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Mohammad Bagher Ghalibaf: ट्रंप ने क्यों बताया 'सबसे सही आदमी', तेहरान में कैसा असर, क्या मिलेगी ईरान की कमान?
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: अमन तिवारी
Updated Thu, 26 Mar 2026 09:31 AM IST
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सार
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि वे ईरान के सही लोगों से बातचीत कर रहे हैं। रिपोर्ट्स में संसद स्पीकर मोहम्मद बाकेर गालिबाफ का नाम सामने आया है, हालांकि गालिबाफ ने अमेरिका के साथ किसी भी बातचीत से इनकार किया है।
मोहम्मद बाकेर गालिबाफ
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पश्चिम एशिया की इस्राइल, अमेरिका-ईरान जंग आज अपने 27वें दिन में है। इस युद्ध में अब तक 3,000 से ज्यादा जानें गई हैं और अरबों डॉलर का नुकसान किया है। कच्चे तेल की कीमत असमान छू रही हैं। यह 100 डॉलर के ऊपर बनी हुई हैं। इस संकट के चलते लोखों लोग बेघर हो चुके हैं। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दावा किया कि वे ईरानी शासन के सही लोगों से बता कर रहे है जो कि समझौता करना चाहते है।
कौन हैं मोहम्मद बाकेर गालिबाफ?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप जिस 'सही आदमी' की बात कर रहे हैं, वह ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकेर गालिबाफ हैं। 64 साल के गालिबाफ का जन्म 1961 में मशहद के पास हुआ था। वह एक अनुभवी युद्ध सेनानी, लड़ाकू पायलट और सैन्य खुफिया अधिकारी रहे हैं। उन्होंने 1982 में जहरा सादात मुशीर से शादी की थी और उनके तीन बच्चे हैं। गालिबाफ 12 साल तक तेहरान के मेयर भी रहे हैं। उनके कार्यकाल में शहर के बुनियादी ढांचे में काफी सुधार हुआ, लेकिन उन पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे।
गालिबाफ और ट्रंप के बीच का तनाव
हैरानी की बात यह है कि गालिबाफ ने सार्वजनिक रूप से ट्रंप को भला-बुरा कह चुके हैं और उन्हें सबक सिखाने की कसम खाई थी। जबकि ट्रंप ने अब उन्हें ही एक 'समझदार और सम्मानित' व्यक्ति बताया है। हालांकि, गालिबाफ ने अमेरिका से किसी भी तरह की बातचीत से साफ इनकार किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा, US के साथ कोई बातचीत नहीं हुई है। यह फेक न्यूज है। अमेरिका अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए ऐसी खबरें फैला रहा है।
अमेरिका की योजना क्या है योजना?
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका ईरान में सत्ता परिवर्तन करना चाहता है। ट्रंप प्रशासन गालिबाफ को ईरान के नए नेता के रूप में देख रहा है, ठीक वैसे ही जैसे वेनेजुएला में डेल्सी रोड्रिगेज को स्थापित किया गया था। अमेरिका चाहता है कि नया नेता उनके साथ मिलकर तेल और परमाणु मुद्दों पर समझौता करे।
गालिबाफ को एक व्यावहारिक नेता माना जाता है, लेकिन वे ईरान के कट्टरपंथी सिस्टम के भी वफादार हैं। उन्होंने 1999 और 2003 में छात्र आंदोलनों को बेरहमी से कुचला था। ऐसे में यह कहना मुश्किल है कि वे अमेरिका की शर्तों को मानेंगे या नहीं। ईरान के भीतर भी अमेरिका को लेकर काफी गुस्सा और अविश्वास है।
अन्य विकल्प भी तलाश रहा अमेरिका
सिर्फ गालिबाफ ही नहीं, अमेरिका अन्य रास्तों पर भी काम कर रहा है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच भी सीधी बातचीत हुई है। हालांकि, दोनों में से किसी भी पक्ष ने इस बात की पुष्टि नहीं की है। अमेरिका ने युद्ध में पांच दिनों के ब्रेक के दौरान इन नेताओं को सुरक्षा गारंटी का भरोसा भी दिया है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या ट्रंप का यह 'ईरान प्रोजेक्ट सफल होगा या जंग और भीषण रूप लेगी।
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रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप जिस 'सही आदमी' की बात कर रहे हैं, वह ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकेर गालिबाफ हैं। 64 साल के गालिबाफ का जन्म 1961 में मशहद के पास हुआ था। वह एक अनुभवी युद्ध सेनानी, लड़ाकू पायलट और सैन्य खुफिया अधिकारी रहे हैं। उन्होंने 1982 में जहरा सादात मुशीर से शादी की थी और उनके तीन बच्चे हैं। गालिबाफ 12 साल तक तेहरान के मेयर भी रहे हैं। उनके कार्यकाल में शहर के बुनियादी ढांचे में काफी सुधार हुआ, लेकिन उन पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे।
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गालिबाफ और ट्रंप के बीच का तनाव
हैरानी की बात यह है कि गालिबाफ ने सार्वजनिक रूप से ट्रंप को भला-बुरा कह चुके हैं और उन्हें सबक सिखाने की कसम खाई थी। जबकि ट्रंप ने अब उन्हें ही एक 'समझदार और सम्मानित' व्यक्ति बताया है। हालांकि, गालिबाफ ने अमेरिका से किसी भी तरह की बातचीत से साफ इनकार किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा, US के साथ कोई बातचीत नहीं हुई है। यह फेक न्यूज है। अमेरिका अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए ऐसी खबरें फैला रहा है।
अमेरिका की योजना क्या है योजना?
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका ईरान में सत्ता परिवर्तन करना चाहता है। ट्रंप प्रशासन गालिबाफ को ईरान के नए नेता के रूप में देख रहा है, ठीक वैसे ही जैसे वेनेजुएला में डेल्सी रोड्रिगेज को स्थापित किया गया था। अमेरिका चाहता है कि नया नेता उनके साथ मिलकर तेल और परमाणु मुद्दों पर समझौता करे।
गालिबाफ को एक व्यावहारिक नेता माना जाता है, लेकिन वे ईरान के कट्टरपंथी सिस्टम के भी वफादार हैं। उन्होंने 1999 और 2003 में छात्र आंदोलनों को बेरहमी से कुचला था। ऐसे में यह कहना मुश्किल है कि वे अमेरिका की शर्तों को मानेंगे या नहीं। ईरान के भीतर भी अमेरिका को लेकर काफी गुस्सा और अविश्वास है।
अन्य विकल्प भी तलाश रहा अमेरिका
सिर्फ गालिबाफ ही नहीं, अमेरिका अन्य रास्तों पर भी काम कर रहा है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच भी सीधी बातचीत हुई है। हालांकि, दोनों में से किसी भी पक्ष ने इस बात की पुष्टि नहीं की है। अमेरिका ने युद्ध में पांच दिनों के ब्रेक के दौरान इन नेताओं को सुरक्षा गारंटी का भरोसा भी दिया है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या ट्रंप का यह 'ईरान प्रोजेक्ट सफल होगा या जंग और भीषण रूप लेगी।
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