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प्रमुख कीटनाशक बेअसर: भारत से निकले सुपरमच्छर का अफ्रीकी महानगरों में आतंक, मलेरिया कितनी बड़ी चुनौती?

Thu, 06 Aug 2026 08:50 AM IST
ज्योति भास्कर अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली।
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली। Published by: ज्योति भास्कर Updated Thu, 06 Aug 2026 08:50 AM IST
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insecticides ineffective Super-mosquito from India wreaks havoc in African cities challenge is malaria
भारत से अफ्रीका तक मच्छरों का आतंक? - फोटो : Amarujala.com/AI

अफ्रीका में मलेरिया के खिलाफ दशकों से चल रही लड़ाई के सामने अब एक नया और कहीं अधिक जटिल खतरा उभर आया है। एनाफिलीज स्टेफेंसी नामक आक्रामक मच्छर महाद्वीप में पहले के अनुमान से कहीं अधिक तेजी से फैल चुका है। दिलचस्प बात यह है कि एनाफिलीज स्टेफेंसी भारतीय उपमहाद्वीप के लिए कोई नई प्रजाति नहीं है। यह भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल के कुछ हिस्सों, श्रीलंका और ईरान में लंबे समय से पाया जाता है तथा भारत के कई शहरों में शहरी मलेरिया फैलाने वाले प्रमुख वाहकों में शामिल है।

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वैज्ञानिकों का मानना है कि यही मच्छर संभवतः वर्ष 2013 के आसपास भारत या पाकिस्तान से समुद्री मार्ग के जरिये जिबूती पहुंचा और वहां से पूरे अफ्रीका में तेजी से फैल गया। इसलिए यह अध्ययन भारत में किसी नए मच्छर के आगमन का नहीं, बल्कि भारतीय उपमहाद्वीप की एक परिचित प्रजाति के अफ्रीका में खतरनाक विस्तार का संकेत देता है। वैज्ञानिकों के ताजा जीनोमिक अध्ययन में पता चला है कि यह मच्छर मलेरिया नियंत्रण कार्यक्रमों में इस्तेमाल होने वाले लगभग सभी प्रमुख कीटनाशकों के प्रति प्रतिरोध विकसित कर चुका है।
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सबसे बड़ी चिंता यह है कि यह पारंपरिक अफ्रीकी मलेरिया वाहक मच्छरों के विपरीत शहरों में भी आसानी से पनपता है और पूरे वर्ष मलेरिया फैला सकता है, जिससे अफ्रीका के बड़े महानगर भी जोखिम में आ गए हैं। द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, साइंस जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में ऑस्ट्रेलिया के यूनिवर्सिटी ऑफ क्वींसलैंड के नेतृत्व में 10 देशों से जुटाए गए नमूनों का जीनोमिक विश्लेषण किया गया।
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प्रसार को रोकना असंभव
अध्ययन के प्रमुख लेखक ट्रिस्टन डेनिस का कहना है कि अब इस आक्रामक मच्छर के प्रसार को रोकना लगभग असंभव हो गया है। जीनोमिक विश्लेषण में पाया गया कि अफ्रीका में फैली स्टेफेंसी आबादी में ऐसे जीन मौजूद हैं, जो वर्तमान में इस्तेमाल होने वाले लगभग सभी प्रमुख कीटनाशकों को अप्रभावी बना देते हैं।

  • दूसरी ओर युद्ध, विस्थापन, तेज शहरीकरण, जलवायु परिवर्तन और मलेरिया नियंत्रण कार्यक्रमों के घटते बजट ने निगरानी व्यवस्था को भी कमजोर कर दिया है। वैज्ञानिकों को आशंका है कि चाड, सोमालिया, इरिट्रिया और दक्षिण सूडान जैसे देशों में भी यह मच्छर पहुंच चुका हो सकता है, लेकिन पर्याप्त निगरानी के अभाव में इसकी पुष्टि नहीं हो पा रही।
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