CAG रिपोर्ट में बड़ा खुलासा!: स्थानीयकरण नियम तोड़कर पांच ईवी कंपनियों ने उठाई ₹468 करोड़ की सब्सिडी
संसद में पेश की गई भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में केंद्र सरकार की 'फेम' (FAME) योजना के तहत सब्सिडी वितरण, मूल्य अनुपालन, डेटा प्रबंधन और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के रोलआउट में कई गंभीर खामियों को उजागर किया गया है।
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भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने वाली FAME योजना में सब्सिडी बांटने से लेकर चार्जिंग स्टेशन लगाने और आंकड़ों के रखरखाव तक कई गंभीर खामियां सामने आई हैं। संसद में पेश नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट के मुताबिक, पांच इलेक्ट्रिक वाहन कंपनियों को 467.96 करोड़ रुपये की मांग आधारित सब्सिडी दी गई। जबकि उन्होंने स्थानीयकरण से जुड़े नियमों का पालन नहीं किया था।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कुछ कंपनियों ने ई-स्कूटर की तय कीमत सीमा से बचने के लिए ऑनबोर्ड चार्जर की कीमत वाहन की एक्स-फैक्ट्री कीमत में शामिल नहीं की। इसके अलावा FAME-I के आंकड़ों में भारी गड़बड़ियां, डुप्लीकेट दावों का भुगतान और चार्जिंग स्टेशन परियोजनाओं की बेहद धीमी प्रगति भी सामने आई है।
क्या इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर कंपनियों ने सब्सिडी का लाभ उठाने के लिए नियमों में हेरफेर की?
CAG रिपोर्ट में तीन प्रमुख इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर निर्माताओं द्वारा 1.5 लाख रुपये की प्राइस कैप (अधिकतम मूल्य सीमा) को दरकिनार करने का भी मामला सामने आया है:- प्राइस कैप का उल्लंघन: FAME-II के तहत इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की अधिकतम एक्स-फैक्ट्री कीमत 1.5 लाख रुपये तय की गई थी।
- एक्सेसरी के नाम पर खेल: तीन कंपनियों ने इस लिमिट से बचने के लिए कार/स्कूटर में साथ आने वाले 'ऑनबोर्ड चार्जर' को एक्स-फैक्ट्री कीमत से बाहर कर दिया और उसे अलग से एक्स्ट्रा एक्सेसरी के रूप में बेचा।
- बांटी गई भारी सब्सिडी: इस हेरफेर के बावजूद मंत्रालय ने इन मॉडलों के लिए कंपनियों को 1,418.62 करोड़ रुपये के इंसेंटिव जारी कर दिए।
FAME पोर्टल और डेटा प्रबंधन में किस तरह की गड़बड़ियां पाई गईं?
सीएजी ने कहा कि योजना के पोर्टल और डेटाबेस में भारी विसंगतियों के कारण FAME-I सब्सिडी भुगतानों का सही सत्यापन करना असंभव था:- गायब और विरोधाभासी डेटा: नवंबर 2017 से मार्च 2019 के बीच पोर्टल पर कोई डेटा उपलब्ध नहीं था। होमपेज पर 2,80,830 वाहनों के लिए 359.58 करोड़ रुपये का दावा दिखाया गया। जबकि दूसरे आंकड़े में यह 1,57,256 वाहनों के लिए केवल 201.84 करोड़ रुपये था।
- अजीबोगरीब दावे: एक अलग डेटा डंप में नेगेटिव 423.28 करोड़ रुपये का मांग-प्रोत्साहन दावा दर्ज था।
- भविष्य की तारीख वाले बिल: पोर्टल ने वर्ष 2088 तक की भावी तारीखों वाले वाहन इनवॉइस स्वीकार किए और यहां तक कि डुप्लीकेट (एक ही वाहन पर दो बार) दावों का भी भुगतान कर दिया गया।
ई-वाहनों के लिए स्वीकृत चार्जिंग स्टेशनों का क्या हश्र हुआ?
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास को लेकर रिपोर्ट में बेहद निराशाजनक आंकड़े सामने आए हैं:- सिटीज प्रोजेक्ट: FAME-II के तहत शहरों के लिए मंजूर 2,877 चार्जिंग स्टेशनों में से केवल 148 (लगभग 5 प्रतिशत) ही शुरू हो सके।
- हाईवे और एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट: राजमार्गों के लिए मंजूर सभी 1,576 चार्जिंग स्टेशनों को सुस्त प्रगति के कारण रद्द कर दिया गया। जिससे 12.66 करोड़ रुपये का खर्च बेकार साबित हुआ।
- तेल कंपनियों का प्रोजेक्ट: ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के लिए मंजूर सभी 8,412 चार्जिंग स्टेशन अपनी समय-सीमा पूरा करने में पूरी तरह से नाकाम रहे।
देश में EV मोबिलिटी को बढ़ावा देने वाली विभिन्न योजनाओं की वर्तमान स्थिति क्या है?
संसद में भारी उद्योग मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, देश में इलेक्ट्रिक वाहनों के विस्तार के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं:- FAME-II: 1 अप्रैल 2019 से 31 मार्च 2024 तक 11,500 करोड़ रुपये के बजट वाली इस योजना ने 16.72 लाख ईवी की बिक्री का समर्थन किया। और 31 जुलाई 2026 तक 5,299 ई-बसें तैनात कीं। इसके अलावा 912.50 करोड़ रुपये के बजट से 9,583 सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए गए हैं।
- ऑटो PLI स्कीम: 25,938 करोड़ रुपये के परिव्यय वाली इस योजना ने एडवांस्ड ऑटोमोटिव तकनीक को गति दी है। और इसके तहत 31 मार्च 2026 तक 21.30 लाख ई-वाहन बिके हैं।
- ACC बैटरी स्टोरेज PLI: 18,100 करोड़ रुपये के बजट वाली इस योजना का लक्ष्य 50 GWh घरेलू बैटरी निर्माण क्षमता हासिल करना है। जिसमें से 40 GWh क्षमता चार कंपनियों को आवंटित की जा चुकी है।
- PM E-DRIVE योजना: 29 सितंबर 2024 को 10,900 करोड़ रुपये के बजट के साथ शुरू हुई इस योजना से अब तक 26.59 लाख ई-वाहनों की बिक्री हो चुकी है। इसमें से ई-बसों के लिए आवंटित 4,391 करोड़ रुपये में से 14,000 बसें आवंटित की जा चुकी हैं। जबकि 2,000 करोड़ रुपये चार्जिंग नेटवर्क के लिए रखे गए हैं।
- PM e-Bus Sewa: 3,435.33 करोड़ रुपये की यह योजना 38,000 से अधिक ई-बसों को भुगतान सुरक्षा देती है। और 10 जुलाई 2026 तक 27,555 ई-बसों को कवर कर चुकी है।
- टैक्स और नीतियां: ईवी और चार्जर्स पर जीएसटी घटाकर 5 प्रतिशत किया गया है। वाहनों के लिए ग्रीन नंबर प्लेट अनिवार्य की गई है। और राज्यों को रोड टैक्स खत्म करने का सुझाव दिया गया है। 7 अगस्त 2026 तक देश भर में 67,657 ई-वाहन चार्जर्स (1,139 बैटरी-स्वैपिंग स्टेशन शामिल) लगाए जा चुके हैं।