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पश्चिम एशिया संकट का असर: होर्मुज ने बदला दुनिया का आर्थिक संतुलन, स्थायी युद्ध विराम से ही स्थिर होगा बाजार

अमर उजाला नेटवर्क Published by: Shubham Kumar Updated Fri, 10 Apr 2026 06:34 AM IST
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सार

पश्चिम एशिया में तनाव थमने के बाद भले ही राहत की सांस मिली हो, लेकिन इसके आर्थिक झटके अब भी बरकरार हैं। छह हफ्तों के टकराव के बाद हुए युद्धविराम से बाजारों में सुधार दिखा, तेल कीमतें गिरीं और शेयर बाजार उछले। फिर भी होर्मुज स्ट्रेट में फंसे जहाज, बाधित सप्लाई और बढ़ी लागत ने ईंधन, हवाई किराए व ब्याज दरों पर असर डाला है। आगे की स्थिति युद्धविराम की स्थिरता पर टिकी है।

West Asia Strait of Hormuz Reshapes the Global Economic Balance Market Stability Hinges Permanent Ceasefire
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : @ChatGPT
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विस्तार

ईरान, अमेरिका-इस्राइल के बीच छह सप्ताह तक चले तनाव और सैन्य टकराव के बाद हुए युद्धविराम ने वैश्विक बाजारों को तत्काल राहत जरूर दी है, लेकिन इसके आर्थिक असर लंबे समय तक बने रह सकते हैं। होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही बाधित होने से ईंधन कीमतों, हवाई किराए और ब्याज दरों पर व्यापक प्रभाव पड़ा। बाजारों में स्थिरता इस बात पर निर्भर करेगी कि युद्धविराम कितना टिकाऊ हो। बीबीसी के विश्लेषण के अनुसार पिछले छह हफ्तों के दौरान होर्मुज स्ट्रेट में अभूतपूर्व जाम की स्थिति बनी है।

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शिपिंग आकलनों के अनुसार, करीब 800 जहाज जिनमें अधिकांश तेल-गैस लेकर जा रहे थे खाड़ी क्षेत्र में फंसे हैं और खुले समुद्र में निकलने में असमर्थ रहे या जोखिम के कारण रुके रहे। संघर्ष विराम को लेकर भी संशय है और इस्राइल के लेबनान हमलों के बाद ईरान ने इसे एक बार फिर बंद करने की घोषणा की है। इस बाधा का सीधा असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों, हवाई किराए और वैश्विक वित्तीय लागतों पर पड़ा।
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युद्ध विराम के बाद बाजार कैसा?
रिपोर्ट के अनुसार युद्धविराम की घोषणा के बाद वैश्विक बाजारों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। तेल-गैस की कीमतों में करीब 15% तक गिरावट दर्ज की गई, जबकि शेयर बाजारों में उछाल देखा गया। यह शुरुआती सुधार हैं। आगे की दिशा कूटनीतिक प्रगति पर निर्भर करेगी। सबसे बड़ा सवाल अब भी यही है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही कितनी सहजता से बहाल हो पाएगी।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि मार्ग पूरी तरह खुल जाएगा, जबकि ईरान के विदेश मंत्री ने कहा है कि जहाजों की आवाजाही ईरान की सशस्त्र सेनाओं के समन्वय और तकनीकी सीमाओं के तहत होगी। दोनों पक्षों के दावों में स्पष्ट अंतर बना हुआ है, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अनिश्चितता बनाए रखता है।

अमेरिकी डील पर ईरानी कट्टरपंथियों में असंतोष
अमेरिका संग दो हफ्ते के युद्धविराम और होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने के फैसले ने ईरान में गहरे सियासी मतभेद उजागर किए हैं। समझौते को सरकार रणनीतिक जीत बता रही है, वहीं कट्टरपंथी धड़ा इसे शत्रु को राहत देने वाला कदम मानकर विरोध कर रहा है। अल जजीरा और बीबीसी की रिपोर्ट्स में कहा गया है कि युद्धविराम से ठीक पहले तेहरान के सबसे व्यस्त चौराहों में से एक पर एक विशाल बैनर लगाया गया था, जिसमें लिखा था...होर्मुज स्ट्रेट बंद रहेगा।

इसे नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामनेई के रुख के संकेत के तौर पर देखा गया, लेकिन समझौते के बाद अब इस बैनर को हटाना पड़ सकता है। कट्टरपंथी गुट का दावा है कि ईरान ने युद्ध के दौरान सामरिक बढ़त हासिल कर ली थी। उनका तर्क है कि होर्मुज को बंद करके खाड़ी देशों की ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बनाया गया। ऐसे में ईरान को युद्धविराम के बजाय संघर्ष जारी रखना चाहिए था।

इस पूरे घटनाक्रम का एक बड़ा पहलू यह भी है कि ईरान अब सीधे अमेरिका से बातचीत करने को तैयार हुआ है। पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने अमेरिका से प्रत्यक्ष वार्ता पर रोक लगा रखी थी। लेकिन नए नेता मोजतबा खामेनेई के कार्यकाल में इस नीति में बदलाव दिख रहा है। ईरानी मीडिया के मुताबिक, संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ इस्लामाबाद में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के साथ सीधे वार्ता का नेतृत्व करेंगे। यह कदम न केवल कूटनीतिक बदलाव का संकेत है, बल्कि आंतरिक सत्ता संतुलन में भी बदलाव की ओर इशारा करता है।

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