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ईरान से भारत लौटने में मदद कैसे?: सीजफायर के बाद अशांत इलाके में फंसे लोग क्या करें? यहां जानें सबकुछ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दुबई
Published by: राकेश कुमार
Updated Wed, 08 Apr 2026 04:11 PM IST
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सार
ईरान में खतरों को देखते हुए भारत ने अपने नागरिकों के लिए 'एग्जिट' एडवाइजरी जारी की है। दूतावास ने भारतीयों को सुरक्षित रास्तों से देश छोड़ने और बॉर्डर की ओर अकेले न जाने की सलाह दी है। युद्ध शुरू होने के समय वहां करीब 9,000 भारतीय थे, जिनमें से अधिकांश को निकालने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
ईरान में भारतीय दूतावास ने जारी की एडवाइजरी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पश्चिम एशिया में चल रहे भीषण तनाव के बीच भारत सरकार ने ईरान में रह रहे अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर बड़ी चेतावनी जारी की है। बुधवार को तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने एक नई एडवाइजरी जारी करते हुए सभी भारतीय नागरिकों को जल्द से जल्द ईरान छोड़ने की सलाह दी है।
दूतावास की सख्त हिदायत
भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि सात अप्रैल की पुरानी एडवाइजरी के बाद भी जो भारतीय अब भी ईरान में हैं, उन्हें दूतावास के साथ तालमेल बिठाकर सुरक्षित बाहर निकल जाना चाहिए। भारतीय दूतावास ने यह भी चेतावनी यह भी दी है कि कोई भी भारतीय नागरिक दूतावास से चर्चा किए बिना किसी भी अंतरराष्ट्रीय जमीनी सीमा को पार करने की कोशिश न करे। युद्ध की स्थिति में सीमाओं पर सुरक्षा बल बेहद आक्रामक होते हैं, ऐसे में बिना तालमेल के वहां जाना जानलेवा साबित हो सकता है।
मदद के लिए जारी हुए इमरजेंसी नंबर
मुसीबत में फंसे भारतीयों के लिए सरकार ने हेल्पलाइन नंबर और ईमेल आईडी जारी की है। मदद के लिए +989128109115, +989128109102, +989128109109, +989932179359 और cons.tehran@mea.gov.in ईमेल के जरिए संपर्क किया जा सकता है।
यह भी पढ़ें: Sabarimala: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- धर्म में अंधविश्वास क्या है, इसका फैसला करने का हमें अधिकार; सरकार का विरोध
युद्ध विराम की खबरों के बीच डर का माहौल
यह एडवाइजरी उस समय आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के 'कंडीशनल सीजफायर' यानी की शर्तों के साथ युद्ध विराम पर सहमति बनी है। इसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को शिपिंग के लिए खोलने की बात कही गई है। हालांकि, जमीन पर हालात अभी भी तनावपूर्ण हैं, जिसके चलते भारत सरकार कोई जोखिम नहीं लेना चाहती।
28 फरवरी से दहक रहा है पश्चिम एशिया
ईरान में संघर्ष की शुरुआत 28 फरवरी 2026 को हुई थी, जब अमेरिका और इस्राइल ने संयुक्त रूप से ईरान पर हमला किया था। इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और कई शीर्ष कमांडरों की मौत हो गई थी। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए पूरे खाड़ी क्षेत्र को युद्ध की आग में झोंक दिया। आंकड़ों के मुताबिक, जब युद्ध शुरू हुआ तब ईरान में छात्रों सहित लगभग 9,000 भारतीय मौजूद थे। भारत सरकार के 'रेस्क्यू ऑपरेशन' के जरिए अब तक करीब 1,800 लोग सुरक्षित स्वदेश लौट चुके हैं। बाकी बचे लोगों को सुरक्षित निकालना अब सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
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दूतावास की सख्त हिदायत
भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि सात अप्रैल की पुरानी एडवाइजरी के बाद भी जो भारतीय अब भी ईरान में हैं, उन्हें दूतावास के साथ तालमेल बिठाकर सुरक्षित बाहर निकल जाना चाहिए। भारतीय दूतावास ने यह भी चेतावनी यह भी दी है कि कोई भी भारतीय नागरिक दूतावास से चर्चा किए बिना किसी भी अंतरराष्ट्रीय जमीनी सीमा को पार करने की कोशिश न करे। युद्ध की स्थिति में सीमाओं पर सुरक्षा बल बेहद आक्रामक होते हैं, ऐसे में बिना तालमेल के वहां जाना जानलेवा साबित हो सकता है।
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⚠️ Advisory as on 08 April 2026. pic.twitter.com/pusFQIAKKI
— India in Iran (@India_in_Iran) April 8, 2026
मदद के लिए जारी हुए इमरजेंसी नंबर
मुसीबत में फंसे भारतीयों के लिए सरकार ने हेल्पलाइन नंबर और ईमेल आईडी जारी की है। मदद के लिए +989128109115, +989128109102, +989128109109, +989932179359 और cons.tehran@mea.gov.in ईमेल के जरिए संपर्क किया जा सकता है।
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युद्ध विराम की खबरों के बीच डर का माहौल
यह एडवाइजरी उस समय आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के 'कंडीशनल सीजफायर' यानी की शर्तों के साथ युद्ध विराम पर सहमति बनी है। इसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को शिपिंग के लिए खोलने की बात कही गई है। हालांकि, जमीन पर हालात अभी भी तनावपूर्ण हैं, जिसके चलते भारत सरकार कोई जोखिम नहीं लेना चाहती।
28 फरवरी से दहक रहा है पश्चिम एशिया
ईरान में संघर्ष की शुरुआत 28 फरवरी 2026 को हुई थी, जब अमेरिका और इस्राइल ने संयुक्त रूप से ईरान पर हमला किया था। इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और कई शीर्ष कमांडरों की मौत हो गई थी। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए पूरे खाड़ी क्षेत्र को युद्ध की आग में झोंक दिया। आंकड़ों के मुताबिक, जब युद्ध शुरू हुआ तब ईरान में छात्रों सहित लगभग 9,000 भारतीय मौजूद थे। भारत सरकार के 'रेस्क्यू ऑपरेशन' के जरिए अब तक करीब 1,800 लोग सुरक्षित स्वदेश लौट चुके हैं। बाकी बचे लोगों को सुरक्षित निकालना अब सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
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