West Asia: ईरान-ओमान ने समझौते का मसौदा तैयार किया, खामेनेई की अंतिम मंजूरी का इंतजार; अमेरिका का रूख क्या?
ट्रंप ने कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने पर ईरान के साथ समझौता इस हफ्ते हो सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ओमान और ईरान के बीच समझौते का मसौदा तैयार हो चुका है।
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पश्चिम एशिया में 160 दिनों से शांति बहाली का इंतजार हो रहा है। अमेरिका-इस्राइल ने मिलकर 28 फरवरी को ईरान के साथ जंग शुरू की थी। इस्लामाबाद में समझौते के बाद दोनों देशों के बीच करीब दो हफ्ते की शांति रही। टकराव एक बार फिर बढ़ गया है। ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि दोनों देशों के बीच समझौता कब होगा? पश्चिम एशिया और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही को लेकर तनावपूर्ण हालात कब सामान्य होंगे?
ईरान के साथ समझौते के लिए क्यों राजी हुआ अमेरिका?
दरअसल, ईरान-ओमान ने जंग खत्म करने को लेकर समझौते का मसौदा तैयार किया है। ईरान और अमेरिका के बीच होने वाले इस समझौते को अंतिम मंजूरी का इंतजार है। इस डील के बाद वैश्विक तेल आपूर्ति सामान्य होने की उम्मीद है। ट्रंप ने भी डील के संबंध में बड़ा बयान दिया है। दरअसल, लंबे समय से जारी जंग के बीच अमेरिका में हथियारों की कमी को लेकर पेंटागन के अलावा कई स्तरों पर चिंता जताई जा चुकी है। कई अमेरिकी सैनिक भी हताहत हुए हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि आर्थिक और सैन्य नुकसान जैसे तमाम पहलुओं को ध्यान में रखते हुए ट्रंप ईरान के साथ समझौते को प्राथमिकता दे रहे हैं।
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ट्रंप समझौते पर 48 घंटे का जिक्र कर क्या बोले?
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर इस सप्ताह समझौता हो सकता है। उन्होंने कहा कि बातचीत में काफी प्रगति हुई है और घोषणा अगले कुछ दिनों में हो सकती है। इस बीच ईरान और ओमान के वार्ताकारों ने समझौते का मसौदा तैयार कर लिया है। अब इसे ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई की अंतिम मंजूरी का इंतजार है। अधिकारियों के अनुसार, यह समझौता फिलहाल अस्थायी होगा और इसके बाद अमेरिका तथा ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत दोबारा शुरू हो सकती है।
पांच महीने से जंग, शांति बहाली पर ईरान का रूख क्या?
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और इस्राइल ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की थी। इसके बाद संघर्ष होर्मुज जलडमरूमध्य तक पहुंच गया। अमेरिका पहले ही साफ कर चुका है कि वह ऐसा कोई समझौता स्वीकार नहीं करेगा, जिससे ईरान को इस जलमार्ग पर नियंत्रण मिल जाए या वह जहाजों से शुल्क वसूले। हालांकि ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि ओमान के साथ समझौते का मसौदा अंतिम चरण में है और यदि कोई बाधा नहीं आई तो जल्द संयुक्त बयान जारी किया जाएगा।
बेहद अहम समुद्री मार्ग है होर्मुज जलडमरूमध्य
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के लिए बेहद अहम समुद्री मार्ग है। युद्ध से पहले दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति इसी रास्ते से होती थी। संघर्ष के दौरान इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई, जिससे तेल और जरूरी वस्तुओं की कीमतें बढ़ गईं और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ा।
लाल सागर में जहाजों पर हमले जारी
होर्मुज जलडमरूमध्य पर समझौते की उम्मीद के बीच लाल सागर में जहाजों पर हमले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। ईरान समर्थित यमन के हूती विद्रोहियों ने बुधवार को दावा किया कि उन्होंने यनबू बंदरगाह के पास सऊदी अरब के एक तेल टैंकर पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। हालांकि, इसका कोई सबूत नहीं दिया गया और सऊदी अरब ने भी तत्काल प्रतिक्रिया नहीं दी। इससे पहले जुलाई में हूतियों ने सऊदी अरब से जुड़े जहाजों के लिए बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य बंद करने की घोषणा की थी।