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वापी में PRISM-PCI कॉन्क्लेव: भारत अब कार्डियक केयर इनोवेशन में ग्लोबल लीडर बनने राह पर

Media Solutions Initiative Published by: मार्केटिंग डेस्क Updated Wed, 28 Jan 2026 10:33 PM IST
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PRISM-PCI Conclave in Vapi: India on its way to becoming a global leader in cardiac care innovation
मेरिल - फोटो : amarujala.com
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पिछले पांच दशकों में हृदय रोग के इलाज (कार्डियक केयर) में एक क्रांतिकारी बदलाव आया है। 1977 की साधारण बैलून एंजियोप्लास्टी से लेकर आज के सटीक और इमेज-गाइडेड इंटरवेंशन तक का सफर चिकित्सा विज्ञान की प्रगति को दर्शाता है। इसी विकास और भविष्य की रणनीतियों पर चर्चा करने के लिए मेरिल लाइफ साइंसेज ने 16 से 18 जनवरी तक वापी में अपने कैंपस में 'PRISM-PCI कॉन्क्लेव 2026' की मेजबानी की।  

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इस प्रतिष्ठित आयोजन में भारत और दुनिया भर के लगभग 300 इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट ने हिस्सा लिया। चर्चा का मुख्य केंद्र यह था कि कैसे एंजियोप्लास्टी, जो कभी एक सीधी प्रक्रिया थी, अब जटिल होती जा रही है और कैसे तकनीकी नवाचार मरीजों के जीवन को बेहतर बना रहा है। 
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जटिल होती बीमारियां और 'प्रिसिजन' की जरूरत
कॉन्क्लेव का मुख्य विषय PRISM था, जिसका अर्थ है- कॉम्प्लेक्स PCI के प्रबंधन के लिए इनोवेशन-गाइडेड स्ट्रैटेजी का उपयोग करके 'प्रिसिजन रीवैस्कुलराइजेशन' (सटीक रक्त प्रवाह बहाली)। आज के दौर में कार्डियक केयर के सामने नई चुनौतियां हैं। मरीज अब मल्टी-वेसल डिजीज (एक से अधिक नसों में बीमारी), भारी कैल्सिफिकेशन और हार्ट फेलियर जैसी समस्याओं के साथ आ रहे हैं। चिंताजनक बात यह है कि अब पहले की तुलना में बहुत कम उम्र के लोगों को इंटरवेंशन की जरूरत पड़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी जटिलताओं को संभालने के लिए केवल डॉक्टर का कौशल काफी नहीं है, बल्कि सटीक इमेजिंग, फिजियोलॉजिकल असेसमेंट और आधुनिक उपकरणों की भी आवश्यकता है। 

भारत: उपभोक्ता से योगदानकर्ता तक
भारत में PCI के विकास पर एक मुख्य भाषण देते हुए, नई दिल्ली के फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हार्ट इंस्टीट्यूट के चेयरमैन डॉ. अशोक सेठ ने कहा, “भारत ग्लोबल इनोवेशन का कंज्यूमर होने से आगे बढ़कर कंट्रीब्यूटर बन गया है। पिछले कुछ दशकों में बहुत तरक्की हुई है- न सिर्फ इलाज किए गए मरीजों की संख्या में, बल्कि अब हम जो देखभाल दे सकते हैं उसकी क्वालिटी, कॉम्प्लेक्सिटी और सोफिस्टिकेशन में भी।” टेक्नोलॉजी में तरक्की को मरीज़ों के लिए ज़्यादा किफायती बनाना। इस तरह के टेक्नोलॉजी इनोवेशन की दुनिया भर में तारीफ़ हो रही है। 

सटीकता और सुरक्षा पर विशेषज्ञों का जोर
अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने भी आधुनिक चिकित्सा में सटीकता के महत्व को रेखांकित किया। न्यूयॉर्क के माउंट सिनाई हेल्थ सिस्टम में इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी के डायरेक्टर डॉ. समीन शर्मा ने कहा कि एंजियोप्लास्टी का भविष्य बीमारी को बेहतर ढंग से समझने में निहित है। उन्होंने निर्णय लेने के लिए इमेजिंग और फिजियोलॉजी के इस्तेमाल पर जोर दिया, जिससे इलाज में सुरक्षा और एकरूपता आती है।

वहीं, मेरिल के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट संजीव भट्ट ने कार्डियोवैस्कुलर बीमारी को एक 'नेशनल प्रायोरिटी' बताते हुए कहा कि लाखों मरीजों के बेहतर नतीजों के लिए मजबूत क्लिनिकल सबूत और इंटीग्रेटेड टेक्नोलॉजी जरूरी है। उन्होंने इस बात पर गर्व जताया कि भारत के पास अब इन जान बचाने वाली तकनीकों को बड़े पैमाने पर विकसित करने की क्षमता है।  

मेक इन इंडिया और बीमारी की रोकथाम पर फोकस 
पिछले एक दशक में भारत में निर्मित एडवांस्ड कोरोनरी स्टेंट और ट्रांसकैथेटर हार्ट वाल्व जैसी तकनीकों ने देश और विदेश में मॉडर्न कार्डियक केयर तक पहुंच को आसान बनाया है। इस बदलाव ने आयात पर निर्भरता कम की है और भारतीय डॉक्टरों को विश्वस्तरीय उपकरण उपलब्ध कराए हैं। तकनीक के साथ-साथ, PRISM कॉन्क्लेव में बीमारी की रोकथाम पर भी चर्चा की गई। चूंकि युवा आबादी तेजी से हृदय रोगों की चपेट में आ रही है, विशेषज्ञों ने जोर दिया कि एडवांस्ड इलाज के साथ-साथ जल्दी जांच, जीवनशैली में बदलाव और जागरूकता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। 



क्या है मेरिल का दृष्टिकोण?
यह कॉन्क्लेव सिर्फ एक वैज्ञानिक बैठक नहीं थी, बल्कि ग्लोबल हेल्थकेयर में भारत के बढ़ते कद का प्रमाण था। भारत अब न केवल दुनिया के सबसे ज्यादा कार्डियक मरीजों का इलाज कर रहा है, बल्कि इनोवेशन और रिसर्च के जरिए हार्ट केयर के भविष्य को आकार भी दे रहा है। मेरिल, जो 150 से अधिक देशों में अपनी उपस्थिति के साथ एक ग्लोबल मेडिकल डिवाइस कंपनी है, इस बदलाव में अहम भूमिका निभा रही है।

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