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World Updates: अफगानिस्तान में 4.3 तीव्रता का भूकंप, इस्राइली हमले में चार फलस्तीनी की मौत

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: Shivam Garg Updated Sun, 15 Mar 2026 11:18 PM IST
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world updates - फोटो : अमर उजाला
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अफगानिस्तान में 4.3 तीव्रता का भूकंप, एक दिन पहले भी आया था झटका

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अफगानिस्तान में रविवार को रिक्टर स्केल पर 4.3 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार यह भूकंप भारतीय समयानुसार दोपहर 12 बजकर 7 मिनट पर आया। भूकंप का केंद्र 36.38 उत्तरी अक्षांश और 71.07 पूर्वी देशांतर पर था, जबकि इसकी गहराई लगभग 155 किलोमीटर बताई गई है। इससे पहले शनिवार को भी अफगानिस्तान में 4.2 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसकी गहराई करीब 105 किलोमीटर थी। अफगानिस्तान का हिंदूकुश क्षेत्र भूकंप के लिहाज से काफी संवेदनशील माना जाता है, क्योंकि यह भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के टकराव वाले क्षेत्र में स्थित है।

इटली और स्पेन में युद्ध विरोधी प्रदर्शन
इटली की राजधानी रोम में शनिवार को हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने पश्चिम एशिया में चल रहे युद्धों और इटली की सरकार द्वारा प्रस्तावित न्यायिक सुधारों के खिलाफ आवाज उठाई। 22-23 मार्च को होने वाला जनमत संग्रह इटली के प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की सरकार के लिए एक अहम राजनीतिक परीक्षा बन गया है। अगले वर्ष होने वाले चुनावों से पहले न्यायिक सुधारों को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव तेज हो गया है।
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रोम के केंद्रीय इलाके में प्रदर्शनकारियों ने ट्रेड यूनियनों के लाल झंडे और फिलिस्तीन व क्यूबा के झंडे लहराते हुए मेलोनी सरकार इस्तीफा दो जैसे नारे लगाए। हालांकि रैली शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त हुई। एक प्रदर्शनकारी सैंड्रा पागानिनी ने कहा कि अमेरिका और इज़राइल की सैन्य कार्रवाइयां अंतरराष्ट्रीय कानून द्वारा तय सहअस्तित्व की व्यवस्था को कमजोर कर रही हैं और दुनिया को बड़े संघर्ष की ओर धकेल रही हैं।

इस्राइली हमले में चार फलस्तीनी की मौत
युद्धग्रस्त गाजा पट्टी में रविवार को हुए इस्राइली हवाई हमले में कम से कम चार फलिस्तीनी मारे गए, जिसमें एक बच्चा और उसकी गर्भवती मां भी शामिल हैं, अस्पताल अधिकारियों ने बताया। हमले में नुसैरत शरणार्थी कैंप में एक घर को निशाना बनाया गया, जहां एक दंपति और उनका छोटा बेटा मारा गया। चौथा घायल व्यक्ति नुसैरत के अव्दा अस्पताल में ले जाया गया, लेकिन उसकी भी मौत हो गई।

 

मोजाम्बिक से सैनिक वापस बुला सकता है रवांडा
रवांडा ने चेतावनी दी है कि अगर आतंकवाद विरोधी अभियान के लिए स्थायी वित्तीय सहायता सुनिश्चित नहीं की गई तो वह मोजाम्बिक से अपने सैनिक वापस बुला सकता है। रवांडा के विदेश मंत्री ओलिवियर नदुहंगिरेहे ने सोशल मीडिया पर कहा कि मोजाम्बिक में तैनात रवांडा के सैनिकों की लगातार आलोचना की जा रही है, जबकि उन्हीं देशों को इस अभियान से फायदा मिल रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि पर्याप्त फंडिंग नहीं मिली तो सैनिकों की वापसी तय है।


रवांडा की सेना मोजाम्बिक के उत्तरी प्रांत काबो डेलगाडो में 2017 से सक्रिय इस्लामिक स्टेट से जुड़े उग्रवादियों के खिलाफ अभियान में मदद कर रही है। यह क्षेत्र 2021 में तब चर्चा में आया था जब विद्रोहियों ने तटीय शहर पाल्मा पर हमला कर कई लोगों की हत्या कर दी थी। इस हमले के बाद फ्रांसीसी ऊर्जा कंपनी टोटलएनर्जीज को करीब 20 अरब डॉलर की गैस परियोजना रोकनी पड़ी थी, जो मोजाम्बिक की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम मानी जाती है। इसी वजह से वहां की सरकार ने 2021 में रवांडा के शांति सैनिकों की तैनाती का स्वागत किया था।

फुजैराह टर्मिनल पर हमले के बीच भारतीय टैंकर सुरक्षित निकला
संयुक्त अरब अमीरात के फुजैराह तेल टर्मिनल पर हुए हमले के दौरान भारतीय ध्वज वाला टैंकर जग लाडकी भी वहीं मौजूद था। जहाज उस समय कच्चा तेल भर रहा था। सरकार के अनुसार हमले के बावजूद टैंकर सुरक्षित रूप से वहां से निकल गया और उस पर सवार सभी सदस्य पूरी तरह सुरक्षित हैं। सरकार ने बताया कि 14 मार्च को टैंकर फुजैराह सिंगल पॉइंट मूरिंग पर तेल भर रहा था, तभी टर्मिनल पर हमला हुआ। इसके बाद जहाज ने करीब 80,800 टन मुरबन कच्चा तेल लेकर रविवार सुबह लगभग 10:30 बजे भारत के लिए रवाना किया। यह चौथा भारतीय जहाज है जो युद्ध क्षेत्र से बिना किसी नुकसान के बाहर निकला है। सरकार पश्चिम एशिया की स्थिति पर लगातार नजर रख रही है।

तेल-गैस संकट पर जयशंकर की कूटनीति, सऊदी और यूएई विदेश मंत्रियों से की बात
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर सक्रिय कूटनीतिक पहल शुरू कर दी है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्रियों से फोन पर बातचीत कर क्षेत्र की स्थिति और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। जयशंकर ने यूएई के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान और सऊदी विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान से हालात के विभिन्न पहलुओं पर विचार साझा किए। बताया जा रहा है कि बातचीत में भारत की तेल और गैस आपूर्ति प्रमुख मुद्दा रही। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास समुद्री मार्ग बाधित होने से वैश्विक तेल और एलएनजी की कीमतों में तेजी आई है, जिससे भारत सहित कई देशों की चिंता बढ़ गई है।

उ. कोरिया ने किया शक्तिशाली रॉकेट परीक्षण, अमेरिका चिंतित
अमेरिका व दक्षिण कोरिया के बीच जारी संयुक्त सैन्य अभ्यास से बौखलाए उत्तर कोरिया ने 12 शक्तिशाली रॉकेट प्रक्षेपण प्रणालियों का परीक्षण किया। इस दौरान अपनी बेटी के साथ मौजूद उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन ने बहु रॉकेट प्रक्षेपण प्रणालियों के परीक्षण का निरीक्षण किया और कहा कि 420 किमी मारक क्षमता वाली मिसाइलों से दुश्मन के सैन्य ठिकाने किसी भी तरह नहीं बच पाएंगे। परीक्षण को अमेरिका व दक्षिण कोरिया के बीच जारी सैन्य प्रशिक्षण फ्रीडम शील्ड के संभावित जवाब के रूप में देखा जा रहा है। उत्तर कोरिया, अमेरिका व दक्षिण कोरिया के संयुक्त सैन्य अभ्यास को अपने ऊपर हमले की तैयारी बताता रहा है। सरकारी कोरियाई सेंट्रल न्यूज एजेंसी (केसीएनए) ने बताया कि किम ने शनिवार को उत्तर कोरिया के पूर्वी तट के पास 12 अति-सटीक 600 मिमी कैलिबर के रॉकेट प्रक्षेपकों के परीक्षण को देखा। दक्षिण कोरिया की सेना ने शनिवार को जानकारी दी थी कि उत्तर कोरिया ने पूर्वी सागर की ओर लगभग 10 बैलिस्टिक मिसाइल दागीं।

जयशंकर पहुंचे ब्रसेल्स, भारत-ईयू रिश्ते होेंगे मजबूत
भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के उद्देश्य से विदेश मंत्री एस जयशंकर रविवार को बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स पहुंचे। वह यहां दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर आए हैं। ब्रसेल्स पहुंचने पर भारत के कार्यवाहक राजदूत डॉ. एम. बालाजी ने उनका स्वागत किया। विदेश मंत्रालय के अनुसार यह यात्रा यूरोपीय संघ की उच्च प्रतिनिधि और उपाध्यक्ष काजा कालास के निमंत्रण पर हो रही है। जयशंकर यूरोपीय संघ के 27 सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों के साथ ‘फॉरेन अफेयर्स काउंसिल’ की बैठक में हिस्सा लेंगे। विदेश मंत्री यूरोपीय संघ के शीर्ष नेतृत्व के साथ-साथ बेल्जियम और अन्य सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों से भी मुलाकात करेंगे। यह यात्रा हाल ही में नई दिल्ली में हुए 16वें भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन के बाद हो रही है और इससे दोनों पक्षों के बीच रणनीतिक साझेदारी और मजबूत होने की उम्मीद है।

ट्रंप के बीजिंग दौरे से पहले मिले अमेरिका-चीन के शीर्ष अधिकारी
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रस्तावित बीजिंग दौरे से पहले अमेरिका व चीन के शीर्ष आर्थिक अधिकारियों की रविवार को फ्रांस में मुलाकात हुई। अधिकारियों की यह वार्ता टैरिफ, दुर्लभ मृदा, उच्च-तकनीक निर्यात नियंत्रण व कृषि पर केंद्रित रहने वाली है। अधिकारी इस वार्ता के जरिये मार्च के अंत में प्रस्तावित ट्रंप के बीजिंग दौरे के लिए बाधारहित मार्ग प्रशस्त करना चाहते हैं। विश्लेषकों का मानना कि ईरान युद्ध के कारण तैयारियों के अभाव में किसी बड़ी सफलता की संभावना बहुत कम है। खासकर, जब अमेरिका ने चीन व भारत समेत 16 देशों के खिलाफ व्यापार जांच शुरू की है जिसका निष्कर्ष अधिक टैरिफ के रूप में सामने आ सकता है। दोनों पक्षों ने रविवार सुबह पेरिस स्थित आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (ओआरसीए) के मुख्यालय में वार्ता शुरू की। वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी के अनुसार, सोमवार को भी वार्ता जारी रहने की उम्मीद है। चीन 38 बहुसंख्यक धनी लोकतांत्रिक देशों के इस समूह का सदस्य नहीं है और खुद को एक विकासशील देश मानता है।

जेलेंस्की ने ईरानी ड्रोन का काट खोजने पश्चिम एशियाई देशों में भेजे विशेषज्ञ
युद्धग्रस्त यूक्रेन ने अमेरिका व पश्चिम एशियाई देशों की मदद के लिए अपने ड्रोन विशेषज्ञों की टीमें भेजी हैं। ये विशेषज्ञ टीमें विभिन्न देशों में हालात का जायजा लेकर जरूरी सलाह देंगी। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा कि उनका देश युद्ध में शामिल नहीं है। खाड़ी देशों ने यूक्रेन से ईरानी कामिकाजे ड्रोन का काट निकालने की अपील की थी। यूक्रोन के पास कामिकाजे ड्रोन से निपटने का अनुभव है। मदद के बदले में यूक्रेन इन देशों से तकनीक व धन की इच्छा रखता है। जेलेंस्की ने शनिवार को पत्रकारों को बताया कि ड्रोन रक्षा प्रणालियों के संचालन के तरीके का प्रदर्शन करने और विशेषज्ञ आकलन करने के लिए तीन टीमें पश्चिम एशिया भेजी गईं। उन्होंने इस सप्ताह की शुरुआत में कहा था कि कतर, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और सऊदी अरब के साथ-साथ जॉर्डन में एक अमेरिकी सैन्यअड्डे पर भी टीमें भेजी गई हैं। जेलेंस्की ने कहा, यह किसी अभियान में शामिल होने के बारे में नहीं है। हम ईरान के साथ युद्ध में नहीं हैं। यूक्रेनी राष्ट्रपति ने कहा कि खाड़ी देशों के साथ मूलभूत, दीर्घकालिक ड्रोन समझौतों पर बातचीत की जा सकती है। यूक्रेन को सहायता के बदले क्या मिलेगा, इस पर अभी भी चर्चा की जानी बाकी है। जेलेंस्की ने कहा, आज हमारे लिए प्रौद्योगिकी और वित्तपोषण दोनों महत्वपूर्ण हैं। खाड़ी देशों ने ईरान के शाहेद ड्रोनों का मुकाबला करने के लिए बड़ी मात्रा में वायु रक्षा मिसाइलें खर्च की हैं। 
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