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क्या आपकी पूजा में भी हो रही हैं ये गलतियां, जानिए पूजा घर से जुड़े महत्वपूर्ण वास्तु नियम
अनीता जैन ,वास्तुविद
Published by: Vinod Shukla
Updated Mon, 15 Jun 2026 01:03 PM IST
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सार
हिंदू धर्म और वास्तु शास्त्र में पूजा घर का विशेष स्थान होता है। इस स्थान पर सबसे ज्यादा सकारात्मक ऊर्जा रहती है। आइए जानते हैं आपके घर का पूजा का स्थान कैसा होना चाहिए और पूजा में किन-किन नियमों का पालन करना चाहिए।
पूजा घर के नियम
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
सनातन धर्म में पूजा-पाठ केवल भगवान की आराधना का माध्यम नहीं है, बल्कि इसे घर में सकारात्मक ऊर्जा, मानसिक शांति और सुख-समृद्धि लाने वाला महत्वपूर्ण आध्यात्मिक कर्म माना गया है। वास्तु शास्त्र के अनुसार जिस घर में नियमित रूप से विधि-विधान से पूजा होती है, वहां सकारात्मक ऊर्जा का संचार बना रहता है। लेकिन कई बार लोग अनजाने में पूजा के दौरान कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जो वास्तु की दृष्टि से उचित नहीं मानी जातीं। इन छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देकर पूजा का पूर्ण फल प्राप्त किया जा सकता है।
पूजा स्थल की स्वच्छता
वास्तु शास्त्र में स्वच्छता को सकारात्मक ऊर्जा का आधार माना गया है। पूजा घर में धूल, जाले, टूटे-फूटे सामान या अनावश्यक वस्तुएं रखना शुभ नहीं माना जाता। माना जाता है कि स्वच्छ और व्यवस्थित पूजा स्थल में ही देवी-देवताओं की कृपा बनी रहती है। इसलिए पूजा स्थान की नियमित सफाई करना आवश्यक है।
खंडित मूर्तियां और फटे चित्र न रखें
धार्मिक और वास्तु दोनों दृष्टियों से पूजा घर में टूटी हुई मूर्तियां या फटे हुए देवी-देवताओं के चित्र रखना अशुभ माना जाता है। ऐसी वस्तुएं घर में नकारात्मक ऊर्जा का कारण बन सकती हैं। यदि कोई प्रतिमा खंडित हो जाए तो उसे सम्मानपूर्वक किसी पवित्र जलाशय में विसर्जित कर देना चाहिए।
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पूजा घर में जरूरत से ज्यादा मूर्तियां रखने से बचें
कई लोग श्रद्धा के कारण अनेक देवी-देवताओं की मूर्तियां और चित्र एकत्र कर लेते हैं। वास्तु शास्त्र में पूजा घर को सरल और व्यवस्थित रखने की सलाह दी गई है। अत्यधिक मूर्तियां रखने से पूजा स्थल में ऊर्जा का संतुलन प्रभावित हो सकता है और नियमित पूजा में भी कठिनाई आती है।
यह एक ऐसी गलती है जो बहुत से घरों में देखने को मिलती है। पूजा में अर्पित किया गया जल, फूल और प्रसाद कई दिनों तक वहीं रखा रहता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार पूजा स्थान में बासी जल, सूखे फूल या खराब हो चुका प्रसाद रखना शुभ नहीं माना जाता। इससे पूजा स्थल की पवित्रता प्रभावित होती है। इसलिए इन वस्तुओं को समय पर बदलते रहना चाहिए।
सूखे फूल और पुरानी पूजन सामग्री हटाते रहें
भगवान को अर्पित किए गए फूल श्रद्धा का प्रतीक हैं, लेकिन सूख जाने के बाद उन्हें लंबे समय तक पूजा घर में नहीं रखना चाहिए। इसी प्रकार पुरानी अगरबत्ती, रुई, माला या अन्य पूजन सामग्री को भी समय-समय पर हटाना आवश्यक माना गया है। इससे पूजा स्थान में स्वच्छता और सकारात्मकता बनी रहती है।
वास्तु शास्त्र में दिशा का विशेष महत्व बताया गया है। पूजा करते समय पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करना शुभ माना जाता है। वहीं पूजा घर के लिए ईशान कोण अर्थात उत्तर-पूर्व दिशा को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। सही दिशा में पूजा करने से मन की एकाग्रता और आध्यात्मिक ऊर्जा बढ़ती है।
अक्सर जगह की कमी के कारण लोग पूजा घर में चाबियां, पैसे, दवाइयां, बिल या अन्य घरेलू सामान रखने लगते हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार पूजा स्थल केवल पूजा और आध्यात्मिक कार्यों के लिए होना चाहिए। वहां अनावश्यक वस्तुएं रखने से उस स्थान की पवित्रता प्रभावित हो सकती है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
पूजा स्थल की स्वच्छता
वास्तु शास्त्र में स्वच्छता को सकारात्मक ऊर्जा का आधार माना गया है। पूजा घर में धूल, जाले, टूटे-फूटे सामान या अनावश्यक वस्तुएं रखना शुभ नहीं माना जाता। माना जाता है कि स्वच्छ और व्यवस्थित पूजा स्थल में ही देवी-देवताओं की कृपा बनी रहती है। इसलिए पूजा स्थान की नियमित सफाई करना आवश्यक है।
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खंडित मूर्तियां और फटे चित्र न रखें
धार्मिक और वास्तु दोनों दृष्टियों से पूजा घर में टूटी हुई मूर्तियां या फटे हुए देवी-देवताओं के चित्र रखना अशुभ माना जाता है। ऐसी वस्तुएं घर में नकारात्मक ऊर्जा का कारण बन सकती हैं। यदि कोई प्रतिमा खंडित हो जाए तो उसे सम्मानपूर्वक किसी पवित्र जलाशय में विसर्जित कर देना चाहिए।
पूजा घर में जरूरत से ज्यादा मूर्तियां रखने से बचें
कई लोग श्रद्धा के कारण अनेक देवी-देवताओं की मूर्तियां और चित्र एकत्र कर लेते हैं। वास्तु शास्त्र में पूजा घर को सरल और व्यवस्थित रखने की सलाह दी गई है। अत्यधिक मूर्तियां रखने से पूजा स्थल में ऊर्जा का संतुलन प्रभावित हो सकता है और नियमित पूजा में भी कठिनाई आती है।
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पूजा घर में बासी जल और पुराने प्रसाद को न रखेंयह एक ऐसी गलती है जो बहुत से घरों में देखने को मिलती है। पूजा में अर्पित किया गया जल, फूल और प्रसाद कई दिनों तक वहीं रखा रहता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार पूजा स्थान में बासी जल, सूखे फूल या खराब हो चुका प्रसाद रखना शुभ नहीं माना जाता। इससे पूजा स्थल की पवित्रता प्रभावित होती है। इसलिए इन वस्तुओं को समय पर बदलते रहना चाहिए।
सूखे फूल और पुरानी पूजन सामग्री हटाते रहें
भगवान को अर्पित किए गए फूल श्रद्धा का प्रतीक हैं, लेकिन सूख जाने के बाद उन्हें लंबे समय तक पूजा घर में नहीं रखना चाहिए। इसी प्रकार पुरानी अगरबत्ती, रुई, माला या अन्य पूजन सामग्री को भी समय-समय पर हटाना आवश्यक माना गया है। इससे पूजा स्थान में स्वच्छता और सकारात्मकता बनी रहती है।
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पूजा के समय दिशा का ध्यान रखेंवास्तु शास्त्र में दिशा का विशेष महत्व बताया गया है। पूजा करते समय पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करना शुभ माना जाता है। वहीं पूजा घर के लिए ईशान कोण अर्थात उत्तर-पूर्व दिशा को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। सही दिशा में पूजा करने से मन की एकाग्रता और आध्यात्मिक ऊर्जा बढ़ती है।
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पूजा घर में अन्य सामान रखने की गलती न करेंअक्सर जगह की कमी के कारण लोग पूजा घर में चाबियां, पैसे, दवाइयां, बिल या अन्य घरेलू सामान रखने लगते हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार पूजा स्थल केवल पूजा और आध्यात्मिक कार्यों के लिए होना चाहिए। वहां अनावश्यक वस्तुएं रखने से उस स्थान की पवित्रता प्रभावित हो सकती है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
