'मैं अभी जिंदा हूं': लाइव आकर नेतन्याहू बोले- ईरान की परमाणु क्षमता खत्म, बैलिस्टिक मिसाइल भी नहीं बना पाएगा
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष 21वें दिन में प्रवेश कर चुका है। अमेरिका और इस्राइल के हमलों से ईरान भी पलटवार कर रहा है। इस बीच बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि उन्होंने अमेरिका को युद्ध में नहीं धकेला, राष्ट्रपति ट्रंप अपना फैसला खुद लेते हैं। इस दौरान उन्होंने ईरान के परमाणु क्षमता को लेकर भी बड़ा दावा कर दिया। आइए जानते हैं उन्होंने क्या कहा?
विस्तार
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष दिन-ब-दिन और भयावह होता जा रहा है। अमेरिका और इस्राइल के भीषण हमलों से दहक रहे मोर्चे पर ईरान भी इस्राइल और खाड़ी देशों में मैजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जोरदार पलटवार कर रहा है। मिसाइलों और ड्रोन की गरज के बीच यह संघर्ष अब अपने 21वें दिन में प्रवेश कर चुका है और पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर है। इसी उग्र हालात के बीच अब इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक साथ कई सारे सवालों का जवाब दिया। इतना ही नहीं ईरान की परमाणु क्षमता को लेकर बड़ा दावा भी कर दिया।
चुकी सोशल मीडिया, बयानबाजी और दावों के दौर में सवाल उठ रहे थे नेतन्याहू जिंदा हैं कि नहीं? इस संघर्ष में अब ईरान की स्थिति क्या है? होर्मुज पर जारी संकट कब तक रहेगा? और अमेरिका की आगे अब क्या-क्या भूमिका हो सकती थी? इस्राइली पीएम नेतन्याहू ने लाइव आकर एक-एक कर सभी सवालों का जवाब दिया। आइए जानते हैं उन्होंने क्या कहा?
मैं जिंदा हूं- बेंजामिन नेतन्याहू
प्रेस वार्ता की शुरुआत के साथ ही नेतन्याहू ने कहा कि मैं अभी जिंदा हूं और आप सभी लोग इस बात के प्रमाण है। नेतन्याहू ने ये बात क्यों कही? इस बात को ऐसे समझा जा सकता है कि बीते कई दिनों से उनकी मौत को लेकर खूब दावे किए जा रहे थे। इसके जवाब में नेतन्याहू ने कई सारे वीडियो भी साझा कर अपने जीवित होने का दावा भी किया था।
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ईरान के परमाणु क्षमता को लेकर बड़ा दावा
इस दौरान नेतन्याहू ने ईरान की परमाणु क्षमता को लेकर भी बड़ा दावा किया, जो कि अब चर्चा का विषय बन गया है। नेतन्याहू ने कहा कि अमेरिका और इस्राइल के 20 दिन के हवाई हमलों के बाद ईरान के पास अब यूरेनियम समृद्ध करने या बैलिस्टिक मिसाइल बनाने की क्षमता नहीं बची है। अब ईरान परमाणु हथियार नहीं बना सकता। उन्होंने दावा किया कि ईरान का मिसाइल और ड्रोन भंडार भारी नुकसान झेल रहा है और जल्द ही पूरी तरह नष्ट हो जाएगा।
नेतन्याहू ने कहा कि हम जीत रहे हैं और ईरान को बुरी तरह क्षतिग्रस्त किया जा रहा है। हम अब उन फैक्ट्रियों को नष्ट कर रहे हैं जो इन मिसाइलों और परमाणु हथियारों के घटक तैयार करती हैं। हालांकि, नेतन्याहू ने अपने इन बयानों और दावों को लेकर किसी भी प्रकार के कोई सबूत सबूत नहीं पेश किया।
डोनाल्ड ट्रंप को लेकर क्या बोले नेतन्याहू
नेतन्याहू ने इस संघर्ष में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भूमिका को लेकर भी विस्तार से बातचीत की। नेतन्याहू ने जोर देते हुए कहा कि उन्होंने इस युद्ध में ट्रंप को नहीं धकेला। ट्रंप अपना फैसला खुद लेते हैं। नेतन्याहू ने यह भी कहा कि इस युद्ध में अमेरिका इस्राइल के लिए नहीं, इस्राइल के साथ युद्ध लड़ रहा है।
इस्राइली ऑपरेशन के लक्ष्य पर जोर
पत्रकारों से बातचीत के दौरान एक बार फिर नेतन्याहू ने ईरान के खिलाफ चलाए गए इस्राइल के ऑपरेशन राइजिंग लायन के लक्ष्य पर जोर दिया। प्रेस वार्ता की शुरुआत में उन्होंने कहा कि मैं जिंदा हूं और आप सभी इसके साक्षी हैं। नेतन्याहू ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका और इस्राइल ईरान पर पूरी ताकत और संकल्प के साथ कार्रवाई कर रहे हैं।
‘ऑपरेशन राइजिंग लायन’ का मकसद उस अयातुल्लाह शासन के खतरे को खत्म करना है, जिसने पिछले 47 वर्षों से अमेरिका, इस्राइल और ईरान के लोगों के खिलाफ युद्ध छेड़ा है। यह शासन अमेरिका और इस्राइल को मारने की बातें करता है और अपने ही लोगों के लिए मौत लाता है।
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नेतन्याहू बोले- हमारे तीन बड़े उद्देश्य; आप भी जानिए
नेतन्याहू ने कहा कि इस युद्ध में हमारे तीन लक्ष्य हैं, पहला, ईरान के परमाणु खतरे को खत्म करना। दूसरा बैलिस्टिक मिसाइल खतरे को समाप्त करना और यह सब इससे पहले करना कि मिसाइलें जमीन के अंदर इतनी गहरी जा जाएं कि हवाई हमले से उन्हें नष्ट करना मुश्किल हो। तीसरा ईरानी लोगों को अपनी स्वतंत्रता और भविष्य का नियंत्रण पाने का अवसर देना। हमने दशकों से चेतावनी दी है कि ईरान की मिसाइलें दूर-दराज के लक्ष्यों पर हमला कर सकती हैं और अगर इन्हें रोका नहीं गया तो यह सिर्फ शुरुआत होगी।
स्ट्रेट ऑफ होर्मूज को लेकर भी बोले नेतन्याहू
इस दौरान नेतन्याहू ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर भी अपना रुख साफ किया। उन्होंने कहा कि ईरान का शासन दुनिया को ब्लैकमेल करने की कोशिश कर रहा है, स्ट्रेट ऑफ होर्मूज को बंद करके। लेकिन यह सफल नहीं होगा। इस्राइल अपनी तरफ से और अमेरिकी प्रयासों के साथ मिलकर इस जलसंधि को खोलने में मदद कर रहा है। सोचिए अगर अयातुल्लाह के पास परमाणु हथियार वाली मिसाइलें होतीं, तो वे पूरी दुनिया को ब्लैकमेल कर सकते थे।
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