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Trump: सऊदी-तुर्किए-पाकिस्तान रक्षा समझौते पर ट्रंप ने दी प्रतिक्रिया, क्यों बताया इस्लामिक नाटो को बड़ा कदम?
Mon, 17 Aug 2026 08:01 AM IST
नितिन गौतम
पीटीआई, वॉशिंगटन
पीटीआई, वॉशिंगटन
Published by: नितिन गौतम
Updated Mon, 17 Aug 2026 08:01 AM IST
सार
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस्लामिक नाटो की तारीफ की है और इसे बड़ा और साहसी कदम बताया है। सऊदी अरब, तुर्किए और पाकिस्तान ने हाल ही में एक संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिस पर अब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की प्रतिक्रिया सामने आई है।
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डोनाल्ड ट्रंप
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब, तुर्किए और पाकिस्तान के बीच हुए रक्षा समझौते को अपनी सुरक्षा करने की दिशा में एक बड़ा, साहसी और महत्वपूर्ण कदम बताया है। ट्रंप की यह टिप्पणी इन तीनों देशों द्वारा 'मक्का संयुक्त रक्षा समझौते' पर हस्ताक्षर करने के कुछ दिनों बाद आई है। इस समझौते के तहत, तीनों में से किसी भी देश के खिलाफ किसी भी सशस्त्र हमले को उन सभी के खिलाफ हमला माना जाएगा।
ट्रंप ने समझौते को लेकर क्या कहा?
ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट में कहा, 'यह देखकर बहुत खुशी हुई कि सऊदी अरब, तुर्किए और पाकिस्तान ने हाल ही में मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह दिखाता है कि मध्य पूर्व कैसे एकजुट हो रहा है और देश आखिरकार कैसे अधिक सार्थक तरीके से अपनी सुरक्षा कर सकेंगे।' ट्रंप ने लिखा, 'तीनों देशों के महान नेतृत्व को बधाई। यह एक बड़ा, साहसी और महत्वपूर्ण पहला कदम है।'
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भारतीय विदेश मंत्रालय ने समझौते पर क्या प्रतिक्रिया दी थी
इस समझौते पर 7 अगस्त को सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, तुर्किए के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हस्ताक्षर किए थे। भारत ने कहा है कि वह अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ क्षेत्रीय शांति और स्थिरता पर मक्का समझौते के असर का आकलन कर रहा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 11 अगस्त को कहा, 'जहां तक इस समझौते की बात है, हम भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय शांति व स्थिरता के नजरिए से इसके असर की जांच कर रहे हैं।'
जायसवाल ने कहा, 'भारत अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इस संबंध में सभी आवश्यक कदम उठाएगा।'
इस समझौते को क्यों कहा जा रहा इस्लामिक नाटो?
अमेरिका के नेतृत्व वाले नाटो सैन्य संगठन का अनुच्छेद 5 कहता है कि एक सदस्य के खिलाफ किसी भी तरह की आक्रामकता को सभी पर हमला माना जाएगा। पाकिस्तान, सऊदी और तुर्किए के बीच हुए समझौते की मूल बात भी यही है। यही वजह है कि गठबंधन को 'मुस्लिम नाटो' या इस्लामिक नाटो का नाम दिया जा रहा है।
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ट्रंप ने समझौते को लेकर क्या कहा?
ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट में कहा, 'यह देखकर बहुत खुशी हुई कि सऊदी अरब, तुर्किए और पाकिस्तान ने हाल ही में मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह दिखाता है कि मध्य पूर्व कैसे एकजुट हो रहा है और देश आखिरकार कैसे अधिक सार्थक तरीके से अपनी सुरक्षा कर सकेंगे।' ट्रंप ने लिखा, 'तीनों देशों के महान नेतृत्व को बधाई। यह एक बड़ा, साहसी और महत्वपूर्ण पहला कदम है।'
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भारतीय विदेश मंत्रालय ने समझौते पर क्या प्रतिक्रिया दी थी
इस समझौते पर 7 अगस्त को सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, तुर्किए के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हस्ताक्षर किए थे। भारत ने कहा है कि वह अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ क्षेत्रीय शांति और स्थिरता पर मक्का समझौते के असर का आकलन कर रहा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 11 अगस्त को कहा, 'जहां तक इस समझौते की बात है, हम भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय शांति व स्थिरता के नजरिए से इसके असर की जांच कर रहे हैं।'
जायसवाल ने कहा, 'भारत अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इस संबंध में सभी आवश्यक कदम उठाएगा।'
इस समझौते को क्यों कहा जा रहा इस्लामिक नाटो?
अमेरिका के नेतृत्व वाले नाटो सैन्य संगठन का अनुच्छेद 5 कहता है कि एक सदस्य के खिलाफ किसी भी तरह की आक्रामकता को सभी पर हमला माना जाएगा। पाकिस्तान, सऊदी और तुर्किए के बीच हुए समझौते की मूल बात भी यही है। यही वजह है कि गठबंधन को 'मुस्लिम नाटो' या इस्लामिक नाटो का नाम दिया जा रहा है।