठवीं रात की सैन्य कार्रवाई थी। सेंटकॉम ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी बयान में कहा कि यह अभियान शनिवार रात व्हाइट हाउस की मंजूरी के बाद चलाया गया।
बयान में कहा गया, "अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने 18 जुलाई की रात 11:30 बजे (ईटी) राष्ट्रपति के निर्देश पर ईरान के खिलाफ एक और सैन्य कार्रवाई पूरी की।" सेंटकॉम ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मंजूरी से की गई इस कार्रवाई का उद्देश्य "होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों के लिए खतरा पैदा करने की ईरान की क्षमता को और कमजोर करना" था।
मोजतबा खामेनेई ने ट्रंप पर साधा निशाना
इन घटनाक्रमों पर प्रतिक्रिया देते हुए ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने अमेरिकी प्रशासन की कड़ी आलोचना की। उन्होंने एक्स पर जारी बयान में कहा, "ईरान और अमेरिका के राष्ट्रपतियों के बीच हुए समझौते का बार-बार उल्लंघन कर 'महाशैतान' (अमेरिका) ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति के हस्ताक्षर की कोई विश्वसनीयता नहीं है।"
उन्होंने कहा कि मौजूदा घटनाक्रम ने "एक बार फिर सभी को अमेरिकी राष्ट्रपति के हस्ताक्षर की वास्तविक कीमत दिखा दी है।" इससे पहले ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा था कि अमेरिका द्वारा समझौते के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं का उल्लंघन करते हुए ईरान पर सैन्य कार्रवाई बढ़ाने के बाद तेहरान अब पिछले महीने हुए 14 सूत्रीय समझौता ज्ञापन (एमओयू) को लागू करने के लिए खुद को बाध्य नहीं मानता।