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कौन हैं एबेलार्डो दे ला एस्प्रिएला?: ट्रंप के करीबी, पेशे से वकील; कोलंबिया का 'टाइगर' कैसे बना राष्ट्रपति

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Mon, 22 Jun 2026 01:39 PM IST
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सार

Who is Abelardo de la Espriella?: एबेलार्डो दे ला एस्प्रिएला कोलंबिया के नए राष्ट्रपति बने हैं। पेशे से वकील और कारोबारी एबेलार्डो का राजनीति में कोई अनुभव नहीं था, लेकिन उन्होंने अपराध और सुरक्षा के मुद्दे पर चुनाव जीत लिया। डोनाल्ड ट्रंप के करीबी माने जाने वाले एबेलार्डो खुद को 'एल टाइग्रे' यानी 'टाइगर' कहते हैं। उनकी नीतियों की तुलना अल सल्वाडोर के राष्ट्रपति नायिब बुकेले से की जा रही है। आइए, विस्तार से इनके बारे में जानते हैं...

Who is Abelardo de la Espriella Trump close lawyer by profession how Colombias Tiger became president
एबेलार्डो - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

कोलंबिया के राष्ट्रपति चुनाव में दक्षिणपंथी नेता एबेलार्डो दे ला एस्प्रिएला की जीत ने पूरे लैटिन अमेरिका की राजनीति को हिला दिया है। डोनाल्ड ट्रंप के समर्थक और पेशे से वकील एबेलार्डो ने बेहद करीबी मुकाबले में वामपंथी उम्मीदवार इवान सेपेडा को पीछे छोड़कर सत्ता की दहलीज पर कदम रख दिया है। शुरुआती मतगणना के मुताबिक, एबेलार्डो को करीब 49.7 प्रतिशत वोट मिले, जबकि इवान सेपेडा को 48.7 प्रतिशत वोट हासिल हुए। एबेलार्डो की जीत को सिर्फ एक चुनावी जीत नहीं, बल्कि कोलंबिया की राजनीति में बड़े वैचारिक बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।



दिलचस्प बात यह है कि एबेलार्डो दे ला एस्प्रिएला का राजनीति में कोई अनुभव नहीं रहा है। वह पेशे से वकील और कारोबारी हैं। इसके बावजूद उन्होंने कानून-व्यवस्था, सुरक्षा और राष्ट्रवाद को चुनावी मुद्दा बनाकर जनता का समर्थन हासिल किया। चुनाव परिणाम आने के बाद उन्होंने अपने समर्थकों से कहा कि देश में एक नए युग की शुरुआत हो रही है और वह उन लोगों के भी राष्ट्रपति होंगे जिन्होंने उन्हें वोट नहीं दिया। हालांकि मौजूदा राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो और उनके समर्थकों ने शुरुआती नतीजों पर सवाल उठाए हैं और मतदान प्रक्रिया की समीक्षा की मांग की है।

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क्या एबेलार्डो का राजनीति से पहले कोई बड़ा करियर रहा है?

एबेलार्डो दे ला एस्प्रिएला लंबे समय तक वकालत और कारोबार से जुड़े रहे हैं। उन्होंने कई हाई-प्रोफाइल मामलों में पैरवी की है। उनके मुवक्किलों में वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के करीबी एलेक्स साब भी शामिल रहे हैं, जिन पर अमेरिका में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप हैं। इसके अलावा उन्होंने कोलंबिया के चर्चित कारोबारी डेविड मर्सिया गुजमान का भी केस लड़ा था, जिन्हें देश के सबसे बड़े वित्तीय घोटालेबाजों में गिना जाता है। इन मामलों को लेकर आलोचना होने पर एबेलार्डो का कहना रहा है कि एक वकील के तौर पर अपने मुवक्किलों का बचाव करना उनका पेशेवर दायित्व था।

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ट्रंप के इतने करीबी कैसे बने एबेलार्डो?

एबेलार्डो को चुनाव प्रचार के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का खुला समर्थन मिला। ट्रंप ने उन्हें "मजबूत, सख्त और समझदार नेता" बताया था। ट्रंप ने कहा था कि एबेलार्डो अवैध प्रवासन पर रोक लगाएंगे, अपराध और मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ कार्रवाई करेंगे और कानून का शासन स्थापित करेंगे। एबेलार्डो 2023 से अमेरिकी नागरिक भी हैं। उन्होंने कई साल अमेरिका के मियामी शहर में बिताए और वहीं काम किया। ट्रंप ने चुनाव से पहले यह भी कहा था कि एबेलार्डो के नेतृत्व में कोलंबिया को अमेरिका का पूरा समर्थन मिलेगा। कोलंबिया पारंपरिक रूप से अमेरिका का करीबी सहयोगी रहा है, लेकिन हाल के वर्षों में ट्रंप और गुस्तावो पेट्रो के बीच प्रवासन, शुल्क और लैटिन अमेरिका में अमेरिकी भूमिका को लेकर मतभेद रहे हैं।


अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने एबेलार्डो को चुनावी जीत पर बधाई भी दी। रुबियो ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि ट्रंप प्रशासन नई कोलंबियाई सरकार के साथ क्षेत्रीय सुरक्षा, अवैध प्रवासन पर रोक और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के लिए मिलकर काम करने को तैयार है। उन्होंने विश्वास जताया कि एबेलार्डो के नेतृत्व में कोलंबिया के बेहतर दिन आने वाले हैं और दोनों देशों के संबंध नई दिशा में आगे बढ़ेंगे।

एबेलार्डो को 'टाइगर' क्यों कहा जाता है?

  • एबेलार्डो दे ला एस्प्रिएला खुद को 'एल टाइग्रे' यानी द टाइगर कहते हैं।
  • चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने 'टाइगर' को अपनी राजनीतिक पहचान बना लिया था।
  • उनके समर्थकों का मानना है कि वह अपराध, ड्रग माफिया और अवैध सशस्त्र समूहों के खिलाफ बेहद सख्त और आक्रामक कार्रवाई करेंगे।
  • इसी सख्त छवि की वजह से समर्थक उन्हें 'टाइगर' के नाम से पुकारते हैं।
  • चुनावी रैलियों में उनके समर्थक अक्सर कोलंबिया की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम की पीली जर्सी पहनकर पहुंचते थे।
  • रैलियों में समर्थक 'मेक कोलंबिया ग्रेट अगेन' जैसे नारे भी लगाते थे।
  • सुरक्षा कारणों से एबेलार्डो अक्सर बुलेटप्रूफ ग्लास के पीछे से भाषण देते थे।
  • उनकी पूरी चुनावी रणनीति कानून-व्यवस्था, सुरक्षा और सख्त नेतृत्व की छवि पर केंद्रित रही।

क्या एबेलार्डो की तुलना नायिब बुकेले से की जा रही है?

एबेलार्डो की नीतियों और राजनीतिक शैली की तुलना अक्सर अल सल्वाडोर के राष्ट्रपति नायिब बुकेले से की जाती है। उनकी दाढ़ी की शैली से लेकर अपराध के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति तक, कई समानताएं बताई जाती हैं। एबेलार्डो ने वादा किया है कि वह ड्रग तस्करों के लिए मेगा जेल बनाएंगे, अवैध सशस्त्र समूहों के खिलाफ सैन्य अभियान चलाएंगे और अपराधियों पर सख्त कार्रवाई करेंगे। उन्होंने देश में कानून-व्यवस्था बहाल करने को अपनी सबसे बड़ी प्राथमिकता बताया है।

क्या एबेलार्डो की जीत लैटिन अमेरिका में दक्षिणपंथी लहर का हिस्सा है?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि एबेलार्डो की जीत लैटिन अमेरिका में दक्षिणपंथी राजनीति के उभार का हिस्सा है। अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर माइली और चिली के दक्षिणपंथी नेता जोस एंटोनियो कास्ट समेत कई नेताओं ने उनकी जीत का स्वागत किया है। माइली ने कहा कि कोलंबिया के लोगों ने आर्थिक स्वतंत्रता, समृद्धि और सुरक्षा का रास्ता चुना है। हालांकि चुनाव परिणामों के बाद देश में तनाव भी बढ़ गया है। काली समेत कई शहरों में विरोध प्रदर्शन हुए, जहां कुछ प्रदर्शनकारियों ने अमेरिकी झंडे जलाए और पुलिस के साथ झड़पें हुईं। इससे साफ है कि कोलंबिया इस समय गहरे राजनीतिक ध्रुवीकरण के दौर से गुजर रहा है।

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