SUV: भारत में बिकने वाली हर तीन कारों में दो हैं एसयूवी, यात्री वाहन बाजार में इनकी 65% हिस्सेदारी
वह दौर अब बीत चुका है जब रोजाना आवाजाही और बेहतर माइलेज के लिए छोटी हैचबैक कारें भारतीय पैसेंजर व्हीकल बाजार का मुख्य आधार हुआ करती थीं। वैश्विक रुझानों के साथ तालमेल बिठाते हुए पिछले कुछ वर्षों में भारतीय ग्राहकों की प्राथमिकताओं में बड़ा बदलाव आया है।
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एक समय था जब भारत के कार बाजार की रफ्तार छोटी हैचबैक कारों से तय होती थी। कम कीमत, बेहतर माइलेज और रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए आसान होने के कारण छोटी कारें लंबे समय तक भारतीय ग्राहकों की पहली पसंद बनी रहीं। लेकिन अब तस्वीर तेजी से बदल गई है।
पिछले कुछ वर्षों में ग्राहकों की पसंद में बड़ा बदलाव आया है। SUV (स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हीकल), क्रॉसओवर और MPV (मल्टी पर्पज व्हीकल) जैसी यूटिलिटी व्हीकल अब भारतीय यात्री वाहन बाजार की सबसे बड़ी ताकत बन चुकी हैं।
वित्त वर्ष 2025-26 में SUV की हिस्सेदारी कुल पैसेंजर व्हीकल बिक्री में बढ़कर 65 प्रतिशत पहुंच गई। आसान शब्दों में कहें तो भारत में बिकने वाली हर तीन यात्री वाहन में करीब दो एसयूवी हैं।
रूबिक्स डेटा साइंसेज की ताजा उद्योग रिपोर्ट में भारतीय ऑटो बाजार में आए इस बड़े बदलाव के साथ बिक्री, उत्पादन, निर्यात, इलेक्ट्रिक वाहनों और नई तकनीकों से जुड़े कई अहम आंकड़े सामने आए हैं।
SUV की बिक्री में इतना बड़ा बदलाव कैसे आया?
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SUV और यूटिलिटी व्हीकल की हिस्सेदारी 65 प्रतिशत पहुंची।
भारतीय ग्राहकों की पसंद अब छोटी हैचबैक से आगे बढ़कर ज्यादा स्पेस, ऊंची ड्राइविंग पोजिशन और ज्यादा उपयोगिता वाली SUV और क्रॉसओवर की ओर जा रही है। -
FY21 में यूटिलिटी व्हीकल की हिस्सेदारी 39 प्रतिशत थी।
यानी कुछ ही वर्षों में इन वाहनों की हिस्सेदारी में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। यह बदलाव सिर्फ अस्थायी ट्रेंड नहीं बल्कि ग्राहकों की पसंद में बड़े संरचनात्मक बदलाव का संकेत माना जा रहा है।
भारतीय पैसेंजर व्हीकल बाजार कितनी तेजी से बढ़ा?
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FY21 में उत्पादन 30.6 लाख वाहन था।
वित्त वर्ष 2021 में भारत में 30.6 लाख पैसेंजर व्हीकल का उत्पादन हुआ था। -
FY26 में उत्पादन बढ़कर 55.4 लाख हुआ।
पांच साल में उत्पादन में काफी बढ़ोतरी हुई और यह 13 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ा। -
घरेलू बिक्री 27.1 लाख से बढ़कर 46.4 लाख हुई।
इसी अवधि में भारत में पैसेंजर व्हीकल की घरेलू बिक्री 27.1 लाख से बढ़कर 46.4 लाख वाहन हो गई, जो 11 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर है। -
FY26 में बिक्री करीब 8 प्रतिशत बढ़ी।
FY25 में बिक्री की रफ्तार कुछ धीमी पड़ने के बाद FY26 में बाजार ने फिर मजबूत वापसी की और सालाना आधार पर करीब 8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की।
FY26 में कारों की बिक्री बढ़ने की वजह क्या रही?
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GST दर में कटौती।
वाहनों पर कर का बोझ कम होने से ग्राहकों के लिए कार खरीदना कुछ आसान हुआ और इससे मांग को बढ़ावा मिला। -
RBI की रेपो दरों में नरमी।
ब्याज दरों में कमी से वाहन ऋण की लागत कम हुई, जिसका सकारात्मक असर नई कारों की खरीद पर पड़ा।
इन दोनों कारकों ने FY26 में पैसेंजर व्हीकल बाजार की बिक्री को फिर से गति देने में अहम भूमिका निभाई।
भारत वैश्विक कार बाजार में किस स्थान पर है?
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उत्पादन में भारत तीसरे स्थान पर है।
भारत दुनिया में पैसेंजर व्हीकल के सबसे बड़े उत्पादन केंद्रों में शामिल है और उत्पादन के मामले में तीसरे स्थान पर है। -
बिक्री में भी भारत तीसरे स्थान पर है।
घरेलू मांग के मजबूत होने के कारण भारत पैसेंजर व्हीकल बिक्री के मामले में भी दुनिया में तीसरे स्थान पर है।
यानी भारत सिर्फ एक बड़ा कार बाजार नहीं है, बल्कि वैश्विक वाहन निर्माण के लिए भी लगातार महत्वपूर्ण होता जा रहा है।
भारत से कारों का निर्यात कितना बढ़ा?
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FY25 में निर्यात 7.7 लाख वाहन तक पहुंचा।
पैसेंजर व्हीकल निर्यात में 17 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर दर्ज हुई और निर्यात रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। -
कॉम्पैक्ट कारों और यूटिलिटी व्हीकल की बड़ी भूमिका रही।
मारुति सुज़ुकी, ह्यूंदै और फॉक्सवैगन जैसी कंपनियों के कॉम्पैक्ट कार और यूटिलिटी व्हीकल मॉडल ने निर्यात को बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। -
Maruti Suzuki का निर्यात FY26 में 4.47 लाख वाहन रहा।
कंपनी के निर्यात में 34 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और यह अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया।
भारत के प्रमुख कार निर्यात बाजार कौन से हैं?
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दक्षिण अफ्रीका
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सऊदी अरब
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मेक्सिको
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जापान
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यूएई
इन देशों में भारतीय पैसेंजर व्हीकल की मांग मजबूत रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, ये बाजार भारत के बढ़ते वाहन निर्यात में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
क्या नई तकनीकें भी कार बाजार को बदल रही हैं?
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ADAS की हिस्सेदारी बढ़ी।
पैसेंजर व्हीकल में ADAS की पहुंच H1 2024 में 6.2 प्रतिशत से बढ़कर H1 2025 में 8.3 प्रतिशत हो गई। -
BS-VII उत्सर्जन नियम आने की तैयारी।
Euro 7 के अनुरूप तैयार किए जाने वाले BS-VII उत्सर्जन मानकों को FY27 में अधिसूचित किए जाने की उम्मीद है। इससे वाहनों और उनके पुर्जों में नए तकनीकी बदलावों की जरूरत पड़ेगी।
इससे साफ है कि भारतीय ऑटो उद्योग में बदलाव सिर्फ ग्राहकों की पसंद तक सीमित नहीं है। सुरक्षा, उत्सर्जन और तकनीक से जुड़े नए नियम भी कंपनियों को अपने वाहनों में लगातार सुधार करने के लिए मजबूर कर रहे हैं।
भारत में इलेक्ट्रिक कारों की मांग कितनी बढ़ी?
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EV की हिस्सेदारी 2022 में 1 प्रतिशत थी।
पैसेंजर व्हीकल पंजीकरण में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी उस समय काफी कम थी। -
2025 में यह बढ़कर 4 प्रतिशत हो गई।
इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री और नए मॉडल आने के साथ EV की पहुंच तेजी से बढ़ी है। -
2026 में सभी चार-पहिया वाहनों में EV की हिस्सेदारी 5.35 प्रतिशत रही।
इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड मॉडल की बढ़ती संख्या ने इस बदलाव को और गति दी है।
रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले समय में इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर बाजार की रफ्तार और बढ़ सकती है। इसके पीछे नए इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड मॉडल, सरकारी नीतियों और तकनीक में हो रहे निवेश की बड़ी भूमिका रहेगी।
भारतीय कार बाजार का अगला विकास किन चीजों पर निर्भर करेगी?
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सरकारी नीतियां और निवेश।
नीतिगत समर्थन और वाहन उद्योग में लगातार हो रहा निवेश बाजार के अगले विकास को रफ्तार देगा। -
फाइनेंसिंग में आसानी।
वाहन ऋण की लागत कम रहने से नई कार खरीदने वाले ग्राहकों की संख्या बढ़ सकती है। -
इलेक्ट्रिक वाहनों का विस्तार।
EV और हाइब्रिड मॉडल की बढ़ती संख्या बाजार के अगले चरण को प्रभावित करेगी। -
पुराने वाहनों को बदलने की मांग।
पुराने वाहनों की जगह नए वाहन खरीदने की जरूरत भी बिक्री बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
कुल मिलाकर, भारतीय कार बाजार अब उस दौर से काफी आगे निकल चुका है, जहां छोटी हैचबैक कारें इसकी सबसे बड़ी ताकत हुआ करती थीं। SUV और दूसरी यूटिलिटी व्हीकल अब बाजार की दिशा तय कर रही हैं। जबकि इलेक्ट्रिक वाहन, हाइब्रिड तकनीक, ADAS और नए उत्सर्जन मानक आने वाले वर्षों में उद्योग के अगले बड़े बदलाव की नींव तैयार कर रहे हैं।