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US: यूक्रेन को 72.5 करोड़ डॉलर की मदद देने की तैयारी कर रहे बाइडन, रूस के खिलाफ इन हथियारों से बनाएंगे मजबूत
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Thu, 28 Nov 2024 07:50 AM IST
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सार
बताया गया है कि यूक्रेन के लिए हथियारों के इस पैकेज का आधिकारिक नोटिफिकेशन सोमवार तक ही संसद के पास भेजा जा सकता है। इस पैकेज की सामग्री और आकार भी आने वाले दिनों में बदल सकता है और इस पर बाइडन के हस्ताक्षर होना तय है।
वोलोदिमीर जेलेंस्की, जो बाइडन
- फोटो : X/VolodymyrZelenskyy
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विस्तार
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के कार्यकाल में अभी करीब दो महीने का समय और रह गया है। ऐसे में रिपब्लिकन नेता डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति पद संभालने से पहले डेमोक्रेट नेता रूस के साथ युद्ध में घिरे यूक्रेन की निर्णायक मदद करने की तैयारी कर रहे हैं। रिपोर्ट्स की मानें तो बाइडन ने इसके लिए यूक्रेन को 72.5 करोड़ डॉलर के पैकेज के जरिए मदद भेजने की तैयारी भी कर ली है।
अमेरिकी सरकार के दो अधिकारियों ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि आधिकारिक योजना के तहत बाइडन इस पैकेज से यूक्रेन को हथियारों से भर देना चाहते हैं। वह यूक्रेन को अमेरिकी जखीरे से टैंक-रोधी हथियारों के अलावा बारूदी सुरंगे, ड्रोन्स, स्टिंगर मिसाइलें और हाई मोबिलिटी आर्टिलरी रॉकेट सिस्टम (HIMARS) एम्युनिशन मुहैया कराना चाहते हैं।
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, अमेरिका ने यूक्रेन को गाइडेड मल्टिपल लॉन्च रॉकेट सिस्टम (GMLRS) के लिए क्लस्टर म्यूनिशन मुहैया कराने का लक्ष्य भी रखा है। बताया गया है कि यूक्रेन के लिए हथियारों के इस पैकेज का आधिकारिक नोटिफिकेशन सोमवार तक ही संसद के पास भेजा जा सकता है। इस पैकेज की सामग्री और आकार भी आने वाले दिनों में बदल सकता है और इस पर बाइडन के हस्ताक्षर होना तय है।
गौरतलब है कि अमेरिका ने बीते कई दशकों से किसी भी देश को बारूदी सुरंगों से जुड़ी तकनीक नहीं दी है। इनके इस्तेमाल भी काफी हद तक विवादित रहा है, क्योंकि इससे बड़े स्तर पर आम नागरिकों को नुकसान पहुंचता है। करीब 160 देश इनके इस्तेमाल के खिलाफ संधि पर हस्ताक्षर कर चुके हैं। लेकिन यूक्रेन ने रूसी सेना के हमले के बाद अमेरिका से इनकी मांग की थी, ताकि रूस के सैनिकों को सीमा पर ही रोका जा सके।
विशेष ताकत का इस्तेमाल कर यूक्रेन को मदद पहुंचा रहे बाइडन
रूस के खिलाफ यूक्रेन को मदद पहुंचाने के लिए जो बाइडन राष्ट्रपति को मिली विशेष ताकत का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसे प्रेजिडेंशियल ड्रॉडाउन अथॉरिटी (पीडीए) भी कहते हैं, जिसके तहत अमेरिका आपात की स्थिति में साथी देशों की मदद के लिए अपने मौजूदा हथियारों के स्टॉक से भी मदद भेज सकता है। चौंकाने वाली बात यह है कि जहां पहले राष्ट्रपति इस ताकत का इस्तेमाल कर 12.5 करोड़ से 25 करोड़ डॉलर तक की मदद का एलान करते थे, वहीं अकेले बाइडन पद पर रहते हुए इस ताकत का इस्तेमाल कर 4 से 5 अरब डॉलर की मदद संसद की तरफ से अधिकृत करवा चुके हैं।
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अमेरिकी सरकार के दो अधिकारियों ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि आधिकारिक योजना के तहत बाइडन इस पैकेज से यूक्रेन को हथियारों से भर देना चाहते हैं। वह यूक्रेन को अमेरिकी जखीरे से टैंक-रोधी हथियारों के अलावा बारूदी सुरंगे, ड्रोन्स, स्टिंगर मिसाइलें और हाई मोबिलिटी आर्टिलरी रॉकेट सिस्टम (HIMARS) एम्युनिशन मुहैया कराना चाहते हैं।
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न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, अमेरिका ने यूक्रेन को गाइडेड मल्टिपल लॉन्च रॉकेट सिस्टम (GMLRS) के लिए क्लस्टर म्यूनिशन मुहैया कराने का लक्ष्य भी रखा है। बताया गया है कि यूक्रेन के लिए हथियारों के इस पैकेज का आधिकारिक नोटिफिकेशन सोमवार तक ही संसद के पास भेजा जा सकता है। इस पैकेज की सामग्री और आकार भी आने वाले दिनों में बदल सकता है और इस पर बाइडन के हस्ताक्षर होना तय है।
गौरतलब है कि अमेरिका ने बीते कई दशकों से किसी भी देश को बारूदी सुरंगों से जुड़ी तकनीक नहीं दी है। इनके इस्तेमाल भी काफी हद तक विवादित रहा है, क्योंकि इससे बड़े स्तर पर आम नागरिकों को नुकसान पहुंचता है। करीब 160 देश इनके इस्तेमाल के खिलाफ संधि पर हस्ताक्षर कर चुके हैं। लेकिन यूक्रेन ने रूसी सेना के हमले के बाद अमेरिका से इनकी मांग की थी, ताकि रूस के सैनिकों को सीमा पर ही रोका जा सके।
विशेष ताकत का इस्तेमाल कर यूक्रेन को मदद पहुंचा रहे बाइडन
रूस के खिलाफ यूक्रेन को मदद पहुंचाने के लिए जो बाइडन राष्ट्रपति को मिली विशेष ताकत का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसे प्रेजिडेंशियल ड्रॉडाउन अथॉरिटी (पीडीए) भी कहते हैं, जिसके तहत अमेरिका आपात की स्थिति में साथी देशों की मदद के लिए अपने मौजूदा हथियारों के स्टॉक से भी मदद भेज सकता है। चौंकाने वाली बात यह है कि जहां पहले राष्ट्रपति इस ताकत का इस्तेमाल कर 12.5 करोड़ से 25 करोड़ डॉलर तक की मदद का एलान करते थे, वहीं अकेले बाइडन पद पर रहते हुए इस ताकत का इस्तेमाल कर 4 से 5 अरब डॉलर की मदद संसद की तरफ से अधिकृत करवा चुके हैं।

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