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West Asia Crisis: UN में ड्रैगन का कड़ा विरोध, अमेरिका से कहा- हमले की धमकी के बदले शांति-कूटनीति की राह चुनें
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: अमन तिवारी
Updated Fri, 03 Apr 2026 08:56 AM IST
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सार
संयुक्त राष्ट्र में चीन ने पश्चिम एशिया में सैन्य कार्रवाई का कड़ा विरोध किया है। यह प्रतिक्रिया अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान पर संभावित हमले की चेतावनी के बाद आई है। चीन ने साफ कहा कि युद्ध नहीं, बल्कि बातचीत ही इस संकट का समाधान हो सकता है।
फू कोंग, संयुक्त राष्ट्र में चीन के स्थायी प्रतिनिधि
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
संयुक्त राष्ट्र में चीन के स्थायी प्रतिनिधि फू कोंग ने पश्चिम एशिया में किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संस्था को संबोधित करते हुए कहा कि सदस्य देशों को सैन्य कार्रवाई की अनुमति देना गलत होगा। उनके अनुसार, ऐसी अनुमति देना बल के अवैध और अंधाधुंध इस्तेमाल को कानूनी मान्यता देने जैसा है।
क्या बोले चीनी प्रवक्ता?
चीन का यह औपचारिक विरोध अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों के जवाब में आया है। ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सख्त लहजे का इस्तेमाल किया था। चाइना डेली के अनुसार, चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने इस स्थिति पर स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने कहा कि सैन्य तरीके बुनियादी तौर पर किसी भी मुद्दे को हल नहीं कर सकते। माओ निंग ने जोर देकर कहा कि संघर्ष को और बढ़ाना किसी भी पक्ष के हित में नहीं है।
ये भी पढ़ें: Strait of Hormuz: होर्मुज में ईरान-ओमान के साथ मिलकर करेगा खेल, जानें जहाजों की आवाजाही पर क्या बन रही योजना
अमेरिका ने दी चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अमेरिका अगले दो से तीन हफ्तों के भीतर ईरान पर बहुत जोरदार हमला करने जा रहा है। इस बयान ने पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ा दिया है। ट्रंप का कहना है कि वाशिंगटन का यह सैन्य अभियान ईरान के खतरे को खत्म करने के करीब है।
अपने संबोधन में ट्रंप ने कहा कि वे ईरान को वापस वापस भेज देंगे, क्योंकि वह वहीं रहने के लायक है। हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि इस सैन्य तनाव के बीच कूटनीतिक बातचीत भी चल रही है। ट्रंप ने साफ किया कि उनका लक्ष्य ईरान में सत्ता परिवर्तन करना नहीं था। हालांकि उन्होंने दावा किया कि ईरान के पुराने नेताओं की मौत के कारण वहां का नेतृत्व ढांचा बदल गया है और एक तरह से सत्ता परिवर्तन हो चुका है।
बातचीत का रास्ता अपनाने की सलाह
अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक अमेरिका के विशिष्ट लक्ष्य पूरे नहीं हो जाते, तब तक सैन्य अभियान जारी रहेंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि अमेरिका बहुत जल्द अपने सभी उद्देश्यों को पूरा करने की राह पर है। चीन ने इन धमकियों पर चिंता जताते हुए शांति और बातचीत का रास्ता अपनाने की सलाह दी है।
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क्या बोले चीनी प्रवक्ता?
चीन का यह औपचारिक विरोध अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों के जवाब में आया है। ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सख्त लहजे का इस्तेमाल किया था। चाइना डेली के अनुसार, चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने इस स्थिति पर स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने कहा कि सैन्य तरीके बुनियादी तौर पर किसी भी मुद्दे को हल नहीं कर सकते। माओ निंग ने जोर देकर कहा कि संघर्ष को और बढ़ाना किसी भी पक्ष के हित में नहीं है।
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अमेरिका ने दी चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अमेरिका अगले दो से तीन हफ्तों के भीतर ईरान पर बहुत जोरदार हमला करने जा रहा है। इस बयान ने पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ा दिया है। ट्रंप का कहना है कि वाशिंगटन का यह सैन्य अभियान ईरान के खतरे को खत्म करने के करीब है।
अपने संबोधन में ट्रंप ने कहा कि वे ईरान को वापस वापस भेज देंगे, क्योंकि वह वहीं रहने के लायक है। हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि इस सैन्य तनाव के बीच कूटनीतिक बातचीत भी चल रही है। ट्रंप ने साफ किया कि उनका लक्ष्य ईरान में सत्ता परिवर्तन करना नहीं था। हालांकि उन्होंने दावा किया कि ईरान के पुराने नेताओं की मौत के कारण वहां का नेतृत्व ढांचा बदल गया है और एक तरह से सत्ता परिवर्तन हो चुका है।
बातचीत का रास्ता अपनाने की सलाह
अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक अमेरिका के विशिष्ट लक्ष्य पूरे नहीं हो जाते, तब तक सैन्य अभियान जारी रहेंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि अमेरिका बहुत जल्द अपने सभी उद्देश्यों को पूरा करने की राह पर है। चीन ने इन धमकियों पर चिंता जताते हुए शांति और बातचीत का रास्ता अपनाने की सलाह दी है।
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