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World: सिंगापुर में 101 वर्षीय इतिहासकार सैमुअल का निधन; बलूचिस्तान में पांच लापता लोग लौटे, दो छात्र फिर गायब
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: अमन तिवारी
Updated Fri, 20 Mar 2026 02:16 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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सिंगापुर की विरासत और भारतीय मूल के चेट्टी समुदाय के इतिहास को दुनिया के सामने लाने वाले मशहूर इतिहासकार धोरायसिंगम स्टीफन सैमुअल अब नहीं रहे। 14 मार्च को 101 साल की उम्र में उनका निधन हो गया। साप्ताहिक अखबार ताबला ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। सैमुअल ने सिंगापुर के इतिहास और विरासत पर सात किताबें लिखी थीं। उनकी 1991 में आई किताब सिंगापुर हेरिटेज बहुत मशहूर हुई, जिसमें उन्होंने 180 ऐतिहासिक जगहों की जानकारी दी थी। साल 2005 में उन्होंने पेरनाकन इंडियंस ऑफ सिंगापुर एंड मलक्का नाम की किताब लिखी। इस किताब ने चेट्टी मेलका समुदाय के इतिहास को सहेजने का काम किया। यह समुदाय मूल रूप से भारत का है, जो 1800 और 1900 के बीच दक्षिण-पूर्व एशिया में आकर बस गया था।
पूर्व राजदूत के. केशवपानी ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि सैमुअल के शोध ने चेट्टी समुदाय को अपनी पहचान दिलाने में बड़ी मदद की। साल 2008 में एसोसिएशन ऑफ चेट्टी मेलका बनाने में भी उनकी अहम भूमिका रही। सैमुअल का जन्म 1925 में मलेशिया के कुआला सेलंगोर में हुआ था। उन्होंने 1950 के दशक में सिंगापुर के विक्टोरिया स्कूल में शिक्षक के रूप में अपना करियर शुरू किया। वह अपने छात्रों के हक के लिए हमेशा आवाज उठाते थे। इतिहास के अलावा उन्होंने सिंगापुर में अलग-अलग धर्मों के बीच भाईचारा बढ़ाने के लिए भी बहुत काम किया। वह इंटर-रिलिजियस ऑर्गनाइजेशन (आईआरओ) के सक्रिय सदस्य भी थे। उन्होंने सिंगापुर के पूर्व उप-प्रधानमंत्री गोह केंग स्वी के साथ भी कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स पर काम किया।
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पूर्व राजदूत के. केशवपानी ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि सैमुअल के शोध ने चेट्टी समुदाय को अपनी पहचान दिलाने में बड़ी मदद की। साल 2008 में एसोसिएशन ऑफ चेट्टी मेलका बनाने में भी उनकी अहम भूमिका रही। सैमुअल का जन्म 1925 में मलेशिया के कुआला सेलंगोर में हुआ था। उन्होंने 1950 के दशक में सिंगापुर के विक्टोरिया स्कूल में शिक्षक के रूप में अपना करियर शुरू किया। वह अपने छात्रों के हक के लिए हमेशा आवाज उठाते थे। इतिहास के अलावा उन्होंने सिंगापुर में अलग-अलग धर्मों के बीच भाईचारा बढ़ाने के लिए भी बहुत काम किया। वह इंटर-रिलिजियस ऑर्गनाइजेशन (आईआरओ) के सक्रिय सदस्य भी थे। उन्होंने सिंगापुर के पूर्व उप-प्रधानमंत्री गोह केंग स्वी के साथ भी कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स पर काम किया।
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पाकिस्तान के बलूचिस्तान में लोगों के जबरन गायब होने का मामला एक बार फिर चर्चा में है। द बलूचिस्तान पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, पांच लापता लोग सुरक्षित वापस लौट आए हैं। हालांकि, दो नए छात्रों के गायब होने से लोगों की चिंता बढ़ गई है। वापस लौटने वालों में पंजगुर जिले की फातिमा शामिल हैं। उन्हें 13 जनवरी 2026 को हिरासत में लिया गया था और बाद में हब चौकी के पास छोड़ दिया गया। इसी तरह ग्वादर के जईम और कंबर को भी रिहा कर दिया गया है। मस्तुंग के सईद अहमद, जो 11 दिसंबर 2025 से लापता थे, क्वेटा में मिले हैं। केच जिले के दिलदार भी अगस्त 2025 से गायब रहने के बाद तुरबत में मिल गए हैं।
दूसरी तरफ, नए मामलों ने डर का माहौल बना दिया है। कराची से 26 साल के मेडिकल छात्र इमरान बलूच को 20 दिसंबर 2025 को हिरासत में लिया गया। वह मूल रूप से बलूचिस्तान के रहने वाले हैं और अभी तक उनका कुछ पता नहीं चला है। एक अन्य मामले में, लसबेला यूनिवर्सिटी के छात्र हसीब बलूच को 4 फरवरी 2026 को ग्वादर के पसनी से पकड़ा गया। इन छात्रों के परिवारों का कहना है कि प्रशासन कोई जानकारी नहीं दे रहा है। मानवाधिकार संगठन लंबे समय से पाकिस्तान की आलोचना कर रहे हैं। जवाबदेही की कमी के कारण स्थानीय लोगों में सरकार के प्रति अविश्वास बढ़ रहा है।
दूसरी तरफ, नए मामलों ने डर का माहौल बना दिया है। कराची से 26 साल के मेडिकल छात्र इमरान बलूच को 20 दिसंबर 2025 को हिरासत में लिया गया। वह मूल रूप से बलूचिस्तान के रहने वाले हैं और अभी तक उनका कुछ पता नहीं चला है। एक अन्य मामले में, लसबेला यूनिवर्सिटी के छात्र हसीब बलूच को 4 फरवरी 2026 को ग्वादर के पसनी से पकड़ा गया। इन छात्रों के परिवारों का कहना है कि प्रशासन कोई जानकारी नहीं दे रहा है। मानवाधिकार संगठन लंबे समय से पाकिस्तान की आलोचना कर रहे हैं। जवाबदेही की कमी के कारण स्थानीय लोगों में सरकार के प्रति अविश्वास बढ़ रहा है।