AI Impact Summit 2026: सड़क सुरक्षा और प्रदूषण नियंत्रण में एआई निभाएगा बड़ी भूमिका, जानिए क्या है रोडमैप?
AI to Improve Road Safety: दिल्ली के भारत मंडपम में चल रहे एआई इंपैक्ट समिट 2026 में भारत में सड़क दुर्घटनाओं को कम करने और प्रदूषण नियंत्रण के लिए एआई का इस्तेमाल बढ़ाने पर चर्चा हुई। एआई की मदद से ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन की सटीक निगरानी, दुर्घटनाओं के डाटा की निगरानी और व्हीकल-टू-व्हीकल कम्युनिकेशन के जरिए पहले से चेतावनी देना संभव होगा। सरकार प्रदूषण नियंत्रण के लिए भी एआई आधारित टूल विकसित कर रही है और सड़क सुरक्षा जागरूकता बढ़ाने के लिए ड्राइविंग शिक्षा को स्कूल पाठ्यक्रम में शामिल करने की योजना बना रही है।
विस्तार
सड़क दुर्घटनाओं को कम करने और वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए एआई का बड़े स्तर पर उपयोग किया जा सकता है। यह जानकारी सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी पंकज अग्रवाल ने दी। नई दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इंपैक्ट समिट 2026 के दौरान उन्होंने कहा कि एआई सड़क सुरक्षा और पर्यावरण की रक्षा में अहम भूमिका निभा सकता है। नई तकनीक की मदद से सड़क हादसों को कम किया जा सकता है और वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर बेहतर तरीके से नजर रखी जा सकती है।
उन्होंने बताया कि सड़क और परिवहन क्षेत्र में एआई के इस्तेमाल की काफी संभावनाएं हैं। एआई की मदद से ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन आसानी से पकड़ा जा सकेगा, सटीक और वास्तविक डाटा मिल सकेगा और हादसों को रोकने के लिए समय रहते कार्रवाई की जा सकेगी। इसके अलावा एआई प्रदूषण की सही निगरानी करने और उसे कम करने में भी सरकार की मदद करेगा।
दुर्घटनाएं रोकने में एआई की अहम भूमिका
पंकज अग्रवाल ने कहा कि एआई सड़क हादसों और उनसे होने वाली मौतों को कम करने में काफी मदद कर सकता है। उन्होंने बताया कि ट्रैफिक नियम तोड़ने में सबसे बड़ी समस्या तेज रफ्तार यानी ओवरस्पीडिंग है। अग्रवाल ने 'AI for Road Safety: Data-Driven Solutions for Enhancing Road Safety in India' विषय पर हुई चर्चा में ये बात कही। उन्होंने यह भी कहा कि अभी पुलिस जो डाटा रिकॉर्ड करती है वो हमेशा पूरी तरह सही नहीं होता क्योंकि दुर्घटनाओं के पीछे कई अलग-अलग कारण होते हैं। एआई की मदद से अपने-आप सटीक और सही डाटा इकट्ठा किया जा सकता है। इस डाटा को सबूत के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे हादसों के असली कारण पता चलेंगे और उन्हें रोकने के लिए सही और समय पर कदम उठाए जा सकेंगे।
व्हीकल-टू-व्हीकल कम्युनिकेशन से पहले ही मिल जाएगी चेतावनी
अग्रवाल ने बताया कि व्हीकल-टू-व्हीकल कम्युनिकेशन (V2V Communication) तकनीक की मदद से एक वाहन दूसरे वाहन से जानकारी साझा कर सकेगा। इससे ड्राइवर को टक्कर होने से पहले ही चेतावनी मिल जाएगी। इस चेतावनी से ड्राइवर समय रहते सावधान हो सकता है और अपनी ड्राइविंग संभाल सकता है जिससे दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि चालान काटने और ट्रैफिक नियमों को सही तरीके से लागू करने में अभी कई दिक्कतें आती हैं। एआई की मदद से इन प्रक्रियाओं को आसान, तेज और ज्यादा सटीक बनाया जा सकता है।
दुर्घटना और मौतों का सही डाटा रखने में मदद करेगा एआई
एआई की मदद से सड़क दुर्घटनाओं और उनसे होने वाली मौतों का सही और पूरा डाटा तैयार किया जा सकता है। इससे यह समझना आसान होगा कि हादसे क्यों हो रहे हैं और उन्हें कैसे रोका जा सकता है। उदाहरण के तौर पर उन्होंने बताया कि बिहार में सड़क दुर्घटनाओं में मौतों की संख्या राष्ट्रीय औसत से ज्यादा है। ऐसे मामलों में एआई आधारित सिस्टम सही जानकारी देने और समस्या को समझने में मदद करेगा जिससे हादसों को कम करने के लिए बेहतर कदम उठाए जा सकेंगे।
प्रदूषण नियंत्रण के लिए भी तैयार हो रहा एआई टूल
अग्रवाल ने कहा कि शहरों में बढ़ता प्रदूषण एक बड़ी समस्या है। इसे नियंत्रित करने के लिए सरकार एआई आधारित एक खास टूल तैयार कर रही है। उन्होंने बताया कि कई बार प्रदूषण से जुड़ा डाटा पूरी तरह सही नहीं होता या भ्रम पैदा कर सकता है। लेकिन एआई की मदद से प्रदूषण की सही निगरानी की जा सकेगी और उसे कम करने के लिए बेहतर और सही कदम उठाए जा सकेंगे।
स्कूल पाठ्यक्रम में ड्राइविंग शिक्षा जोड़ने की योजना
युवाओं को सड़क सुरक्षा के बारे में जागरूक बनाने के लिए ड्राइविंग शिक्षा को स्कूल के पाठ्यक्रम में शामिल करने की योजना बनाई जा रही है। अग्रवाल ने बताया कि आईआईटी मद्रास इस पर काम कर रहा है। एआई की मदद से छात्रों को सही और सुरक्षित ड्राइविंग के बारे में सिखाया जाएगा। इसका उद्देश्य है कि कम उम्र से ही बच्चों को ट्रैफिक नियमों और सड़क सुरक्षा की सही जानकारी मिले, ताकि भविष्य में दुर्घटनाओं को कम किया जा सके।
सड़क सुरक्षा के भविष्य में एआई होगा अहम
विशेषज्ञों का कहना है कि एआई की मदद से भारत की सड़कें ज्यादा सुरक्षित और स्मार्ट बनाई जा सकती हैं। एआई स्मार्ट तरीके से डाटा का विश्लेषण कर सकता है वाहनों के बीच जानकारी साझा कर सकता है और प्रदूषण पर नजर रख सकता है। एआई के बढ़ते इस्तेमाल से सड़क दुर्घटनाओं को कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही ये ट्रैफिक को बेहतर तरीके से संभालने और पर्यावरण की सुरक्षा में भी अहम भूमिका निभाएगा।