Budget 2026-27: ईवी और रिन्यूएबल एनर्जी पर फोकस, बजट 2026 में बैटरी सेक्टर को राहत
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में जो कदम बताएं हैं वे एनर्जी ट्रांजिशन और सिक्योरिटी पर सरकार के फोकस के हिसाब से हैं। इससे भारतीय इंडस्ट्रीज को इलेक्ट्रिक गाड़ियों, बैटरी स्टोरेज सिस्टम और सोलर पैनल के लिए जरूरी कच्चे माल तक आसानी से पहुंच मिलेगी।
विस्तार
केंद्रीय बजट 2026-27 ने इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) और स्वच्छ ऊर्जा को लेकर सरकार की प्राथमिकताओं को एक बार फिर साफ कर दिया है। किफायती और उच्च गुणवत्ता वाले ईवी को बढ़ावा देने के लिए जहां कच्चे माल और मैन्युफैक्चरिंग पर राहत दी गई है। वहीं ईवी अपनाने को लेकर कुछ अहम योजनाओं के बजट में कटौती ने सवाल भी खड़े किए हैं।
बैटरी और सोलर सेक्टर को बड़ी कस्टम ड्यूटी राहत
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण में एलान किया कि अब बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) में इस्तेमाल होने वाली लिथियम-आयन बैटरियों और सोलर ग्लास निर्माण में उपयोग होने वाले सोडियम एंटीमोनाट पर कस्टम ड्यूटी नहीं लगेगी। सरकार का मानना है कि इस फैसले से इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी स्टोरेज और सोलर पैनल से जुड़ी इंडस्ट्री को जरूरी कच्चा माल सस्ते और आसानी से मिलेगा, जिससे एनर्जी ट्रांजिशन को रफ्तार मिलेगी।
रिन्यूएबल एनर्जी पर रिकॉर्ड खर्च
यह कदम नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के बढ़े हुए बजट के अनुरूप है। मंत्रालय को 2026-27 में 32,911 करोड़ रुपये का आवंटन मिला है, जिसमें से 30,000 करोड़ रुपये से ज्यादा सिर्फ सोलर एनर्जी के लिए रखे गए हैं।यह साफ संकेत है कि सरकार रिन्यूएबल एनर्जी, खासकर सोलर पावर, को भविष्य की ऊर्जा रणनीति का केंद्र मान रही है।
EV और बैटरी इकोसिस्टम पर सरकार का फोकस
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, क्लाइमेट पॉलिसी एक्सपर्ट आरती खोसला, जो क्लाइमेट ट्रेंड्स की डायरेक्टर हैं, का कहना है कि बैटरी मैन्युफैक्चरिंग को दी गई छूट, BESS के लिए वायबिलिटी गैप फंडिंग और कार्बन कैप्चर ग्रांट को मिलाकर देखा जाए, तो सरकार का झुकाव साफ तौर पर एनर्जी ट्रांजिशन इकोसिस्टम बनाने की ओर है।
EV मैन्युफैक्चरिंग को PLI से जबरदस्त बढ़ावा
बजट में ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) (पीएलआई) स्कीम को भी मजबूत किया गया है। 2025-26 में जहां इसका आवंटन 2,818 करोड़ रुपये था, वहीं 2026-27 में इसे बढ़ाकर 5,939 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, बंगलूरू स्थित EV OEM न्यूमेरोस मोटर्स के फाउंडर-सीईओ श्रेयस शिबुलाल का कहना है कि, लिथियम-आयन बैटरी मैन्युफैक्चरिंग और क्रिटिकल मिनरल प्रोसेसिंग पर कस्टम ड्यूटी छूट भारत के ईवी सेक्टर के लिए अहम कदम है। लंबे समय में इससे लागत घटेगी और किफायती, बेहतर क्वालिटी वाले ईवी बनाना आसान होगा।
कहां कमजोर पड़ा बजट?
जहां एक तरफ कच्चे माल पर राहत दी गई है, वहीं दूसरी ओर एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल (ACC) बैटरी स्टोरेज के लिए PLI को घटा दिया गया है। यह स्कीम देश में लिथियम-आयन सेल और बैटरियों के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए लाई गई थी।
आलोचकों का मानना है कि लिथियम-आयन बैटरियों पर कस्टम छूट घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को हतोत्साहित कर सकती है और आयात पर निर्भरता बढ़ा सकती है।
सप्लाई चेन पर ध्यान, लेकिन सपोर्ट सीमित
इंस्टीट्यूट फॉर एनर्जी इकोनॉमिक्स एंड फाइनेंशियल एनालिसिस की साउथ एशिया डायरेक्टर विभूति गर्ग का कहना है कि सरकार ने क्लीन एनर्जी सप्लाई चेन, खासकर रेयर अर्थ मिनरल्स पर ध्यान देने का इरादा जरूर दिखाया है, लेकिन सोलर मॉड्यूल और सेल्स के लिए पीएलआई के तहत बजटीय समर्थन अभी भी सीमित है।
EV अपनाने पर खर्च घटा, चिंता बढ़ी
सबसे बड़ा सवाल EV अपनाने को लेकर है। PM E-DRIVE योजना, जिसे 2024 में FAME-II के बाद लॉन्च किया गया था, को इस बजट में बड़ा झटका लगा है।
2025-26 में जहां इस स्कीम के लिए 4,000 करोड़ रुपये रखे गए थे, वहीं 2026-27 में इसे घटाकर सिर्फ 1,500 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
कुल मिलाकर बजट 2026-27 ईवी और रिन्यूएबल एनर्जी मैन्युफैक्चरिंग को मजबूती देता दिखता है। लेकिन ईवी अपनाने को बढ़ावा देने वाले कदम कमजोर नजर आते हैं। अगर मांग बढ़ाने पर भी उतना ही फोकस नहीं किया गया, तो किफायती ईवी का सपना अधूरा रह सकता है।
