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Arshdeep Dang: दूसरे विश्व युद्ध के बाद UK में पहले सिख फाइटर पायलट बने अर्शदीप, कैसे हासिल की बड़ी कामयाबी?
Mon, 17 Aug 2026 10:53 AM IST
निर्मल कांत
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन।
Published by: निर्मल कांत
Updated Mon, 17 Aug 2026 10:53 AM IST
सार
Arshdeep Dang: भारतीय मूल के अर्शदीप सिंह डांग ब्रिटेन की रॉयल एयर फोर्स में फाइटर पायलट बनने वाले पहले सिख बन गए हैं। छह साल की उम्र में चंड़ीगढ़ से ब्रिटेन पहुंचे अर्शदीप ने कड़ी ट्रेनिंग के बाद यह मुकाम हासिल किया। आखिर कैसे उन्होंने परिवार के सपने को पूरा कर इतिहास रचा?
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अर्शदीप सिंह डांग
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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विस्तार
भारतीय मूल के फ्लाइट लेफ्टिनेंट अर्शदीप सिंह डांग ब्रिटेन की रॉयल एयर फोर्स (आरएएफ) में फाइटर पायलट के रूप में प्रशिक्षण (ट्रेनिंग) पूरा करने वाले पहले सिख बन गए हैं। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, आरएएफ ने बताया कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह पहली बार है, जब किसी सिख ने फाइटर स्क्वाड्रन से पायलट की विंग्स हासिल की हैं।
अर्शदीप सिंह डांग (28) ने शुक्रवार 14 अगस्त को उत्तर वेल्स के आरएएफ वैली में फाइटर जेट पायलट ट्रेनिंग पूरी करने के समारोह में हिस्सा लिया। आरएएफ ने बताया कि अर्शदीप सिंह डांग ब्रिटेन की सैन्य पायलट ट्रेनिंग के तहत चौथे उड़ान प्रशिक्षण स्कूल में टेक्सन विमान उड़ाने की ट्रेनिंग पूरी करने वाले पहले सिख हैं। हालांकि, उनसे पहले भी सिख लोग शुरुआती पायलट ट्रेनिंग पूरी कर चुके हैं।
डांग का जन्म 1998 में चंडीगढ़ में हुआ था। जब वह छह साल के थे, तब वह अपने परिवार के साथ ब्रिटेन चले गए। उनके पिता जगदीप सिंह डांग लुधियाना के रहने वाले हैं, जबकि उनकी मां गगनदीप कौर अमृतसर की रहने वाली हैं। उनका परिवार इंग्लैंड के साउथॉल में रहता है।
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मां का सपना था बेटा पायलट बने
इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए डांग ने बताया कि उनके दादा सरदार संतोष सिंह डांग का सपना था कि उनका बेटा पायलट बने। लेकिन जब उनके पिता छह साल के थे, तब दादा की मौत हो गई।
उन्होंने कहा, मेरे दादा सरदार संतोष सिंह डांग का सपना था कि मेरे पिता पायलट बनें। लेकिन जब मेरे पिता सिर्फ छह साल के थे, तब मेरे दादा की मौत हो गई। इसलिए मेरे पिता के पास अपना सपना पूरा करने के लिए जरूरी मौके और साधन नहीं थे। मेरे माता-पिता ने मुझे प्रोत्साहित किया और मुझे विश्वास होने लगा कि मैं पायलट बन सकता हूं और ऐसा हो गया।
कहां से पढ़ाई की?
डांग ने ब्रिस्टल विश्वविद्यालय से गणित और दर्शनशास्त्र की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने फरवरी 2022 में अधिकारी की ट्रेनिंग पूरी की और 2023 में शुरुआती उड़ान की ट्रेनिंग पूरी की। साइप्रस में काम करने के बाद उन्हें 2024 में लड़ाकू विमान उड़ाने की ट्रेनिंग के लिए चुना गया।
उन्होंने मार्च 2025 में इसकी शुरुआती ट्रेनिंग शुरू की और उसी साल जुलाई में बेसिक फास्ट जेट ट्रेनिंग पूरी की। उन्हें अक्तूबर 2025 में अकेले उड़ान भरने के लिए टेक्सस भेजा गया। इसके बाद उन्होंने जुलाई 2026 में पायलट विंग्स की परीक्षा पास कर ली। अब वह एक और साल तक कड़ी ट्रेनिंग लेंगे। इसके बाद उन्हें फ्रंटलाइन फाइटर विमान उड़ाने की ट्रेनिंग दी जाएगी।
ये भी पढ़ें: 110 वर्ष की बुजुर्ग की लंबी उम्र का राज: ताजी हवा, सेहतमंद खाना और अपना शौक जिंदा रखना; कैसे जीएं अपना जीवन?
अर्शदीप सिंह ने क्या कहा?
डांग ने कहा, मेरे लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने समुदाय का प्रतिनिधित्व करना गर्व की बात है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ऐसा करने वाला मैं पहला सिख हूं, लेकिन मैं नहीं चाहता कि मैं आखिरी रहूं। उन्होंने अपनी इस कामयाबी का श्रेय अपने परिवार और सिख परवरिश को भी दिया। उन्होंने कहा, मेरे माता-पिता ने मुझे प्रोत्साहित किया। उन्होंने अपनी मां को अपनी सबसे बड़ी ताकत बताया।
डांग ने बताया कि उनका परिवार आज भी घर में पंजाबी भाषा में बात करता है और नियमित रूप से गुरुद्वारे जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि पंजाबी भावना 'चढ़दी कला' यानी मुश्किल हालात में भी हमेशा उत्साह और हिम्मत बनाए रखना, ने कठिन उड़ानों के दौरान उनकी मदद की।
डांग की यह कामयाबी ब्रिटिश सेना में काम करने वाले भारतीय मूल के पायलटों की लंबी परंपरा का हिस्सा है। उनसे पहले प्रथम विश्व युद्ध के पायलट इंद्र लाल राय और सिख पायलट हरदित सिंह मलिक तथा स्क्वाड्रन लीडर मोहिंदर सिंह पुज्जी भी ब्रिटिश सैन्य विमानन में अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
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अर्शदीप सिंह डांग (28) ने शुक्रवार 14 अगस्त को उत्तर वेल्स के आरएएफ वैली में फाइटर जेट पायलट ट्रेनिंग पूरी करने के समारोह में हिस्सा लिया। आरएएफ ने बताया कि अर्शदीप सिंह डांग ब्रिटेन की सैन्य पायलट ट्रेनिंग के तहत चौथे उड़ान प्रशिक्षण स्कूल में टेक्सन विमान उड़ाने की ट्रेनिंग पूरी करने वाले पहले सिख हैं। हालांकि, उनसे पहले भी सिख लोग शुरुआती पायलट ट्रेनिंग पूरी कर चुके हैं।
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डांग का जन्म 1998 में चंडीगढ़ में हुआ था। जब वह छह साल के थे, तब वह अपने परिवार के साथ ब्रिटेन चले गए। उनके पिता जगदीप सिंह डांग लुधियाना के रहने वाले हैं, जबकि उनकी मां गगनदीप कौर अमृतसर की रहने वाली हैं। उनका परिवार इंग्लैंड के साउथॉल में रहता है।
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मां का सपना था बेटा पायलट बने
इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए डांग ने बताया कि उनके दादा सरदार संतोष सिंह डांग का सपना था कि उनका बेटा पायलट बने। लेकिन जब उनके पिता छह साल के थे, तब दादा की मौत हो गई।
उन्होंने कहा, मेरे दादा सरदार संतोष सिंह डांग का सपना था कि मेरे पिता पायलट बनें। लेकिन जब मेरे पिता सिर्फ छह साल के थे, तब मेरे दादा की मौत हो गई। इसलिए मेरे पिता के पास अपना सपना पूरा करने के लिए जरूरी मौके और साधन नहीं थे। मेरे माता-पिता ने मुझे प्रोत्साहित किया और मुझे विश्वास होने लगा कि मैं पायलट बन सकता हूं और ऐसा हो गया।
कहां से पढ़ाई की?
डांग ने ब्रिस्टल विश्वविद्यालय से गणित और दर्शनशास्त्र की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने फरवरी 2022 में अधिकारी की ट्रेनिंग पूरी की और 2023 में शुरुआती उड़ान की ट्रेनिंग पूरी की। साइप्रस में काम करने के बाद उन्हें 2024 में लड़ाकू विमान उड़ाने की ट्रेनिंग के लिए चुना गया।
उन्होंने मार्च 2025 में इसकी शुरुआती ट्रेनिंग शुरू की और उसी साल जुलाई में बेसिक फास्ट जेट ट्रेनिंग पूरी की। उन्हें अक्तूबर 2025 में अकेले उड़ान भरने के लिए टेक्सस भेजा गया। इसके बाद उन्होंने जुलाई 2026 में पायलट विंग्स की परीक्षा पास कर ली। अब वह एक और साल तक कड़ी ट्रेनिंग लेंगे। इसके बाद उन्हें फ्रंटलाइन फाइटर विमान उड़ाने की ट्रेनिंग दी जाएगी।
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अर्शदीप सिंह ने क्या कहा?
डांग ने कहा, मेरे लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने समुदाय का प्रतिनिधित्व करना गर्व की बात है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ऐसा करने वाला मैं पहला सिख हूं, लेकिन मैं नहीं चाहता कि मैं आखिरी रहूं। उन्होंने अपनी इस कामयाबी का श्रेय अपने परिवार और सिख परवरिश को भी दिया। उन्होंने कहा, मेरे माता-पिता ने मुझे प्रोत्साहित किया। उन्होंने अपनी मां को अपनी सबसे बड़ी ताकत बताया।
डांग ने बताया कि उनका परिवार आज भी घर में पंजाबी भाषा में बात करता है और नियमित रूप से गुरुद्वारे जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि पंजाबी भावना 'चढ़दी कला' यानी मुश्किल हालात में भी हमेशा उत्साह और हिम्मत बनाए रखना, ने कठिन उड़ानों के दौरान उनकी मदद की।
डांग की यह कामयाबी ब्रिटिश सेना में काम करने वाले भारतीय मूल के पायलटों की लंबी परंपरा का हिस्सा है। उनसे पहले प्रथम विश्व युद्ध के पायलट इंद्र लाल राय और सिख पायलट हरदित सिंह मलिक तथा स्क्वाड्रन लीडर मोहिंदर सिंह पुज्जी भी ब्रिटिश सैन्य विमानन में अपनी सेवाएं दे चुके हैं।