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Explainer: मेलोनी ही नहीं, मैक्रों-मर्ज-मोदी जैसे करीबियों पर भी बयानबाजी कर चुके ट्रंप; जानें कैसा मिला जवाब
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Sun, 21 Jun 2026 05:59 PM IST
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सार
ट्रंप ने हाल ही में इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी को लेकर बयानबाजी की है। हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब अमेरिका के राष्ट्रपति ने इस तरह की टिप्पणियों को लेकर चर्चा में हों। इससे पहले भी ट्रंप अपने सहयोगी देशों और नेताओं को अपने बयानों के जरिए घेरने की कोशिश करते रहे हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बयानबाजी का अमेरिका और अन्य देशों के रिश्तों पर पड़ा है असर।
- फोटो : अमर उजाला/AI
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विस्तार
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के बीच कुछ दिन पहले ही शुरू हुआ एक विवाद अचानक बढ़ गया है। दरअसल, हाल ही में ट्रंप ने हाल ही में इटली के एक मीडिया समूह को दिए इंटरव्यू में कहा था कि मेलोनी उनके साथ तस्वीर लेने के लिए काफी बेताब थीं। ट्रंप ने कहा कि वह तस्वीर नहीं लेना चाहते थे, लेकिन उन्हें मेलोनी के लिए बुरा लग रहा था। ट्रंप के इस बयान पर मेलोनी ने पलटवार किया और कहा कि ट्रंप के यह सभी बनावटी हैं। मुझे समझ नहीं आता कि ट्रंप अपने सहयोगियों को लेकर इस तरह के बयान क्यों देते हैं।
चौंकाने वाली बात यह है कि ट्रंप और मेलोनी के बीच इस टकराव का यहीं अंत नहीं हुआ। ट्रंप ने एक बार फिर मेलोनी की तरफ से साथ तस्वीर खिंचाने की मांग की बात दोहराई तो वहीं मेलोनी ने एक्स पर अपने पोस्ट में ट्रंप पर फिर पलटवार किया। हालांकि, यह पहली बार नहीं था, जब अमेरिका के राष्ट्रपति ने इस तरह की हरकतें की हों। इससे पहले भी ट्रंप अपने सहयोगी देशों और नेताओं को अपने बयानों के जरिए घेरने की कोशिश करते रहे हैं। फिर चाहे बात फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की निजी जिंदगी पर टिप्पणी से जुड़ी हो या ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीएर स्टार्मर पर तंज कसने की। ट्रंप ने इन सभी को लेकर विवादित टिप्पणियां की हैं।
चौंकाने वाली बात यह है कि ट्रंप और मेलोनी के बीच इस टकराव का यहीं अंत नहीं हुआ। ट्रंप ने एक बार फिर मेलोनी की तरफ से साथ तस्वीर खिंचाने की मांग की बात दोहराई तो वहीं मेलोनी ने एक्स पर अपने पोस्ट में ट्रंप पर फिर पलटवार किया। हालांकि, यह पहली बार नहीं था, जब अमेरिका के राष्ट्रपति ने इस तरह की हरकतें की हों। इससे पहले भी ट्रंप अपने सहयोगी देशों और नेताओं को अपने बयानों के जरिए घेरने की कोशिश करते रहे हैं। फिर चाहे बात फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की निजी जिंदगी पर टिप्पणी से जुड़ी हो या ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीएर स्टार्मर पर तंज कसने की। ट्रंप ने इन सभी को लेकर विवादित टिप्पणियां की हैं।
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यह जानना अहम है कि ट्रंप इससे पहले कब-किस करीबी नेता को लेकर विवादित टिप्पणी कर चुके हैं? उनकी टिप्पणियों को लेकर किस नेता ने क्या जवाब दिया? कब-कब इन वार-पलटवार से दो देशों के रिश्तों पर भी असर पड़ा? भारत के प्रधानमंत्री को लेकर अब तक ट्रंप की क्या टिप्पणियां रही हैं? इस पर उन्हें क्या प्रतिक्रिया मिली? आइये जानते हैं...
हाल ही में फ्रांस के एवियन-ला-बॉन में हुए जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के बीच एक बड़ा कूटनीतिक विवाद सामने आया है।
फोटो खिंचवाने को लेकर ट्रंप का दावा
विवाद की शुरुआत तब हुई जब ट्रंप ने इटली के एलए7 टीवी चैनल को दिए एक साक्षात्कार में दावा किया कि मेलोनी ने उनके साथ एक तस्वीर खिंचवाने के लिए उनसे मिन्नतें की थीं। ट्रंप ने कहा कि मेलोनी यह फोटो इतनी शिद्दत से चाहती थीं कि उन्हें उन पर तरस आ गया, और उन्होंने मेलोनी पर कटाक्ष करते हुए यह भी कहा कि उन्हें तो खुश होना चाहिए कि ट्रंप ने उनसे बात की। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर यह भी आरोप लगाया कि मेलोनी ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान का विरोध करने के कारण अपने देश में गिरती लोकप्रियता की वजह से वॉशिंगटन के साथ संबंध सुधारने की कोशिश कर रही हैं।
ट्रंप का मेलोनी से क्या रहा हालिया विवाद?
हाल ही में फ्रांस के एवियन-ला-बॉन में हुए जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के बीच एक बड़ा कूटनीतिक विवाद सामने आया है।
फोटो खिंचवाने को लेकर ट्रंप का दावा
विवाद की शुरुआत तब हुई जब ट्रंप ने इटली के एलए7 टीवी चैनल को दिए एक साक्षात्कार में दावा किया कि मेलोनी ने उनके साथ एक तस्वीर खिंचवाने के लिए उनसे मिन्नतें की थीं। ट्रंप ने कहा कि मेलोनी यह फोटो इतनी शिद्दत से चाहती थीं कि उन्हें उन पर तरस आ गया, और उन्होंने मेलोनी पर कटाक्ष करते हुए यह भी कहा कि उन्हें तो खुश होना चाहिए कि ट्रंप ने उनसे बात की। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर यह भी आरोप लगाया कि मेलोनी ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान का विरोध करने के कारण अपने देश में गिरती लोकप्रियता की वजह से वॉशिंगटन के साथ संबंध सुधारने की कोशिश कर रही हैं।
मेलोनी का कड़ा पलटवार
मेलोनी ने ट्रंप के इन दावों को पूरी तरह से निराधार और मनगढ़ंत बताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश जारी कर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई और दो टूक शब्दों में कहा, एक बात जो उन्हें (ट्रंप को) याद रखनी चाहिए वह यह है- न तो मैं और न ही इटली कभी मिन्नतें करते हैं। मेलोनी ने ट्रंप के व्यवहार पर हैरानी जताते हुए कहा कि यह निराशाजनक है कि ट्रंप पश्चिमी देशों के दुश्मनों को लेकर उतना दृढ़ संकल्प नहीं दिखाते, जितना वे अपने सहयोगियों को नीचा दिखाने में दिखाते हैं।
ये भी पढ़ें: Trump vs Meloni: पहले वीडियो से दो-टूक जवाब, ट्रंप पर फिर बरसीं इतालवी PM मेलोनी; कहा- आपकी दोस्ती से मदद नहीं
कूटनीतिक स्तर पर असर
इस विवाद ने दोनों देशों के संबंधों में एक गंभीर दरार पैदा कर दी है। इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी ने ट्रंप की इस टिप्पणी को पूरे इटली का अपमान और गंभीर और आक्रामक करार देते हुए 21 और 22 जून को होने वाली अपनी अमेरिका यात्रा रद्द कर दी है।
मेलोनी ने ट्रंप के इन दावों को पूरी तरह से निराधार और मनगढ़ंत बताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश जारी कर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई और दो टूक शब्दों में कहा, एक बात जो उन्हें (ट्रंप को) याद रखनी चाहिए वह यह है- न तो मैं और न ही इटली कभी मिन्नतें करते हैं। मेलोनी ने ट्रंप के व्यवहार पर हैरानी जताते हुए कहा कि यह निराशाजनक है कि ट्रंप पश्चिमी देशों के दुश्मनों को लेकर उतना दृढ़ संकल्प नहीं दिखाते, जितना वे अपने सहयोगियों को नीचा दिखाने में दिखाते हैं।
ये भी पढ़ें: Trump vs Meloni: पहले वीडियो से दो-टूक जवाब, ट्रंप पर फिर बरसीं इतालवी PM मेलोनी; कहा- आपकी दोस्ती से मदद नहीं
कूटनीतिक स्तर पर असर
इस विवाद ने दोनों देशों के संबंधों में एक गंभीर दरार पैदा कर दी है। इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी ने ट्रंप की इस टिप्पणी को पूरे इटली का अपमान और गंभीर और आक्रामक करार देते हुए 21 और 22 जून को होने वाली अपनी अमेरिका यात्रा रद्द कर दी है।
तनाव की पृष्ठभूमि
मेलोनी, जिन्हें कभी यूरोप में ट्रंप का सबसे करीबी सहयोगी माना जाता था, और ट्रंप के बीच यह तनाव अचानक नहीं उपजा है। हाल के महीनों में ईरान के खिलाफ अमेरिकी युद्ध का समर्थन करने से मेलोनी के इनकार के कारण यह दूरियां बढ़ी थीं। इसके अलावा, जब अप्रैल में ट्रंप ने युद्ध की आलोचना करने वाले पोप लियो XIV पर निशाना साधा था, तब मेलोनी ने ट्रंप के बयानों को अस्वीकार्य करार दिया था। उस समय भी ट्रंप ने पलटवार करते हुए कहा था कि उन्होंने मेलोनी को साहसी समझा था, लेकिन वह गलत थे।
मेलोनी, जिन्हें कभी यूरोप में ट्रंप का सबसे करीबी सहयोगी माना जाता था, और ट्रंप के बीच यह तनाव अचानक नहीं उपजा है। हाल के महीनों में ईरान के खिलाफ अमेरिकी युद्ध का समर्थन करने से मेलोनी के इनकार के कारण यह दूरियां बढ़ी थीं। इसके अलावा, जब अप्रैल में ट्रंप ने युद्ध की आलोचना करने वाले पोप लियो XIV पर निशाना साधा था, तब मेलोनी ने ट्रंप के बयानों को अस्वीकार्य करार दिया था। उस समय भी ट्रंप ने पलटवार करते हुए कहा था कि उन्होंने मेलोनी को साहसी समझा था, लेकिन वह गलत थे।
पहले कब-किस नेता पर विवादित टिप्पणी कर चुके हैं ट्रंप?
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से पहले भी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कई अन्य वैश्विक नेताओं खासकर जी7 देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ तीखा कूटनीतिक विवाद हो चुका है।1. इमैनुएल मैक्रों, फ्रांस
व्यक्तिगत टिप्पणी और ट्रंप का दावा: ट्रंप ग्रीनलैंड, यूक्रेन और ईरान युद्ध को लेकर कई मौकों पर मैक्रों पर कटाक्ष कर चुके हैं। अप्रैल में व्हाइट हाउस में ईस्टर लंच के दौरान, ट्रंप ने ईरान के खिलाफ युद्ध में अमेरिका की मदद न करने पर फ्रांस की आलोचना की और मैक्रों के वैवाहिक जीवन का मजाक उड़ाया। उन्होंने वियतनाम के एक वायरल वीडियो का हवाला देते हुए कहा कि मैक्रों की पत्नी ब्रिजिट उनके साथ बहुत बुरा बर्ताव करती हैं। ट्रंप ने कहा कि फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की पत्नी उनके साथ बहुत बुरा व्यवहार करती हैं। ट्रंप ने मैक्रों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वह अभी भी पत्नी के 'चेहरे पर पड़े मुक्के से उबर रहे हैं'। ट्रंप अक्सर मैक्रों के लहजे की नकल करके उनका मजाक भी उड़ाते हैं।मैक्रों का पलटवार: मैक्रों ने ट्रंप की इन टिप्पणियों को खारिज करते हुए कहा कि एक राष्ट्राध्यक्ष के दूसरे राष्ट्र प्रमुख के निजी जीवन के बारे में दिए गए बयान उचित नहीं थे।
तनाव की पृष्ठभूमि: यह विवाद तब बढ़ा जब मैक्रों ने ट्रंप की ईरान युद्ध की नीतियों की कड़ी आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि युद्ध कोई तमाशा नहीं है और ट्रंप को रोज अपने बयान बदलने के बजाय अधिक सावधान और गंभीर होना चाहिए।
2. किएर स्टार्मर, ब्रिटेन
चर्चिल से तुलना और ट्रंप का अपमान: ट्रंप ने ब्रिटिश प्रधानमंत्री स्टार्मर पर तब निशाना साधा जब उन्होंने ईरान पर अमेरिकी सैन्य हमलों के लिए हिंद महासागर में स्थित ब्रिटिश बेस के इस्तेमाल की अनुमति नहीं दी। ट्रंप ने स्टार्मर को नीचा दिखाते हुए कहा, "हम किसी विंस्टन चर्चिल से नहीं निपट रहे हैं।" ट्रंप ने यह भी दावा किया था कि अफगानिस्तान में नाटो सैनिकों ने युद्ध के मोर्चे पर लड़ने से परहेज किया था।स्टार्मर का कड़ा रुख: स्टार्मर ने अफगानिस्तान में सैनिकों को लेकर की गई ट्रंप की टिप्पणी को अपमानजनक और भयावह बताया। उन्होंने साफ किया कि अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों के साथ बड़ी संख्या में ब्रिटिश सैनिकों की जान गई थी और ट्रंप इसे नजरअंदाज कर गठबंधन सेना की ओर से दी गई कुर्बानियों को नजरअंदाज कर रहे हैं।
तनाव की पृष्ठभूमि: स्टार्मर ने ईरान में पूरी सभ्यता को नष्ट करने की ट्रंप की धमकी की कड़ी निंदा की थी और खुले तौर पर कहा था कि वह ट्रंप के ऐसे बयानों से तंग आ चुके हैं। इसे लेकर ट्रंप ने तीखे तेवर अपनाए थे।
3. मार्क कार्नी, कनाडा
कब्जे की धमकी और 'गवर्नर' कहना: ट्रंप ने कई बार सार्वजनिक तौर पर कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने और उस पर कब्जा करने की धमकी दी है। वे कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी को मजाक में अक्सर गवर्नर कार्नी कहकर बुलाते हैं।कार्नी का पलटवार: दावोस में एक भाषण के दौरान कार्नी ने अमेरिका से अलग होने की वकालत की। उन्होंने ट्रंप की व्यापारिक नीतियों की निंदा करते हुए कहा कि हमें टैरिफ को हथियार की तरह इस्तेमाल करने के खिलाफ खड़ा होना चाहिए और चेतावनी दी कि अगर हम मेज पर नहीं हैं, तो हम मेन्यू (भोजन) पर हैं।
ट्रंप की चेतावनी: कार्नी के इस भाषण पर भड़कते हुए ट्रंप ने दावोस में ही पलटवार किया और कहा, "कनाडा संयुक्त राज्य अमेरिका की वजह से जिंदा है। अगली बार बयान देते समय इसे याद रखना, मार्क।"
4. फ्रेडरिक मर्ज, जर्मनी
ट्रंप की नीतियों की आलोचना: जर्मन चांसलर मर्ज ने ईरान युद्ध के मामले में अमेरिका की आलोचना करते हुए कहा था कि ईरान के नेतृत्व की तरफ से अमेरिका को अपमानित किया जा रहा है और अमेरिका बिना किसी रणनीति के युद्ध लड़ रहा है।ट्रंप का पलटवार: ट्रंप ने सोशल मीडिया पर जवाब देते हुए कहा कि मर्ज को अपने टूटे हुए देश और शरणार्थी समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए। इसके कूटनीतिक असर के रूप में ट्रंप ने जर्मनी से 5,000 अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाने का एलान कर दिया। एक बार वॉशिंगटन में द्वितीय विश्व युद्ध (डी-डे) के मौके पर आयोजित चर्चा के दौरान ट्रंप ने मर्ज पर तंज कसते हुए यह भी कह दिया था कि यह दिन जर्मनी के लिए सुखद दिन नहीं था, जिस पर मर्ज को याद दिलाना पड़ा कि यह उनके देश की नाजी तानाशाही से मुक्ति का दिन था।
5. सनाई ताकाइची, जापान
जब जापान ने ईरान युद्ध में अमेरिका का साथ देने से मना कर दिया और एक प्रेस वार्ता में पूछा गया कि ट्रंप ने हमले से पहले अपने सहयोगियों को क्यों नहीं बताया, तो ट्रंप ने जापानी प्रधानमंत्री की मौजूदगी में पर्ल हार्बर हमले का जिक्र कर दिया। ट्रंप ने कहा, "जापान से बेहतर सरप्राइज (आश्चर्यचकित करने) के बारे में कौन जानता है? आपने मुझे पर्ल हार्बर के बारे में क्यों नहीं बताया?" इस टिप्पणी ने जापान में गहरी असहजता पैदा कर दी थी। बता दें कि पर्ल हार्बर द्वितीय विश्व युद्ध के समय की घटना थी, जिसमें जापान ने अमेरिका पर हमला किया था। इसके बाद अमेरिका ने पलटवार करते हुए जापान पर दो परमाणु बम गिरा दिए थे।
7. पोप लियो XIV, वैटिकन
जब पोप लियो XIV ने ईरान के खिलाफ अमेरिका और इस्राइल की तरफ से छेड़े गए युद्ध की आलोचना की, तो ट्रंप ने उन पर सीधा और तीखा हमला किया। ट्रंप ने पोप को अपराध पर कमजोर और विदेश नीति के लिए भयानक बताया। ट्रंप ने उन पर तंज कसते हुए यह भी कहा कि उन्हें राजनेता बनने के बजाय एक महान पोप बनने पर ध्यान देना चाहिए।
8. बेंजामिन नेतन्याहू, इस्राइल
ट्रंप ने अपने करीबी सहयोगी माने जाने वाले इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को भी नहीं बख्शा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हाल ही में उन्होंने नेतन्याहू को पागल कहा और उनके लिए कथित तौर पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। ट्रंप ने यहां तक दावा कर दिया कि अगर वह न होते, तो आज इस्राइल का अस्तित्व ही नहीं होता।9. डेनमार्क और अन्य देश (ग्रीनलैंड विवाद)
ट्रंप ने डेनमार्क के स्वायत्त क्षेत्र ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की इच्छा जताई थी। जब डेनमार्क ने इस विचार को खारिज कर दिया, तो ट्रंप बुरी तरह भड़क गए। उन्होंने डेनमार्क को एहसान फरामोश कहा और धमकी दी कि वह ग्रीनलैंड पर कब्जा करने के लिए खतरनाक ताकत और बल का इस्तेमाल कर सकते हैं, जिसे रोकना नामुमकिन होगा।बाद में ग्रीनलैंड को लेकर अपनी योजना का विरोध होने के बाद ट्रंप ने डेनमार्क के साथ-साथ नॉर्वे, स्वीडन, नीदरलैंड और फिनलैंड जैसे करीबी देशों पर भी 10% टैरिफ लगाने की घोषणा कर दी थी।
10. ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया
ईरान के खिलाफ युद्ध छेड़ने के बाद ट्रंप ने मांग की थी कि उनके सहयोगी देश इसमें उनकी मदद करें। जब ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया ने इस युद्ध में अमेरिका का सैन्य साथ देने से परहेज किया, तो ट्रंप ने इन देशों की भी खुले तौर पर आलोचना की। इसके जवाब में ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने ऑन-रिकॉर्ड इस युद्ध का विरोध किया था।
ट्रंप ने भारत को लेकर कैसे लगातार बदला रुख, क्या रही सरकार की प्रतिक्रिया?
ट्रंप की टिप्पणी और दावे
डोनाल्ड ट्रंप अक्सर भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर टैरिफ (आयात शुल्क और भू-राजनीतिक मध्यस्थता को लेकर निशाना साधते हैं। ट्रंप ने कई बार भारत को टैरिफ किंग कहा है। उन्होंने भारत के निर्यात पर 50% तक के कड़े सुरक्षात्मक शुल्क लगाए हैं (जिसमें रूसी तेल की खरीद जारी रखने के लिए भारत पर लगाया गया 25% का विशेष टैक्स भी शामिल है)। उन्होंने सार्वजनिक रूप से भारत पर अमेरिकी बाजारों का गलत फायदा उठाने का आरोप लगाया है।
इसके अलावा ट्रंप ने 30 से अधिक बार यह दावा किया है कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम कराया और परमाणु युद्ध को टाला। इसके साथ ही उन्होंने कई मौकों पर सार्वजनिक मंचों से पीएम मोदी की नकल उतार कर उनका मजाक भी बनाने की कोशिश की।
भारत का पलटवार
डोनाल्ड ट्रंप की भारत को लेकर की गई बेवजह की टिप्पणियों पर विदेश मंत्रालय ने सार्वजनिक रूप से चेतावनी दी है कि आक्रामक अमेरिकी संरक्षणवाद और क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाइयों के कारण दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी पैदा हो रही है।द्विपक्षीयता पर सख्त रुख: इसके अलावा भारत ने ट्रंप के उन दावों को भी खारिज किया है, जिनमें उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान से मध्यस्थता कराने की बात कही थी। पीएम मोदी ने संसद में ट्रंप का नाम लिए बिना सीधे तौर पर कहा कि पाकिस्तान के साथ सीमा और क्षेत्रीय युद्धविराम पूरी तरह से द्विपक्षीय मामले हैं, जिन्हें किसी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप के बिना सुलझाया गया है।
सोची-समझी चुप्पी और संयम: ट्रंप के सार्वजनिक बयानों के दौरान भारतीय राजनयिकों ने रणनीतिक संयम की नीति अपनाई है। जानकारों के मुताबिक, इसका एक हालिया उदाहरण जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान मिला, जब मोदी ने ट्रंप की शर्तों के साथ रक्षा वाली टिप्पणी पर जानबूझकर कुछ नहीं कहा। इससे सार्वजनिक रूप से बात बढ़ने से बच गई और बंद कमरों में उन्होंने अपना रुख मजबूत रखा।
व्यापार में बराबरी की मांग: वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के नेतृत्व में, भारत ने लंबे समय से लंबित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लागू करने में देरी की है। भारत का साफ कहना है कि वह तब तक व्यापार समझौते को अंतिम रूप नहीं देगा जब तक कि वाशिंगटन अन्य प्रतिद्वंद्वी देशों के मुकाबले भारतीय निर्यात को बढ़त देने के लिए अपने शुल्कों को कम नहीं करता।
राजनयिक स्तर पर कड़ा विरोध: भारतीय नाविकों की मौत के बाद, नई दिल्ली ने औपचारिक और कड़ा विरोध दर्ज कराने के लिए दो बार एक वरिष्ठ अमेरिकी राजनयिक को तलब किया। मोदी ने ओमान की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य में भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर भी ट्रंप के सामने सीधे तौर पर चिंता जताई थी।
राजनयिक स्तर पर कड़ा विरोध: भारतीय नाविकों की मौत के बाद, नई दिल्ली ने औपचारिक और कड़ा विरोध दर्ज कराने के लिए दो बार एक वरिष्ठ अमेरिकी राजनयिक को तलब किया। मोदी ने ओमान की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य में भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर भी ट्रंप के सामने सीधे तौर पर चिंता जताई थी।