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Explainer: एक दशक में 7वां प्रधानमंत्री देखेगा UK; किस दबाव में स्टार्मर ने छोड़ा पद, अगले PM की रेस में कौन?
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Mon, 22 Jun 2026 02:33 PM IST
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सार
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर ने सोमवार (22 जून) को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफे का एलान कर दिया। अब सत्तासीन लेबर पार्टी नए नेतृत्व को चुनने के लिए आंतरिक चुनाव कराएगी, जिसमें अलग-अलग एजेंडा और योजना रखने वाले नेता उम्मीदवारी पेश करेंगे। लेबर पार्टी की इस रेस में जो भी नेता सबसे आगे रहेगा, उसे ही प्रधानमंत्री की कुर्सी मिलेगी।
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टार्र ने दिया इस्तीफा।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
ब्रिटेन में इस वक्त सियासी हलचल मची है। वजह है देश के प्रमुख वामपंथी दल- लेबर पार्टी के बीच सियासी घमासान। इस राजनीतिक अंतर्कलह के बीच प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर का पद खतरे में आ गया। पार्टी और अपने सहयोगियों की तरफ से आलोचना झेल रहे स्टार्मर ने इसके बाद आज (22 जून) को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। चौंकाने वाली बात यह है कि स्टार्मर के पीएम पद छोड़ने के साथ ही अब ब्रिटेन में बीते एक दशक के अंदर छह प्रधानमंत्री बदल चुके हैं। यानी अगले कुछ दिनों में ब्रिटेन 10 साल में अपना सातवां पीएम देखेगा।
आइये जानते हैं कि ब्रिटेन में आखिर क्यों किएर स्टार्मर को लेकर सियासी घमासान मचा? 2024 में लेबर पार्टी को ब्रिटेन में जबरदस्त जीत दिलाने वाले स्टार्मर के लिए क्यों पार्टी में ही मुश्किलें खड़ी हो गईं? स्टार्मर के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद अब आगे क्या होगा? इस पद के लिए मौजूदा समय में कौन-कौन दावेदार सामने आए हैं और किस के इस रेस में सबसे आगे रहने की संभावना है?
आइये जानते हैं कि ब्रिटेन में आखिर क्यों किएर स्टार्मर को लेकर सियासी घमासान मचा? 2024 में लेबर पार्टी को ब्रिटेन में जबरदस्त जीत दिलाने वाले स्टार्मर के लिए क्यों पार्टी में ही मुश्किलें खड़ी हो गईं? स्टार्मर के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद अब आगे क्या होगा? इस पद के लिए मौजूदा समय में कौन-कौन दावेदार सामने आए हैं और किस के इस रेस में सबसे आगे रहने की संभावना है?
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पहले जानें- क्यों किएर स्टार्मर को लेकर मचा सियासी घमासान?
1. स्थानीय चुनावों में करारी हार और रिफॉर्म यूके की बढ़त
हाल ही में इंग्लैंड, वेल्स और स्कॉटलैंड के स्थानीय और क्षेत्रीय चुनावों में लेबर पार्टी को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। यहां पार्टी ने सैकड़ों परिषद सीटें गंवा दी हैं। इसके उलट नाइजल फराज के नेतृत्व वाली आव्रजन-विरोधी पार्टी रिफॉर्म यूके ने बड़ी बढ़त हासिल की है। लेबर पार्टी में यह डर पैदा हो गया है कि वे औद्योगिक क्षेत्रों के अपने पारंपरिक श्रमिक वर्ग के मतदाताओं को खो रहे हैं और स्टार्मर का नेतृत्व रिफॉर्म यूके की लोगों को लुभाने वाली चुनौती का सामना करने में नाकाम साबित हो रहा है।
2. आर्थिक चुनौतियां और जीवन-यापन का संकट
2024 में सत्ता में आने पर, जनता को स्टार्मर सरकार से अर्थव्यवस्था और सार्वजनिक सेवाओं, जैसे- नेशनल हेल्थ सर्विस में सुधार की बहुत उम्मीदें थीं। हालांकि, रूस-यूक्रेन संघर्ष, ईरान संघर्ष के चलते बढ़ती महंगाई, महंगे आवास और कमजोर आर्थिक विकास की वजह से आम मतदाताओं में भारी निराशा है। कई लेबर सांसदों का मानना है कि सरकार जनता को जल्द आर्थिक राहत देने में पूरी तरह विफल रही है और स्टार्मर का रवैया बड़े बदलाव करने के बजाय सिर्फ एक प्रबंधक जैसा बहुत ही सतर्क रहा है।
3. नीतियों पर यू-टर्न और पीटर मैंडेलसन विवाद
स्टार्मर की सरकार को कई विवादास्पद फैसलों जैसे कि शीतकालीन ईंधन भत्ते में कटौती और कल्याणकारी सुधारों पर जनता के विरोध के बाद अपने फैसले वापस लेने पड़े। इसके अलावा, स्टार्मर ने पीटर मैंडेलसन को अमेरिका में ब्रिटेन का राजदूत नियुक्त कर दिया, जिनके संबंध कुख्यात यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन के साथ उजागर हुए हैं। इस फैसले ने स्टार्मर के राजनीतिक निर्णय पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए और उनकी साख को नुकसान पहुंचाया।
4. कैबिनेट से इस्तीफे और लेबर सांसदों का विरोध
चुनावी हार और नेतृत्व के प्रति नाखुशी जताते हुए स्टार्मर के अपने मंत्रिमंडल से कई बड़े इस्तीफे हुए हैं। स्वास्थ्य मंत्री वेस स्ट्रीटिंग, रक्षा मंत्री जॉन हीली, सुरक्षा मंत्री जेस फिलिप्स और अल कार्न्स जैसे प्रमुख नेताओं ने सरकार के काम करने के तरीके और नीतियों का हवाला देते हुए इस्तीफा दे दिया है। स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है कि लगभग 80 से 90 लेबर सांसदों ने सार्वजनिक या निजी तौर पर स्टार्मर से तुरंत इस्तीफा देने या अपनी विदाई की समयसीमा तय करने की मांग की है।
स्टार्मर की सरकार को कई विवादास्पद फैसलों जैसे कि शीतकालीन ईंधन भत्ते में कटौती और कल्याणकारी सुधारों पर जनता के विरोध के बाद अपने फैसले वापस लेने पड़े। इसके अलावा, स्टार्मर ने पीटर मैंडेलसन को अमेरिका में ब्रिटेन का राजदूत नियुक्त कर दिया, जिनके संबंध कुख्यात यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन के साथ उजागर हुए हैं। इस फैसले ने स्टार्मर के राजनीतिक निर्णय पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए और उनकी साख को नुकसान पहुंचाया।
4. कैबिनेट से इस्तीफे और लेबर सांसदों का विरोध
चुनावी हार और नेतृत्व के प्रति नाखुशी जताते हुए स्टार्मर के अपने मंत्रिमंडल से कई बड़े इस्तीफे हुए हैं। स्वास्थ्य मंत्री वेस स्ट्रीटिंग, रक्षा मंत्री जॉन हीली, सुरक्षा मंत्री जेस फिलिप्स और अल कार्न्स जैसे प्रमुख नेताओं ने सरकार के काम करने के तरीके और नीतियों का हवाला देते हुए इस्तीफा दे दिया है। स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है कि लगभग 80 से 90 लेबर सांसदों ने सार्वजनिक या निजी तौर पर स्टार्मर से तुरंत इस्तीफा देने या अपनी विदाई की समयसीमा तय करने की मांग की है।
5. एंडी बर्नहैम की शानदार जीत से मिली सीधी चुनौती
इस राजनीतिक घमासान में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब लेबर पार्टी के दिग्गज नेता और पूर्व ग्रेटर मैनचेस्टर मेयर एंडी बर्नहैम ने मेकरफील्ड उपचुनाव में रिफॉर्म यूके के उम्मीदवार को करीब 9,000 वोटों के भारी अंतर से हरा दिया। इस जीत ने बर्नहैम को सांसद के रूप में वापस ला दिया है और अब उन्हें स्टार्मर के सबसे मजबूत विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। लेबर पार्टी के कई सांसदों का मानना है कि 2029 के चुनावों में नाइजल फराज की पार्टी का सामना केवल बर्नहैम ही कर सकते हैं।
मजेदार बात यह है कि इन सभी संकटों के बावजूद पहले स्टार्मर ने पद छोड़ने से इनकार किया और कहा है कि अगर उनके नेतृत्व को कोई औपचारिक चुनौती दी जाती है तो वे लड़ेंगे और पीछे नहीं हटेंगे। हालांकि, उनके अपने कैबिनेट सहयोगियों और सांसदों का दबाव लगातार बढ़ने के बाद उन्होंने पद छोड़ने का एलान कर दिया।
इस राजनीतिक घमासान में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब लेबर पार्टी के दिग्गज नेता और पूर्व ग्रेटर मैनचेस्टर मेयर एंडी बर्नहैम ने मेकरफील्ड उपचुनाव में रिफॉर्म यूके के उम्मीदवार को करीब 9,000 वोटों के भारी अंतर से हरा दिया। इस जीत ने बर्नहैम को सांसद के रूप में वापस ला दिया है और अब उन्हें स्टार्मर के सबसे मजबूत विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। लेबर पार्टी के कई सांसदों का मानना है कि 2029 के चुनावों में नाइजल फराज की पार्टी का सामना केवल बर्नहैम ही कर सकते हैं।
मजेदार बात यह है कि इन सभी संकटों के बावजूद पहले स्टार्मर ने पद छोड़ने से इनकार किया और कहा है कि अगर उनके नेतृत्व को कोई औपचारिक चुनौती दी जाती है तो वे लड़ेंगे और पीछे नहीं हटेंगे। हालांकि, उनके अपने कैबिनेट सहयोगियों और सांसदों का दबाव लगातार बढ़ने के बाद उन्होंने पद छोड़ने का एलान कर दिया।
स्टार्मर के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफे के बाद अब आगे क्या?
किएर स्टार्मर पार्टी की ओर से मिल रही चुनौतियों और दबाव के बीच प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे चुके हैं। अब ब्रिटेन को पिछले एक दशक में अपना सातवां प्रधानमंत्री मिलेगा। उनके इस्तीफे के बाद आगे की प्रक्रिया और राजनीतिक घटनाक्रम कुछ इस तरह होंगे...1. सत्ता का अस्थायी हस्तांतरण होगा
स्टार्मर के पीएम पद से इस्तीफे की घोषणा के बाद दो रास्ते सामने आए हैं। इनमें एक तरीका उनके कार्यवाहक पीएम बने रहने का होगा। वहीं, दूसरा तरीका किसी और नेता को अंतरिम समय के लिए पीएम नियुक्त करने का होगा।
- स्टार्मर के इस्तीफे के बाद लेबर पार्टी के नियमों के अनुसार कैबिनेट, पार्टी की नेशनल एग्जीक्यूटिव कमेटी यानी एनईसी से सलाह लेने के बाद मंत्रिमंडल के ही किसी सदस्य को कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्त करेगी। यानी यह जरूरी नहीं है कि यह पद डिप्टी पीएम डेविड लैमी को ही मिले।
- दूसरा विकल्प यह है कि स्टार्मर नए नेता के चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने तक अंतरिम समय के लिए प्रधानमंत्री पद पर बने रहने की पेशकश कर सकते हैं। ब्रिटेन में विपक्षी कंजर्वेटिव पार्टी में यह प्रक्रिया सबसे ज्यादा प्रचलन में रही है।
2. नया नेता चुनने की प्रक्रिया शुरू होगी
नए नेता और अगले प्रधानमंत्री के चुनाव के लिए एक औपचारिक प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
नए नेता और अगले प्रधानमंत्री के चुनाव के लिए एक औपचारिक प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
- किसी भी उम्मीदवार को प्रधानमंत्री पद की रेस में शामिल होने के लिए लेबर पार्टी के 20% सांसदों का समर्थन हासिल करना होगा। पार्टी के मौजूदा समय में 403 सांसद हैं, इसलिए चुनाव लड़ने के लिए कम से कम 81 सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी होंगे।
- इसके अलावा उम्मीदवार को अपने निर्वाचन क्षेत्र में पांच फीसदी लेबर पार्टी कार्यकर्ताओं या कम से कम तीन जुड़े हुए संगठनों (जिनमें से दो ट्रेड यूनियन होने चाहिए) का समर्थन भी हासिल करना होगा। स्टार्मर पहले से पीएम होने की वजह से पहले से इस रेस में शामिल रहेंगे।
- अगर इन शर्तों को सिर्फ एक ही उम्मीदवार पूरा कर पाता है, तो उसे निर्विरोध लेबर पार्टी का नेता और प्रधानमंत्री चुन लिया जाएगा। हालांकि, अगर एक से ज्यादा उम्मीदवार मैदान में होते हैं, तो लेबर पार्टी के सदस्य और संबंधित संगठन मतदान करेंगे।
- प्रधानमंत्री के चुनाव के लिए मतदान वरीयता के आधार पर होता है। अगर किसी उम्मीदवार को पहली पसंद के 50% से अधिक वोट मिल जाते हैं, तो वह जीत जाता है। अगर ऐसा नहीं होता है, तो सबसे कम वोट पाने वाले को हटा दिया जाता है और उसके वोट दूसरी पसंद के हिसाब से बांटे जाते हैं, जब तक कि किसी एक को बहुमत न मिल जाए।
3. क्या नए आम चुनाव होंगे?
नए प्रधानमंत्री के लिए देश में तुरंत आम चुनाव कराने की जरूरत नहीं होगी, क्योंकि पार्टी के पास पूर्ण बहुमत है और स्टार्मर का विरोध भी अंदरूनी है। लेबर पार्टी का जो भी नया नेता चुना जाएगा, वह खुद-ब-खुद ब्रिटेन का अगला प्रधानमंत्री बन जाएगा, क्योंकि संसद में लेबर पार्टी के पास भारी बहुमत है। विपक्षी दल सरकार गिराने के लिए अविश्वास प्रस्ताव ला सकते हैं, लेकिन 650 सीटों वाली संसद में लेबर पार्टी के 403 सांसद होने की वजह से इस प्रस्ताव के पास होने की संभावना न के बराबर है।
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर पर इस्तीफे के बढ़ते दबाव के बीच, लेबर पार्टी के कई प्रमुख नेता प्रधानमंत्री (और पार्टी नेता) पद की दावेदारी में उभर कर सामने आए हैं। हालांकि, इनमें सबसे आगे एंडी बर्नहैम माने जा रहे हैं।
नए प्रधानमंत्री के लिए देश में तुरंत आम चुनाव कराने की जरूरत नहीं होगी, क्योंकि पार्टी के पास पूर्ण बहुमत है और स्टार्मर का विरोध भी अंदरूनी है। लेबर पार्टी का जो भी नया नेता चुना जाएगा, वह खुद-ब-खुद ब्रिटेन का अगला प्रधानमंत्री बन जाएगा, क्योंकि संसद में लेबर पार्टी के पास भारी बहुमत है। विपक्षी दल सरकार गिराने के लिए अविश्वास प्रस्ताव ला सकते हैं, लेकिन 650 सीटों वाली संसद में लेबर पार्टी के 403 सांसद होने की वजह से इस प्रस्ताव के पास होने की संभावना न के बराबर है।
लेबर पार्टी में कौन-कौन से नेता पीएम पद की दावेदारी में?
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर पर इस्तीफे के बढ़ते दबाव के बीच, लेबर पार्टी के कई प्रमुख नेता प्रधानमंत्री (और पार्टी नेता) पद की दावेदारी में उभर कर सामने आए हैं। हालांकि, इनमें सबसे आगे एंडी बर्नहैम माने जा रहे हैं।
एंडी बर्नहैम: वे प्रधानमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे माने जा रहे हैं। हाल ही में मेकरफील्ड उपचुनाव में उनकी भारी जीत ने उन्हें सांसद के रूप में वापस ला दिया है, जिससे उनके लिए नेतृत्व को चुनौती देने का रास्ता साफ हो गया है। उन्हें किंग ऑफ द नॉर्थ के नाम से भी जाना जाता है और वे लेबर सांसदों और जनता के बीच काफी लोकप्रिय हैं। लेबर पार्टी के कई सहयोगियों का मानना है कि केवल वे ही तेजी से उभरती अति-दक्षिणपंथी रिफॉर्म यूके पार्टी की चुनौती का मजबूती से सामना कर सकते हैं।
वेस स्ट्रीटिंग: लेबर सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे स्ट्रीटिंग ने हाल ही में स्टार्मर पर विश्वास खोने की बात कहते हुए उनकी कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया है कि अगर पार्टी नेतृत्व के लिए कोई चुनाव होता है, तो वे उसमें जरूर हिस्सा लेंगे। स्ट्रीटिंग को पार्टी का एक बहुत ही बेहतरीन संवादकर्ता माना जाता है, हालांकि पार्टी के वामपंथी धड़े को लगता है कि उनका झुकाव ज्यादा दक्षिणपंथ की ओर है।
एंजेला रेनर: पूर्व उप-प्रधानमंत्री, जो लेबर पार्टी के सॉफ्ट लेफ्ट (कम कट्टर वाम विचारधारा) वाले धड़े में काफी लोकप्रिय हैं। उनके पास लेबर सांसदों का एक मजबूत समर्थन है और वे भी संभावित दावेदारों की सूची में एक अहम नाम हैं।
शबाना महमूद: मौजूदा गृह मंत्री शबाना महमूद को भी शीर्ष पद के लिए संभावित उम्मीदवार माना जा रहा है। पिछले साल पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने भी अप्रत्यक्ष रूप से उनका समर्थन किया था। हालांकि, स्ट्रीटिंग की तरह ही उन्हें भी पार्टी के भीतर दक्षिणपंथी झुकाव वाला माना जाता है। शबाना के माता-पिता पाकिस्तानी मूल के हैं और इसलिए ब्रिटेन में पाकिस्तानी वोटर बेस के बीच उनकी अच्छी पकड़ है।
अल कार्न्स: हाल ही में अपने पद से इस्तीफा देने वाले इस पूर्व मरीन को नेतृत्व की रेस में एक मजबूत और अपनी आवाज मजबूती से उठाने वाले नेता के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने नेतृत्व की दौड़ में शामिल होने की संभावना से इनकार नहीं किया है और कहा है कि उनका करियर महत्वाकांक्षा के बजाय सेवा के बारे में है।
कैथरीन वेस्ट: हॉर्नसी और फ्रिर्न बार्नेट से लेबर पार्टी की सांसद, जिन्होंने स्पष्ट रूप से घोषणा की है कि यदि कैबिनेट का कोई भी बड़ा नेता स्टार्मर को चुनौती नहीं देता है, तो वह खुद पार्टी नेतृत्व के लिए स्टार्मर के खिलाफ मैदान में उतरेंगी।
शबाना महमूद: मौजूदा गृह मंत्री शबाना महमूद को भी शीर्ष पद के लिए संभावित उम्मीदवार माना जा रहा है। पिछले साल पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने भी अप्रत्यक्ष रूप से उनका समर्थन किया था। हालांकि, स्ट्रीटिंग की तरह ही उन्हें भी पार्टी के भीतर दक्षिणपंथी झुकाव वाला माना जाता है। शबाना के माता-पिता पाकिस्तानी मूल के हैं और इसलिए ब्रिटेन में पाकिस्तानी वोटर बेस के बीच उनकी अच्छी पकड़ है।
अल कार्न्स: हाल ही में अपने पद से इस्तीफा देने वाले इस पूर्व मरीन को नेतृत्व की रेस में एक मजबूत और अपनी आवाज मजबूती से उठाने वाले नेता के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने नेतृत्व की दौड़ में शामिल होने की संभावना से इनकार नहीं किया है और कहा है कि उनका करियर महत्वाकांक्षा के बजाय सेवा के बारे में है।
कैथरीन वेस्ट: हॉर्नसी और फ्रिर्न बार्नेट से लेबर पार्टी की सांसद, जिन्होंने स्पष्ट रूप से घोषणा की है कि यदि कैबिनेट का कोई भी बड़ा नेता स्टार्मर को चुनौती नहीं देता है, तो वह खुद पार्टी नेतृत्व के लिए स्टार्मर के खिलाफ मैदान में उतरेंगी।