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ईरान-US के बीच युद्धविराम: क्या ट्रंप के हमले का आदेश होता युद्ध अपराध, कार्रवाई के डर से रुके राष्ट्रपति?

स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: Kirtivardhan Mishra Updated Wed, 08 Apr 2026 12:41 PM IST
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सार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से धमकी दी गई थी कि अगर ईरान 7 अप्रैल, मंगलवार रात 8 बजे (भारतीय समयानुसार 8 अप्रैल, सुबह 5.30 बजे) तक होर्मुज नहीं खोलता है तो अमेरिकी सेना ईरान के पावर प्लांट्स, पुलों को निशाना बनाएगी। हालांकि, ट्रंप की इन धमकियों को अमेरिकी नेताओं ने नरसंहार से जुड़ी धमकियां करार दिया। इसके बाद अंतिम समय में ट्रंप ने ईरान पर हमले की योजना को टाल दिया और दो हफ्ते के सीजफायर पर सहमति की बात कही। 

US attacks Iran Donald Trump War Crimes Civilian Infrastructure targetting Hormuz Strait Power Plants Bridges
युद्ध विराम से पहले ट्रंप की ईरान को धमकियां। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

अमेरिका और ईरान के बीच मंगलवार-बुधवार की दरमियानी रात दो हफ्ते के अस्थायी युद्धविराम पर सहमति बन गई। यह समझौता ऐसे समय में हुआ, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार ईरान को तबाह करने की धमकी देते रहे। ट्रंप ने अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए तीन दिन पहले ही धमकी दी थी कि अगर तेहरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य नहीं खोला और अमेरिका के साथ किसी डील पर नहीं पहुंचा तो इसका अंजाम बुरा होगा। ट्रंप ने चेतावनी जारी करते हुए कहा था कि 7 अप्रैल के रात 8 बजे (भारतीय समयानुसार 8 अप्रैल सुबह 5.30 बजे) तक युद्ध शुरू हो सकता है और अमेरिका संघर्ष में ईरान के ऊर्जा संयंत्रों (पावर प्लांट्स) और पुलों को निशाना बनाएगा। 
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ट्रंप की चेतावनी से साफ है कि अमेरिका 28 फरवरी को शुरू हुए युद्ध को खत्म करने के लिए निर्णायक कार्रवाई करने की तैयारी में है। हालांकि, ट्रंप ने जो धमकियां दी हैं, उनमें ईरान के नागरिक इन्फ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाने की बात कही गई। इतना ही नहीं मंगलवार को एक पोस्ट में उन्होंने कहा था कि ईरान की एक पूरी सभ्यता का एक रात में विनाश हो सकता है। इसके बाद से ही अमेरिका के साथ-साथ दुनियाभर में ट्रंप की आलोचना शुरू हो गई। नेताओं ने इसे नरसंहार की धमकी से जोड़ना शुरू कर दिया। विशेषज्ञों के मुताबिक, संघर्ष में नागरिकों, उनके ठिकानों या आम लोगों से जुड़ी सुविधा को निशाना बनाना युद्ध अपराध की श्रेणी में आता, जिसके लिए कानून के तहत सजा दी सकती है।
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आइये जानते हैं कि डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से ईरान को क्या-क्या चेतावनियां दी गईं? इनके क्या मायने हैं? क्या अमेरिका ईरान में जो करने की धमकी दे रहा था, क्या वह युद्ध अपराध होता?

डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से ईरान को क्या-क्या चेतावनियां दी गई हैं?

1. नागरिक बुनियादी ढांचे को नष्ट करने की धमकी 

ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि अगर ईरान ने उनकी समय-सीमा (अमेरिकी समयानुसार- मंगलवार रात 8 बजे) तक होर्मुज जलडमरूमध्य नहीं खोला, तो अमेरिका ईरान के पुलों, बिजली संयंत्रों, तेल के कुओं और पानी साफ करने वाले संयंत्रों पर बमबारी करेगा। उन्होंने सोशल मीडिया पर धमकी देते हुए इसे पावर प्लांट डे और ब्रिज डे का नाम दिया और कहा कि वह ईरान के हर एक बिजली संयंत्र पर हमला करेंगे। 

2. पूरी सभ्यता को खत्म करने की चेतावनी 

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म- ट्रूथ सोशल पर मंगलवार को लिखा, "आज रात एक पूरी सभ्यता मर जाएगी, जिसे कभी वापस नहीं लाया जा सकेगा।" उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी दावा किया कि पूरे ईरान देश को सिर्फ एक रात में खत्म किया जा सकता है। इसके साथ ही उन्होंने ईरान की सरकार को पाषाण युग में वापस भेजने की धमकी भी दी।

3. सत्ता परिवर्तन की लगातार धमकी

ट्रंप ने ईरान में 47 वर्षों के जबरन वसूली, भ्रष्टाचार और मौत के दौर को खत्म करते हुए पूर्ण और समग्र सत्ता परिवर्तन की बात कही। हालांकि, वे कई मौकों पर अपने ही बयानों को बदलते रहे हैं और कई मौकों पर दावा कर चुके हैं कि अमेरिकी अभियानों में ईरान की सत्ता को खत्म किया जा चुका है और वे नई सत्ता के नेताओं से बात कर रहे हैं।

 

4. तेल के कुओं-खर्ग पर कब्जे की मंशा

ट्रंप कई मीडिया इंटरव्यू में कह चुके हैं कि अगर उनके हाथ में होता, तो वह ईरान के तेल पर कब्जा कर लेते और उससे खूब पैसा कमाते। यहां तक कि ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर कब्जे और इसके बाद यहां से गुजरने वाले जहाजों से कीमत लेने तक की बात कही है।

5. आक्रामक और अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल 

अपनी धमकियों में ट्रंप ने बेहद भड़काऊ भाषा का उपयोग किया है। उन्होंने ईरानी नेताओं को जानवर करार दिया। उन्होंने अपने एक पोस्ट में अभद्रता प्रदर्शित करते हुए ईरान के नरक में जलने तक की बात कह दी। 

6. अंतरराष्ट्रीय कानूनों का बनाया मजाक

विशेषज्ञों, अमेरिकी नेताओं और मानवाधिकार संगठनों ने इन धमकियों की कड़ी निंदा की है और कहा है कि नागरिक बुनियादी ढांचे को अंधाधुंध निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत सीधे तौर पर युद्ध अपराध के वर्ग में आता है। हालांकि, इसके जवाब में ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि वह संभावित युद्ध अपराध करने को लेकर बिल्कुल भी चिंतित नहीं हैं, और उनका मानना है कि ईरान के पास परमाणु हथियार होना असली युद्ध अपराध है। माना जा रहा है कि अपने बयानों के बावजूद ट्रंप अमेरिकी राजनीतिक व्यवस्था और बिना संसदीय मंजूरी के कार्रवाई से पीछे हट गए।

ईरान ने ट्रंप के बयानों पर क्या प्रतिक्रिया दी?


धमकियों को बकवास बताया: ईरान के एक सैन्य कमांडर ने ट्रंप की धमकियों को सीधे तौर पर निराधार और भ्रम से भरा करार दिया।

जवाबी कार्रवाई की चेतावनी: ईरानी सशस्त्र बलों के खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर्स के प्रवक्ता इब्राहिम जोलफाकरी ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर गैर-नागरिक लक्ष्यों पर हमले दोहराए गए, तो ईरान की जवाबी कार्रवाई और ज्यादा ताकत के साथ और व्यापक स्तर पर की जाएगी।

अमेरिकी जनता से अपील: ईरानी विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने अमेरिकी नागरिकों से आग्रह किया कि वे अपनी सरकार को ईरान के खिलाफ छेड़े गए इस अनुचित और आक्रामक युद्ध के लिए जिम्मेदार ठहराएं। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने भी अमेरिकियों को संबोधित करते हुए एक पत्र जारी किया और इसमें साफ किया है कि ईरान ने यह युद्ध शुरू नहीं किया, बल्कि इसके लिए ट्रंप सरकार जिम्मेदार है। 

युद्धविराम का प्रस्ताव खारिज: कूटनीतिक मोर्चे पर ईरान ने 45-दिवसीय युद्धविराम के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। ईरान का तर्क है कि लड़ाई में इस तरह के ठहराव से दुश्मनों को आगे के संघर्ष के लिए खुद को तैयार करने का मौका मिल जाएगा। ईरान ने अस्थायी युद्धविराम के बजाय अमेरिका को एक 10-सूत्रीय जवाब भेजा है, जिसमें ईरान की शर्तों के साथ युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करने की मांग की गई है।

ट्रंप ने जिन कार्रवाई की धमकियां दीं, क्या वह युद्ध अपराध हैं?


1. जिनेवा कन्वेंशन और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों के तहत नागरिकों के जीवित रहने के लिए बेहद जरूरी चीजों, जैसे पानी साफ करने वाले संयंत्र, बिजली ग्रिड और पुल को सैन्य लक्ष्य बनाना पूरी तरह से गैरकानूनी और प्रतिबंधित है।

अमेरिकी वायु सेना के पूर्व जज एडवोकेट और प्रोफेसर माइकल श्मिट चेतावनी देते हैं कि ट्रंप जिस तरह के अंधाधुंध हमलों की बात कर रहे हैं, उनके कारण हमले में शामिल नेताओं और सैन्य कमांडरों को आपराधिक आरोपों का सामना करना पड़ सकता है। वे बताते हैं कि युद्ध अपराधों पर 'सार्वभौमिक अधिकार क्षेत्र' लागू होता है, जिसका मतलब यह है कि कोई भी देश इनके खिलाफ सैद्धांतिक रूप से मुकदमा चला सकता है।

2. ट्रंप ने युद्ध के नियमों के तहत विशिष्ट सैन्य ठिकानों के बजाय ईरान के सभी पुलों और बिजली संयंत्रों को नष्ट करने की धमकी दी है, जिसे सैन्य कानूनी भाषा में अंधाधुंध हमला कहा जाता है जो कि एक जबरदस्त गंभीर युद्ध अपराध है। युद्ध के नियमों के अनुसार, किसी भी लक्ष्य पर हमले से पहले यह स्थापित करना आवश्यक है कि उससे स्पष्ट सैन्य लाभ होगा, न कि अंधाधुंध तबाही।

3. सैन्य कानूनों के जानकारों का कहना है कि नागरिक आबादी को डराने और उनमें दहशत फैलाने के प्राथमिक उद्देश्य से हिंसा की धमकी देना भी अपने आप में एक युद्ध अपराध माना जाता है। अमेरिका वायुसेना की रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल और अब साउथवेस्टर्न लॉ स्कूल में प्रोफेसररेचल वैनलैंडिंघम का कहा है कि ट्रंप न सिर्फ युद्ध अपराध करने की धमकी दे रहे हैं, बल्कि नागरिकों में दहशत फैलाने वाली उनकी यह बयानबाजी अपने आप में एक युद्ध अपराध है। वे चेतावनी देती हैं कि ईरान के हर पुल और बिजली संयंत्र को नष्ट करने की धमकी एक अंधाधुंध हमला है, जो दुनिया को बिना नियम वाले युद्ध के खतरनाक दौर में वापस ले जाएगा।

4. अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक, भले ही कुछ बुनियादी ढांचों का इस्तेमाल नागरिक और सैन्य दोनों उद्देश्यों के लिए होता हो, उन पर हमला करना तब तक अवैध है, जब तक कि नागरिकों को होने वाला संभावित नुकसान सैन्य लाभ के मुकाबले ज्यादा हो। ऐसे बिजली संयंत्रों और बुनियादी ढांचे पर हमला करना जो करोड़ों नागरिकों की आजीविका, अस्पतालों और बुनियादी जरूरतों के लिए आवश्यक है, युद्ध केस सिद्धांत का सीधा उल्लंघन है। एमनेस्टी इंटरनेशनल की वरिष्ठ निदेशक एरिका ग्वेरा रोसस ने भी यह नियम स्पष्ट करते हुए कहा कि यह युद्ध अपराध होगा।

वहीं, अमेरिकी सेना के जेएजी कोर की पूर्व वकील मार्गरेट डोनोवन के मुताबिक, पहले कई सैन्य वकील नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमले को युद्ध अपराध कहने से हिचकिचाते थे, क्योंकि कुछ विशेष परिस्थितियों में यह वैध हो सकता है। लेकिन ट्रंप की हालिया धमकियों ने उनकी राय बदल दी है। डोनोवन के अनुसार, ट्रंप की धमकियां सीधे तौर पर खतरा हैं, क्योंकि यह नागरिकों के लिए विनाशकारी हो सकता है।

5. इसके अलावा 100 से अधिक वकीलों और विशेषज्ञों ने जस्ट सिक्योरिटी मैगजीन में एक खुले पत्र में कहा है कि अंतरराष्ट्रीय कानून नागरिकों के जीवित रहने के लिए जरूरी चीजों की रक्षा करता है। विशेषज्ञों ने लिखा है कि अगर ट्रंप की धमकियों पर अमल किया जाता है, तो इसके नतीजे सीधा-सीधा युद्ध अपराध होंगे। 

इन सभी गंभीर आपत्तियों और चेतावनियों के बावजूद ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि वह युद्ध अपराध करने की संभावनाओं को लेकर बिल्कुल भी चिंतित नहीं हैं। उन्होंने इस बात का बचाव करते हुए तर्क दिया है कि ईरान का परमाणु हथियार हासिल करना ही असली युद्ध अपराध है, और उनका मानना है कि ईरानी नेताओं की कथित क्रूरता के कारण अंतरराष्ट्रीय कानून तोड़ने में उन्हें कोई हिचक नहीं है।

क्या ट्रंप पर कार्रवाई हो सकती थी?

जज एडवोकेट माइकल श्मिट के मुताबिक, युद्ध अपराध एक ऐसा विषय है जिस पर 'सार्वभौमिक अधिकार क्षेत्र' लागू होता है। इसका मतलब है कि दुनिया का कोई भी देश सैद्धांतिक रूप से इन हमलों में शामिल राजनेताओं (जिसमें राष्ट्रपति ट्रंप भी शामिल हैं) और सैन्य कमांडरों के खिलाफ युद्ध अपराध का आपराधिक मुकदमा चला सकता है।

चूंकि, अमेरिका और ईरान अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (आईसीसी) के अधिकार को मान्यता नहीं देते हैं और ट्रंप प्रशासन ने आईसीसी पर प्रतिबंध भी लगाए हैं, लेकिन सार्वभौमिक अधिकार क्षेत्र के कारण अन्य देश फिर भी स्वतंत्र रूप से कानूनी कार्रवाई करने में सक्षम हैं।

विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि युद्ध अपराधों के मामलों में कोई समय-सीमा नहीं होती है। ऐसे अपराधों या आदेशों में शामिल होने वाले राजनेता या सैन्य अधिकारी यदि भविष्य में यूरोप या अन्य देशों की यात्रा करते हैं, तो उन पर वहां के कानूनों के तहत कार्रवाई की जाती।

अमेरिका के भीतर भी ट्रंप के खिलाफ राजनीतिक कदम उठाए जा रहे हैं। डेमोक्रेटिक सांसद यास्मीन अंसारी ने ट्रंप द्वारा छेड़े गए इस युद्ध और युद्ध अपराधों की धमकियों के मद्देनजर उनके खिलाफ अमेरिकी संविधान के 25वें संशोधन को लागू करने की मांग की है (जिसे राष्ट्रपति को पद से हटाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है)।


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