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जासूसी या जंग की आहट: ब्रिटेन में क्या कर रही थीं रूसी पनडुब्बियां? इस देश के साथ मिल ब्रिटिश सेना ने भगाया
पीटीआई, लंदन
Published by: Himanshu Singh Chandel
Updated Thu, 09 Apr 2026 07:26 PM IST
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सार
ब्रिटेन ने रूस पर अपने जल क्षेत्र के पास गुप्त पनडुब्बी गतिविधियां चलाने का आरोप लगाया है। ब्रिटिश सेना ने नॉर्वे के साथ मिलकर इन गतिविधियों को नाकाम किया। फाइबर ऑप्टिक केबल जैसे अहम ढांचे को निशाना बनाने की आशंका जताई गई। प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने सख्त चेतावनी दी है। आइए, मामले को विस्तार से जानते हैं।
ब्रिटेन-रूस
- फोटो : AI/अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
यूरोप में तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। ब्रिटेन ने दावा किया है कि उसकी समुद्री सीमा के पास रूस की पनडुब्बियां गुप्त गतिविधियां कर रही थीं। इसे सिर्फ जासूसी नहीं, बल्कि संभावित बड़े खतरे के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है। हालांकि ब्रिटिश सेना ने तुरंत कार्रवाई करते हुए इन गतिविधियों को नाकाम किया और सहयोगी देशों के साथ मिलकर रूसी पनडुब्बियों को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया।
ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, कई हफ्ते पहले उत्तरी अटलांटिक क्षेत्र में एक रूसी अटैक पनडुब्बी देखी गई थी। इसके बाद ब्रिटिश नौसेना और वायुसेना ने 24 घंटे उसकी निगरानी की। अधिकारियों का कहना है कि यह सिर्फ ध्यान भटकाने की चाल थी, जबकि दूसरी रूसी यूनिट समुद्र के नीचे अहम ढांचे के पास संदिग्ध गतिविधियां कर रही थी।
क्या यह सिर्फ जासूसी थी या बड़ा खतरा?
ब्रिटेन का कहना है कि यह ऑपरेशन केवल जासूसी नहीं था, बल्कि समुद्र के नीचे बिछे महत्वपूर्ण ढांचे को निशाना बनाने की कोशिश हो सकती थी। खासकर फाइबर ऑप्टिक केबल, जिनसे दुनिया का 99 प्रतिशत डेटा ट्रैफिक चलता है, खतरे में थे। ऐसे में इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला माना जा रहा है।
ये भी पढ़ें- होर्मुज पर ईरान का नया दांव: तेल टैंकरों को गुजरने के लिए क्रिप्टो में देना होगा टोल, ये बड़ी चेतावनी भी दी
ब्रिटिश सेना ने कैसे जवाब दिया?
ब्रिटिश सेना ने तुरंत अपने युद्धपोत, हेलीकॉप्टर और पनडुब्बी रोधी विमान तैनात किए। रॉयल नेवी के जहाज और RAF के P8 विमान लगातार निगरानी करते रहे। समुद्र के अंदर गतिविधियों को ट्रैक करने के लिए सोनोबॉय तकनीक का इस्तेमाल किया गया और हजारों किलोमीटर तक निगरानी अभियान चलाया गया।
किस देश के साथ मिलकर हुआ ऑपरेशन?
इस ऑपरेशन में ब्रिटेन ने अपने सहयोगी देश नॉर्वे के साथ मिलकर काम किया। दोनों देशों की सेनाओं ने मिलकर रूसी यूनिट्स की पहचान की और उन्हें ट्रैक किया। यह भी बताया गया कि रूस की GUGI यूनिट समुद्र के नीचे के ढांचे के पास संदिग्ध गतिविधियां कर रही थी।
प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री ने क्या कहा?
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने कहा कि देश की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं होगा। वहीं रक्षा मंत्री जॉन हीली ने रूस को चेतावनी देते हुए कहा कि किसी भी तरह की छेड़छाड़ के गंभीर परिणाम होंगे। उन्होंने साफ कहा कि ब्रिटेन हर खतरे का जवाब देने के लिए तैयार है।
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ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, कई हफ्ते पहले उत्तरी अटलांटिक क्षेत्र में एक रूसी अटैक पनडुब्बी देखी गई थी। इसके बाद ब्रिटिश नौसेना और वायुसेना ने 24 घंटे उसकी निगरानी की। अधिकारियों का कहना है कि यह सिर्फ ध्यान भटकाने की चाल थी, जबकि दूसरी रूसी यूनिट समुद्र के नीचे अहम ढांचे के पास संदिग्ध गतिविधियां कर रही थी।
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क्या यह सिर्फ जासूसी थी या बड़ा खतरा?
ब्रिटेन का कहना है कि यह ऑपरेशन केवल जासूसी नहीं था, बल्कि समुद्र के नीचे बिछे महत्वपूर्ण ढांचे को निशाना बनाने की कोशिश हो सकती थी। खासकर फाइबर ऑप्टिक केबल, जिनसे दुनिया का 99 प्रतिशत डेटा ट्रैफिक चलता है, खतरे में थे। ऐसे में इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला माना जा रहा है।
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ब्रिटिश सेना ने कैसे जवाब दिया?
ब्रिटिश सेना ने तुरंत अपने युद्धपोत, हेलीकॉप्टर और पनडुब्बी रोधी विमान तैनात किए। रॉयल नेवी के जहाज और RAF के P8 विमान लगातार निगरानी करते रहे। समुद्र के अंदर गतिविधियों को ट्रैक करने के लिए सोनोबॉय तकनीक का इस्तेमाल किया गया और हजारों किलोमीटर तक निगरानी अभियान चलाया गया।
किस देश के साथ मिलकर हुआ ऑपरेशन?
इस ऑपरेशन में ब्रिटेन ने अपने सहयोगी देश नॉर्वे के साथ मिलकर काम किया। दोनों देशों की सेनाओं ने मिलकर रूसी यूनिट्स की पहचान की और उन्हें ट्रैक किया। यह भी बताया गया कि रूस की GUGI यूनिट समुद्र के नीचे के ढांचे के पास संदिग्ध गतिविधियां कर रही थी।
प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री ने क्या कहा?
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने कहा कि देश की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं होगा। वहीं रक्षा मंत्री जॉन हीली ने रूस को चेतावनी देते हुए कहा कि किसी भी तरह की छेड़छाड़ के गंभीर परिणाम होंगे। उन्होंने साफ कहा कि ब्रिटेन हर खतरे का जवाब देने के लिए तैयार है।
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