Gaza: गाजा के पुनर्निर्माण की शुरुआत, जानें क्या है युद्धविराम का दूसरा चरण; ट्रंप के विशेष दूत ने कही ये बात
अमेरिका के मुताबिक गाजा युद्धविराम अब दूसरे चरण में पहुंच गया है। हालांकि, नई फलस्तीनी सरकार के स्वरूप को लेकर अभी तस्वीर साफ नहीं है। अमेरिका ने हमास से अंतिम मृत बंधक लौटाने की भी मांग की है। आइए जानते हैं इस दूसरे चरण में गाजा में क्या-क्या बदलेगा।
विस्तार
गाजा में लंबे समय से जारी संघर्ष के बीच युद्धविराम को लेकर बड़ा संकेत सामने आया है। अमेरिका ने साफ किया है कि गाजा युद्धविराम योजना अब दूसरे चरण में प्रवेश कर चुकी है। इस चरण में हमास के निरस्त्रीकरण, गाजा के पुनर्निर्माण और रोजमर्रा के प्रशासन की नई व्यवस्था पर जोर दिया जाएगा। यह घोषणा ऐसे समय में आई है, जब क्षेत्र में स्थायी शांति को लेकर सवाल लगातार उठ रहे हैं।
ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर बताया कि युद्धविराम समझौता अब उस चरण में है, जहां गाजा को सैन्य गतिविधियों से मुक्त करना, वहां एक तकनीकी प्रशासन स्थापित करना और पुनर्निर्माण की प्रक्रिया शुरू करना प्रमुख लक्ष्य है। उनके मुताबिक, यह चरण गाजा के भविष्य की दिशा तय करेगा।
नई गाजा प्रशासन व्यवस्था कैसी होगी?
अमेरिकी दूत ने संकेत दिए कि गाजा में एक अस्थायी, तकनीकी प्रशासन बनाया जाएगा, जो रोजमर्रा के कामकाज को संभालेगा। हालांकि, इस नई फलस्तीनी प्रशासनिक संरचना को लेकर अभी कोई विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई है। व्हाइट हाउस की ओर से भी इस मुद्दे पर फिलहाल चुप्पी बनी हुई है, जिससे कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
हमास से क्या अपेक्षाएं रखी गई हैं?
- गाजा का पूरी तरह निरस्त्रीकरण।
- युद्धविराम समझौते के तहत सभी दायित्वों का पालन।
- अंतिम मृत बंधक को तुरंत लौटाना।
- किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि से दूरी बनाए रखना।
- अमेरिका ने साफ कहा है कि समझौते की सफलता काफी हद तक हमास के रुख पर निर्भर करेगी।
इस्राइल और क्षेत्रीय शांति का सवाल
गाजा में युद्धविराम के दूसरे चरण को इस्राइल और पूरे पश्चिम एशिया के लिए अहम माना जा रहा है। यदि निरस्त्रीकरण और प्रशासनिक बदलाव सही तरीके से लागू होते हैं, तो इससे क्षेत्रीय तनाव कम होने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि, जानकारों का कहना है कि बिना ठोस राजनीतिक समाधान के स्थायी शांति हासिल करना आसान नहीं होगा।
दूसरे चरण की सफलता के बाद गाजा के पुनर्निर्माण पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ने की संभावना है। बुनियादी ढांचे, आवास और मानवीय सहायता को प्राथमिकता दी जाएगी। लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि जमीन पर हालात और राजनीतिक इच्छाशक्ति ही तय करेगी कि यह युद्धविराम कितनी दूर तक टिक पाता है।
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