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ब्रिटेन में 'आंटी' कहना पड़ा भारी: भारतीय मूल की महिला ने जीता केस, नर्स को लगा भारी जुर्माना

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लंदन Published by: राकेश कुमार Updated Wed, 08 Apr 2026 03:27 PM IST
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सार

ब्रिटेन के एनएचएस में काम करने वाली 61 वर्षीय इल्डा एस्तेवेस ने अपने सहकर्मी के खिलाफ 'उत्पीड़न' का मुकदमा जीता है। सहकर्मी उन्हें उनकी मर्जी के खिलाफ 'आंटी' कहकर बुलाता था। कोर्ट ने इसे उम्र और लिंग के आधार पर भेदभाव मानते हुए महिला को करीब 1.5 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है।

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नर्स ( प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार

कार्यस्थल पर बातचीत के दौरान हम अक्सर सम्मान देने के लिए 'आंटी' या 'अंकल' जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पेशेवर जगह पर बिना मर्जी के किसी को 'आंटी' कहना कानूनी मुसीबत बन सकता है? ब्रिटेन में ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां भारतीय मूल की एक स्वास्थ्यकर्मी ने खुद को 'आंटी' बुलाए जाने पर केस जीत लिया है।
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क्या है पूरा मामला?
ब्रिटेन की नेशनल हेल्थ सर्विस (एनएचएस) में 61 वर्षीय इल्डा एस्तेवेस हेल्थकेयर असिस्टेंट के पद पर कार्यरत हैं। उनके साथ काम करने वाले नर्स चार्ल्स ओपोंग उन्हें बार-बार 'आंटी' कहकर संबोधित करते थे। इल्डा को यह संबोधन पसंद नहीं था। उन्होंने स्पष्ट रूप से ओपोंग से कहा था कि वे उन्हें उनके नाम से बुलाएं। इसके बावजूद, ओपोंग ने अपनी आदत नहीं बदली। उन्हें सार्वजनिक जगहों जैसे कॉरिडोर और ऑफिस में 'आंटी' कहना जारी रखा। इतना ही नहीं, ओपोंग ने इल्डा से एक अन्य बुजुर्ग सहकर्मी के साथ 'जोड़ी' बनाने की बात भी कही थी। इन बातों से आहत होकर इल्डा ने वॉटफोर्ड एम्प्लॉयमेंट ट्रिब्यूनल में शिकायत दर्ज कराई।
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कोर्ट की अहम टिप्पणी
सुनवाई के दौरान घाना मूल के नर्स ओपोंग ने तर्क दिया कि उनकी संस्कृति में उम्र में बड़ी महिलाओं को सम्मान देने के लिए 'आंटी' कहा जाता है। कोर्ट ने इस सांस्कृतिक पहलू को स्वीकार तो किया, लेकिन इसे उत्पीड़न के दायरे से बाहर नहीं माना। जज जॉर्ज एलीओट की अध्यक्षता वाले पैनल ने कहा कि ओपोंग का मकसद 'भद्दा मजाक' करना था। कोर्ट ने माना कि जब किसी कर्मचारी ने स्पष्ट कर दिया है कि उसे किसी खास शब्द से संबोधित न किया जाए, तो बार-बार वही शब्द दोहराना एक अपमानजनक माहौल पैदा करता है। कोर्ट ने इसे उम्र और लिंग के आधार पर उत्पीड़न माना।

मुआवजे का आदेश
ट्रिब्यूनल ने वेस्ट लंदन एनएचएस ट्रस्ट को आदेश दिया है कि वे इल्डा एस्तेवेस को उनकी भावनाओं को ठेस पहुंचाने के बदले मुआवजे के रूप में 1,425.15 पाउंड यानी करीब 1.5 लाख रुपये का भुगतान करें। हालांकि, इल्डा की ओर से लगाए गए नस्लीय भेदभाव और वेतन कटौती के अन्य आरोपों को कोर्ट ने खारिज कर दिया।



 
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