Board of Peace: शांति बोर्ड में चीन-रूस को भी शामिल करना चाहते हैं ट्रंप, दुनिया की राजनीति में नई हलचल
Board of Peace: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से बनाए गए शांति बोर्ड की पहली बैठक संपन्न हो गई है। इस बैठक में ट्रंप ने इच्छा जताई वे इसमें रूस और चीन को भी शामिल करना चाहते हैं। वहीं इस बैठक के दौरान ट्रंप ने एक बार फिर भारत-पाकिस्तान संघर्ष रुकवाने का राग अलापा है।
विस्तार
#WATCH | On Board of Peace, US President Donald Trump says, "A lot of countries are going through the process of getting on the board... I would love to have China and Russia on the board, they have been invited..."
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Source: US Network Pool via Reuters pic.twitter.com/nv23ML8Qu5 — ANI (@ANI) February 19, 2026
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संयुक्त राष्ट्र पर भी नजर रखेगा बोर्ड
ट्रंप ने कहा कि यह नया शांति बोर्ड संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के कामकाज पर भी नजर रखेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि वह सही तरीके से काम करे। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका यूएन को आर्थिक मदद देगा ताकि उसकी हालत मजबूत हो सके। इसके साथ ही बैठक में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि अमेरिका इस शांति बोर्ड के काम के लिए 10 अरब डॉलर देगा। शुरुआत में यह शांति बोर्ड गाजा पट्टी के पुनर्निर्माण और शांति प्रयासों पर ध्यान देगा।
भारत-पाकिस्तान का नाम लेने से बाज नहीं आ रहे ट्रंप
वहीं, बोर्ड ऑफ पीस की बैठक में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-पाकिस्तान पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने हमारे चीफ ऑफ स्टाफ के सामने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत और हमारे बीच युद्ध रोककर 2 करोड़ लोगों की जान बचाई। युद्ध भयंकर था, विमानों को मार गिराया जा रहा था। बकौल ट्रंप ने कहा, 'मैंने दोनों (पीएम मोदी और शहबाज शरीफ) से फोन पर बात की। मैं प्रधानमंत्री मोदी को बहुत अच्छी तरह जानता था...' मैंने उन्हें फोन किया और कहा, अगर दोनों देश इस मामले को नहीं सुलझाते तो अमेरिका कोई व्यापारिक समझौता नहीं करेगा... मैंने कहा, अगर दोनों देश लड़ते रहे तो मैं दोनों देशों पर 200 प्रतिशत टैरिफ लगा दूंगा। दोनों ही लड़ना चाहते थे, लेकिन जब पैसे और भारी नुकसान की बात आई, तो उन्होंने कहा कि हम लड़ना नहीं चाहते... पैसा ही सब कुछ होता है। टकराव के दौरान 11 लड़ाकू विमान मार गिराए गए, ये बहुत महंगे जेट विमान थे।
#WATCH | At the Board of Peace Event, US President Donald Trump says, "...He (Pakistani PM) said in front of our Chief of Staff that President Trump saved 25 million lives when he stopped the war between us and India...That war was raging. Planes were being shot down. And I got… pic.twitter.com/pm5eT7xjz3
— ANI (@ANI) February 19, 2026
किन देशों ने हिस्सा नहीं लिया?
ट्रंप के अनुसार, शांति बोर्ड का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय संघर्ष समाधान तंत्र को मजबूत करना और वैश्विक संकटों से निपटने के लिए सहयोग बढ़ाना है। इस बैठक में 40 से अधिक देशों के प्रतिनिधिमंडलों ने भाग लिया, लेकिन फ्रांस, ब्रिटेन, रूस और चीन सहित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रमुख सदस्य शामिल नहीं हुए। अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, यूरोपीय संघ ने बोर्ड में सीट न लेने का विकल्प चुना है।
पर्यवेक्षक के रूप में बैठक में शामिल रहा भारत!
खबरों के मुताबिक, भारत ने गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के 'बोर्ड ऑफ पीस' की उद्घाटन बैठक में भाग लिया। ट्रंप ने गाजा में युद्धविराम की निगरानी और हमास-इस्राइल के बीच युद्ध से तबाह हुए गाजा पट्टी के पुनर्निर्माण के लिए इस संस्था का गठन किया है। भारत, जो अभी तक बोर्ड ऑफ पीस का सदस्य नहीं बना है, ने एक पर्यवेक्षक देश के रूप में बैठक में भाग लिया। पीटीआई ने डोनाल्ड ट्रंप इंस्टीट्यूट ऑफ पीस में आयोजित बैठक में उपस्थित लोगों की सूची का हवाला देते हुए बताया कि भारत का प्रतिनिधित्व वाशिंगटन डीसी स्थित भारतीय दूतावास के उपराजदूत नामग्या खम्पा ने किया। बता दें कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन कई वैश्विक नेताओं में शामिल थे जिन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति ने गाजा पट्टी में इस्राइल और हमास के बीच युद्धविराम समझौते के दूसरे चरण के तहत घोषित बोर्ड में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया था।
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शांति बोर्ड में कौन-कौन शामिल?
राष्ट्रपति ट्रंप ने सितंबर में अमेरिका की मध्यस्थता से हुए 20 सूत्री गाजा युद्धविराम योजना के दूसरे चरण के तहत शांति बोर्ड का प्रस्ताव रखा था। इस बोर्ड के शुरुआती एग्जिक्यूटिव सदस्यों में ट्रंप के दामाद जेरेड कुश्नर, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर शामिल हैं।
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