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World Update: दक्षिण अफ्रीका के स्कूल पाठ्यक्रम में भारतीय इतिहास शामिल करने की मांग, हिंदू संगठन ने उठाई आवाज
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: अमन तिवारी
Updated Fri, 01 May 2026 09:33 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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अमेरिका के फ्लोरिडा में 70 साल के जेम्स अर्नेस्ट हिचकॉक को जहरीला इंजेक्शन देकर मौत की सजा दी गई। उसे करीब 50 साल पहले अपने भाई की 13 साल की सौतेली बेटी सिंथिया ड्रिगर्स की हत्या का दोषी पाया गया था। यह घटना जुलाई 1976 की है। उस समय हिचकॉक की उम्र 20 साल थी और वह अपने भाई के घर में रह रहा था। जांच के अनुसार, हिचकॉक ने लड़की के साथ दुष्कर्म किया। जब लड़की ने अपनी मां को सब बताने की बात कही, तो उसने लड़की का गला घोंट दिया। इसके बाद वह उसे घर के बाहर ले गया और पीट-पीटकर मार डाला। हिचकॉक को 1977 में पहली बार मौत की सजा मिली थी। इसके बाद कई वर्षों तक अपील का दौर चला। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने उसकी आखिरी अपील भी खारिज कर दी थी। गुरुवार को हुई यह मौत की सजा इस साल फ्लोरिडा में रिपब्लिकन गवर्नर रॉन डेसेंटिस द्वारा हस्ताक्षरित डेथ वारंट के तहत छठी सजा थी। पिछले साल फ्लोरिडा में रिकॉर्ड 19 लोगों को मौत की सजा दी गई थी।
दक्षिण अफ्रीका: स्कूल पाठ्यक्रम में भारतीय इतिहास शामिल करने की मांग
दक्षिण अफ्रीका में एक प्रमुख हिंदू संगठन ने सरकार से अपील की है कि भारतीय समुदाय के इतिहास को स्कूलों की पाठ्यपुस्तकों से नजरअंदाज न किया जाए। संगठन ने कहा कि पाठ्यक्रम में भारतीयों के योगदान को उचित स्थान दिया जाना चाहिए। दक्षिण अफ्रीकी हिंदू धर्म सभा के अध्यक्ष राम महाराज ने एक खुले पत्र में कहा कि स्कूल पाठ्यक्रम में भारतीयों के इतिहास को सीमित रूप में दिखाया जा रहा है, जो सही नहीं है।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह समुदाय के योगदान को कमतर दिखाने जैसा है। महाराज ने कहा कि भारतीय समुदाय भले ही अल्पसंख्यक है, लेकिन उसका इतिहास और योगदान देश के विकास में महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने मांग की कि स्कूलों में भारतीय इतिहास की सामग्री को बढ़ाया जाए ताकि आने वाली पीढ़ियों को सही और संतुलित जानकारी मिल सके। उन्होंने याद दिलाया कि 1860 में गिरमिटिया मजदूरों के रूप में भारत से लोग दक्षिण अफ्रीका पहुंचे थे। इसके बाद उन्होंने आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक क्षेत्रों में अहम भूमिका निभाई।
संगठन ने कहा कि भारतीय समुदाय ने कठिन परिस्थितियों, भेदभाव और संघर्षों के बावजूद शिक्षा को प्राथमिकता देकर अपनी पहचान बनाई। यही कारण है कि उनका इतिहास नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत होना चाहिए। हिंदू संगठन ने यह भी कहा कि पाठ्यक्रम में संतुलित इतिहास शामिल करने से विभिन्न समुदायों के बीच समझ बढ़ेगी और सामाजिक एकता मजबूत होगी।
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दक्षिण अफ्रीका में एक प्रमुख हिंदू संगठन ने सरकार से अपील की है कि भारतीय समुदाय के इतिहास को स्कूलों की पाठ्यपुस्तकों से नजरअंदाज न किया जाए। संगठन ने कहा कि पाठ्यक्रम में भारतीयों के योगदान को उचित स्थान दिया जाना चाहिए। दक्षिण अफ्रीकी हिंदू धर्म सभा के अध्यक्ष राम महाराज ने एक खुले पत्र में कहा कि स्कूल पाठ्यक्रम में भारतीयों के इतिहास को सीमित रूप में दिखाया जा रहा है, जो सही नहीं है।
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उन्होंने आरोप लगाया कि यह समुदाय के योगदान को कमतर दिखाने जैसा है। महाराज ने कहा कि भारतीय समुदाय भले ही अल्पसंख्यक है, लेकिन उसका इतिहास और योगदान देश के विकास में महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने मांग की कि स्कूलों में भारतीय इतिहास की सामग्री को बढ़ाया जाए ताकि आने वाली पीढ़ियों को सही और संतुलित जानकारी मिल सके। उन्होंने याद दिलाया कि 1860 में गिरमिटिया मजदूरों के रूप में भारत से लोग दक्षिण अफ्रीका पहुंचे थे। इसके बाद उन्होंने आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक क्षेत्रों में अहम भूमिका निभाई।
संगठन ने कहा कि भारतीय समुदाय ने कठिन परिस्थितियों, भेदभाव और संघर्षों के बावजूद शिक्षा को प्राथमिकता देकर अपनी पहचान बनाई। यही कारण है कि उनका इतिहास नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत होना चाहिए। हिंदू संगठन ने यह भी कहा कि पाठ्यक्रम में संतुलित इतिहास शामिल करने से विभिन्न समुदायों के बीच समझ बढ़ेगी और सामाजिक एकता मजबूत होगी।
