'रूसी तेल खरीद पर छूट खत्म करेगा US': सीनेट की विदेश संबंध समिति के समक्ष बोले रुबियो; भारत पर पड़ सकता है असर
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा है कि अमेरिका रूसी तेल पर दी जा रही विशेष छूट को जल्द से जल्द समाप्त करना चाहता है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि इस संबंध में अंतिम फैसला अमेरिकी वित्त मंत्रालय लेता है। अमेरिकी सीनेट की विदेश संबंध समिति के समक्ष बोलते हुए रूबियो ने कहा कि रूस के तेल पर प्रतिबंध लगाना अमेरिका की मूल नीति रही है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में दी गई छूट अस्थायी है और इसका उद्देश्य वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति बनाए रखना है ताकि ऊर्जा संकट को रोका जा सके।
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#WATCH | On being asked about waiver on Russian oil, US Secretary of State, Marco Rubio says, "...The underlying policy remains on the sanctions... These are time-limited extensions... That ultimately is a decision that's made by Treasury, but it depends on the circumstances at… pic.twitter.com/eR1I34lJt2
विज्ञापन— ANI (@ANI) June 2, 2026विज्ञापन
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मार्च में प्रतिबंध के बाद से कुछ देशों को मिली थी छूट
अमेरिका ने मार्च में रूसी तेल खरीद पर लगे प्रतिबंधों से कुछ देशों को छूट दी थी। बाद में इसे दो बार बढ़ाया गया। सबसे हालिया विस्तार 17 मई को एक महीने के लिए दिया गया था, जिसकी अवधि 17 जून को समाप्त हो रही है। सुनवाई के दौरान सीनेट सदस्य जीन शाहीन ने पूछा कि क्या इस छूट को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। इस पर रूबियो ने कहा कि यह राहत वैश्विक बाजार में तेल आपूर्ति बनाए रखने और कीमतों में तेजी के असर को कम करने के लिए दी गई थी। बता दें कि भारत उन देशों में शामिल है जिन्हें इस छूट का लाभ मिला है। रूबियो ने कहा कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था को इसकी उतनी आवश्यकता नहीं है, लेकिन दुनिया की कई अन्य अर्थव्यवस्थाओं को इससे फायदा हुआ है।
कब तक जारी रहेगी छूट?
रूबियो ने कहा कि इन छूटों को कब तक जारी रखा जाएगा, यह अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार की स्थिति और अमेरिकी नीतिगत जरूरतों पर निर्भर करेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका की इच्छा है कि परिस्थितियां सामान्य होते ही इन छूटों को समाप्त कर दिया जाए। रूस-यूक्रेन संघर्ष के बाद पश्चिमी देशों ने रूस के ऊर्जा क्षेत्र पर कई प्रतिबंध लगाए हैं। इसके बावजूद वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित न हो, इसके लिए अमेरिका समय-समय पर कुछ अस्थायी छूट देता रहा है। इस दौरान भारत-पाकिस्तान के मुद्दे पर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा, 'हमने अजरबैजान और आर्मेनिया के साथ शांति समझौता किया... दूसरा मामला भारत-पाकिस्तान का है। हमने उस युद्ध को समाप्त किया। हमने उसमें मध्यस्थता करने में मदद की... हम लगातार और कई मामलों में बेहद सफलतापूर्वक पूरी दुनिया में कूटनीति कर रहे हैं'।
#WATCH | On India-Pakistan, US Secretary of State, Marco Rubio says, "We did a peace deal with Azerbaijan and Armenia... The second is India-Pakistan. We ended that war. We were involved in helping broker that... We are carrying out diplomacy all over the world constantly and… pic.twitter.com/Q9D0NTdnF2
— ANI (@ANI) June 2, 2026
अमेरिकी वित्त मंत्री ने क्या कहा था?
पिछले महीने अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने घोषणा की थी कि उनका विभाग 30 दिनों का एक अस्थायी सामान्य लाइसेंस जारी कर रहा है। इसका उद्देश्य उन गरीब और ऊर्जा संकट से जूझ रहे देशों को राहत देना है, जिन्हें समुद्र में फंसे रूसी तेल तक अस्थायी पहुंच की जरूरत है। बेसेंट ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा था कि इस विस्तार से जरूरतमंद देशों को अतिरिक्त लचीलापन मिलेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका ऐसे देशों के साथ मिलकर आवश्यकता पड़ने पर विशेष लाइसेंस भी जारी करेगा। उनका कहना था कि इससे वैश्विक कच्चे तेल के बाजार को स्थिर रखने में मदद मिलेगी और ऊर्जा की सबसे ज्यादा जरूरत वाले देशों तक तेल पहुंच सकेगा।
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16 मई को खत्म हुई 30 दिन की छूट
बता दें कि रूसी तेल के लिए पहले जारी 30 दिन की छूट 16 मई को समाप्त हो गई थी। यह छूट पहली बार मार्च में दी गई थी ताकि प्रतिबंधों के बावजूद समुद्र में मौजूद रूसी तेल के कार्गो अंतरराष्ट्रीय खरीदारों तक पहुंच सकें। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने और वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता के बाद यह छूट अब तक तीन बार बढ़ाई जा चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका एक ओर रूस पर आर्थिक दबाव बनाए रखना चाहता है, वहीं दूसरी ओर वह यह भी सुनिश्चित करना चाहता है कि वैश्विक तेल बाजार में किसी तरह की भारी कमी न आए और ऊर्जा कीमतें नियंत्रण में रहें।