Budget 2026-27: बजट 2026 में 'मेक इन इंडिया' पर जोर, वैश्विक व्यापार में भारत की तैयारी
आम बजट 2026 ऐसे समय में पेश किया गया है जब नरेंद्र मोदी सरकार के पास कुछ दूरगामी उपायों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए काफी गुंजाइश है। जो भारतीय अर्थव्यवस्था में लंबे समय से चली आ रही समस्याओं को हल करेंगे। मैन्युफैक्चरिंग उनमें से एक है।
विस्तार
वैश्विक व्यापार व्यवस्था में बड़े बदलावों के दौर में पेश किया गया केंद्रीय बजट 2026 भारतीय मैन्युफैक्चरिंग को नई प्रतिस्पर्धात्मक धार देने की कोशिश करता नजर आता है। सरकार के पास अब ऐसे नीतिगत फैसले लेने की गुंजाइश है, जो लंबे समय से अटके ढांचागत सुधारों को आगे बढ़ा सकें और मैन्युफैक्चरिंग इसका सबसे अहम स्तंभ है।
मैन्युफैक्चरिंग को GDP में मजबूत हिस्सेदारी दिलाने की कोशिश
भारत में मैन्युफैक्चरिंग की हिस्सेदारी लंबे समय से जीडीपी के करीब 15 प्रतिशत के आसपास अटकी हुई है। इसे बढ़ाने के प्रयास पहले भी हुए, चाहे वह यूपीए सरकार का दौर रहा हो या मौजूदा सरकार के शुरुआती साल। पिछले साल घोषित नेशनल मैन्युफैक्चरिंग मिशन का लक्ष्य 2035 तक इस हिस्सेदारी को लगभग दोगुना करना है।
निर्मला सीतारमण द्वारा 1 फरवरी को पेश किए गए बजट 2026 में इसी मिशन को आगे बढ़ाने की कोशिश दिखती है। भले ही कोई बड़ा ‘बिग-बैंग’ एलान न हुआ हो, लेकिन आने वाले वर्षों में चरणबद्ध तरीके से मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करने की जमीन जरूर तैयार की गई है।
बदलता वैश्विक व्यापार और भारत की चुनौती
बजट ऐसे समय आया है जब वैश्विक व्यापार की पुरानी संरचना टूट रही है। अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के दौर से शुरू हुई टैरिफ नीतियों ने भारत के सामने नई चुनौतियां खड़ी की हैं। अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर बातचीत लंबी खिंचने से भारतीय निर्यात पर ऊंचे शुल्क का दबाव बना हुआ है।
दूसरी ओर, चीन अब उन बाजारों पर ज्यादा ध्यान दे रहा है जहां भारत पारंपरिक रूप से मजबूत रहा है। इन हालात में भारत के लिए जरूरी हो गया है कि वह अपनी मैन्युफैक्चरिंग को ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनाए, ताकि निर्यात को नई रफ्तार मिल सके।
सात रणनीतिक सेक्टरों पर केंद्रित बजट
सीतारमण का लगातार नौवां बजट इसी पृष्ठभूमि में देखा जाना चाहिए। बजट 2026 में सात रणनीतिक और फ्रंटियर सेक्टरों पर फोकस किया गया है। इनमें बायोफार्मा जैसे नए क्षेत्र भी हैं और सेमीकंडक्टर जैसे वे सेक्टर भी, जहां पहले से चल रही नीतियों को आगे बढ़ाया गया है।
बायोफार्मा SHAKTI: दवाओं में वैश्विक हब बनने की तैयारी
जैविक दवाओं की बढ़ती वैश्विक मांग को देखते हुए बजट 2026 में बायोफार्मा SHAKTI (स्ट्रैटेजी फॉर हेल्थकेयर एडवांस्मेंट थ्रू नॉलेज, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन) की घोषणा की गई है। अगले पांच वर्षों में 10,000 करोड़ रुपये के निवेश से भारत को वैश्विक बायोफार्मा मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
इसके तहत नए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च स्थापित होंगे, मौजूदा संस्थानों को अपग्रेड किया जाएगा। और देशभर में 1,000 से ज्यादा मान्यता प्राप्त क्लिनिकल ट्रायल साइट्स बनाई जाएंगी। अशोक नायर के मुताबिक, यह कदम भारत को बायोसिमिलर्स के वैश्विक बाजार में मजबूती से खड़ा कर सकता है।
सेमीकंडक्टर से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स तक विस्तार
बजट 2026 में इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 की रूपरेखा भी पेश की गई है, जिसका मकसद उपकरण, सामग्री, डिजाइन और सप्लाई चेन को मजबूत करना है। इसके साथ ही इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम का आवंटन बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
रेयर अर्थ मिनरल्स और घरेलू सप्लाई चेन पर जोर
चीन पर रेयर अर्थ मिनरल्स की निर्भरता से मिले सबक के बाद बजट में ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे खनिज-समृद्ध राज्यों में रेयर अर्थ कॉरिडोर विकसित करने की घोषणा की गई है। इससे खनन से लेकर मैन्युफैक्चरिंग तक पूरी वैल्यू चेन देश में मजबूत होगी।
इंफ्रास्ट्रक्चर, MSME और कैपेक्स का सहारा
इन सभी पहलों को 12.2 लाख करोड़ रुपये के कैपेक्स का सहारा दिया गया है, जो लॉजिस्टिक्स लागत घटाने और मैन्युफैक्चरिंग को गति देने में अहम होगा। इसके अलावा 10,000 करोड़ रुपये का SME ग्रोथ फंड और माइक्रो एंटरप्राइजेज के लिए अतिरिक्त सहायता भी प्रस्तावित है।
संजय दत्त के अनुसार, बजट 2026 तात्कालिक प्रोत्साहन के बजाय निरंतर सुधार और दीर्घकालिक निवेश पर आधारित है, जो टियर-2 और टियर-3 शहरों में नए मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर उभरने का रास्ता खोल सकता है।
धीमी लेकिन मजबूत दिशा
कुल मिलाकर, बजट 2026 भारतीय मैन्युफैक्चरिंग को एक झटके में नहीं, बल्कि स्थिर और रणनीतिक तरीके से वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने की कोशिश करता है। बदलते वैश्विक व्यापार परिदृश्य में यही निरंतरता भारत के लिए सबसे बड़ा हथियार बन सकती है।
