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West Asia: होर्मुज पर नेतन्याहू ने सुझाया स्थाई समाधान, बोले- सैन्य कार्रवाई कुछ समय के लिए दे सकती है स्थिरता
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेल अवीव
Published by: अमन तिवारी
Updated Tue, 31 Mar 2026 11:19 AM IST
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सार
इस्राइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भरता कम करने के लिए नई ऊर्जा पाइपलाइनों का सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब के रास्ते वैकल्पिक मार्ग बनाने से ईरान की रणनीतिक ताकत कमजोर होगी।
होर्मुज पर नेतन्याहू का नया समाधान
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दुनिया की ऊर्जा सप्लाई को सुरक्षित रखने के लिए एक सुझाव दिया है। उन्होंने कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भरता कम करने के लिए ऊर्जा पाइपलाइनों का रास्ता बदलना चाहिए। नेतन्याहू के अनुसार, इन पाइपलाइनों को सऊदी अरब के रास्ते लाल सागर और भूमध्य सागर की तरफ ले जाना एक स्थायी समाधान हो सकता है।
क्या बोले नेतन्याहू?
नेतन्याहू ने न्यूजमैक्स के साथ एक इंटरव्यू में बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान के पास है। इस वजह से ईरान जब चाहे वैश्विक ऊर्जा सप्लाई को खतरे में डाल सकता है। उन्होंने कहा कि सैन्य समाधान केवल कुछ समय के लिए स्थिरता दे सकता है। लेकिन अगर पाइपलाइनों का रास्ता बदल दिया जाए, तो ईरान की रणनीतिक ताकत कम हो जाएगी। नेतन्याहू का मानना है कि जमीन के रास्ते नए पाइपलाइन नेटवर्क बनाने से वैश्विक ऊर्जा बाजार पर ईरान का दबदबा खत्म होगा।
ये भी पढ़ें: Attack on Isfahan: अमेरिका ने 2000 KG बंकर बस्टर बम गिराए, इस्फहान परमाणु संयंत्र पर हमले से कितना नुकसान?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण रास्तों में से एक है। दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल निर्यात इसी रास्ते से होता है। इसके एक तरफ ईरान है और दूसरी तरफ सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और ओमान जैसे देश स्थित हैं।
होर्मुज पर ईरान की नई नीति
इस बीच, ईरान की संसद की सुरक्षा समिति ने 'होर्मुज जलडमरूमध्य प्रबंधन योजना' को मंजूरी दे दी है। ईरान की सरकारी मीडिया के अनुसार, इस योजना के तहत ईरान इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों पर टैक्स (टोल) लगाएगा। यह टैक्स ईरान की मुद्रा रियाल में लिया जाएगा। इस योजना में जहाजों की सुरक्षा, पर्यावरण की रक्षा और वित्तीय इंतजामों के कड़े नियम शामिल हैं।
ईरान की इस नई योजना में साफ कहा गया है कि अमेरिका और इस्राइल के जहाजों को इस रास्ते से गुजरने की अनुमति नहीं मिलेगी। साथ ही, उन देशों के जहाजों पर भी रोक रहेगी जो ईरान पर एकतरफा पाबंदियां लगाते हैं। ईरान इस जलमार्ग पर अपनी संप्रभुता और सेना की भूमिका को मजबूत कर रहा है। इसके लिए वह ओमान के साथ मिलकर कानूनी ढांचा तैयार करने पर भी काम कर रहा है।
व्हाइट हाउस ने किया दावा
इस बीच, व्हाइट हाउस ने दावा किया है कि पश्चिम एशिया में तनाव के बावजूद तेल के टैंकरों की आवाजाही जारी है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि यह सब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में हुई कूटनीति का नतीजा है। उन्होंने बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच सीधी और अप्रत्यक्ष बातचीत चल रही है।
ये भी पढ़ें: Iran Plane Attack: भारत आने वाले ईरानी विमान पर अमेरिका का हमला, तेहरान ने कड़ी निंदा की; मानवीय मिशन बाधित
लेविट ने उन दावों को खारिज कर दिया कि ईरान अपनी मर्जी से केवल कुछ जहाजों को जाने दे रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले दिनों 10 टैंकर निकले थे और आने वाले दिनों में 20 और टैंकरों के निकलने की उम्मीद है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिकी प्रशासन की लगातार कोशिशों के बिना टैंकरों की यह आवाजाही संभव नहीं होती।
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नेतन्याहू ने न्यूजमैक्स के साथ एक इंटरव्यू में बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान के पास है। इस वजह से ईरान जब चाहे वैश्विक ऊर्जा सप्लाई को खतरे में डाल सकता है। उन्होंने कहा कि सैन्य समाधान केवल कुछ समय के लिए स्थिरता दे सकता है। लेकिन अगर पाइपलाइनों का रास्ता बदल दिया जाए, तो ईरान की रणनीतिक ताकत कम हो जाएगी। नेतन्याहू का मानना है कि जमीन के रास्ते नए पाइपलाइन नेटवर्क बनाने से वैश्विक ऊर्जा बाजार पर ईरान का दबदबा खत्म होगा।
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होर्मुज पर ईरान की नई नीति
इस बीच, ईरान की संसद की सुरक्षा समिति ने 'होर्मुज जलडमरूमध्य प्रबंधन योजना' को मंजूरी दे दी है। ईरान की सरकारी मीडिया के अनुसार, इस योजना के तहत ईरान इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों पर टैक्स (टोल) लगाएगा। यह टैक्स ईरान की मुद्रा रियाल में लिया जाएगा। इस योजना में जहाजों की सुरक्षा, पर्यावरण की रक्षा और वित्तीय इंतजामों के कड़े नियम शामिल हैं।
ईरान की इस नई योजना में साफ कहा गया है कि अमेरिका और इस्राइल के जहाजों को इस रास्ते से गुजरने की अनुमति नहीं मिलेगी। साथ ही, उन देशों के जहाजों पर भी रोक रहेगी जो ईरान पर एकतरफा पाबंदियां लगाते हैं। ईरान इस जलमार्ग पर अपनी संप्रभुता और सेना की भूमिका को मजबूत कर रहा है। इसके लिए वह ओमान के साथ मिलकर कानूनी ढांचा तैयार करने पर भी काम कर रहा है।
व्हाइट हाउस ने किया दावा
इस बीच, व्हाइट हाउस ने दावा किया है कि पश्चिम एशिया में तनाव के बावजूद तेल के टैंकरों की आवाजाही जारी है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि यह सब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में हुई कूटनीति का नतीजा है। उन्होंने बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच सीधी और अप्रत्यक्ष बातचीत चल रही है।
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लेविट ने उन दावों को खारिज कर दिया कि ईरान अपनी मर्जी से केवल कुछ जहाजों को जाने दे रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले दिनों 10 टैंकर निकले थे और आने वाले दिनों में 20 और टैंकरों के निकलने की उम्मीद है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिकी प्रशासन की लगातार कोशिशों के बिना टैंकरों की यह आवाजाही संभव नहीं होती।
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