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CES 2026: क्या अब कारें बन जाएंगी कंप्यूटर? जानिए कैसे बदल रही है आपकी ड्राइविंग की दुनिया

ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुयश पांडेय Updated Sat, 10 Jan 2026 12:12 PM IST
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सार

CES 2026 में यह साफ हो गया है कि कारें अब सिर्फ इंजन और मेटल से बनी मशीनें नहीं रहीं, बल्कि वे तेजी से कंप्यूटर-ऑन-व्हील्स बनती जा रही हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सॉफ्टवेयर और डाटा के मेल ने ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री की दिशा ही बदल दी है।

CES 2026: Are Cars Becoming Computers? How AI and Software Are Redefining the Future of Driving
CES 2026 - फोटो : X
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विस्तार
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लास वेगास में चल रहे दुनिया के सबसे बड़े टेक शो, CES 2026 (कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स शो 2026) में इस बार कुछ अलग ही माहौल है। अब बात सिर्फ चमक-धमक वाले गैजेट्स या स्पेसशिप जैसी दिखने वाली कॉन्सेप्ट कारों की नहीं हो रही है। इस साल स्पॉटलाइट एक नई क्रांति पर है कैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), सॉफ्टवेयर और डाटा मिलकर कारों को एक 'स्मार्ट मशीन' में बदल रहे हैं। यह बदलाव CES 2025 में शुरू हुआ था, लेकिन अब यह पूरी तरह से केंद्र में आ गया है। आइए जानते हैं कि इसका आम ड्राइवरों और आपके लिए क्या मतलब है।
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1. सॉफ्टवेयर-डिफाइंड व्हीकल्स (SDV)

पुरानी सोच को भूल जाइए कि कार सिर्फ लोहे और इंजन से बनी एक मशीन है। भविष्य सॉफ्टवेयर-डिफाइन्ड व्हीकल (SDVs) का है। इसका मतलब है ऐसी कारें जो आपके स्मार्टफोन की तरह अपडेट हो सकेंगी। कल्पना कीजिए कि आपने आज एक कार खरीदी और अगले साल बिना सर्विस सेंटर या शोरूम गए, आपको घर बैठे उसमें नए फीचर्स मिल गए। यही SDV की ताकत है। कार पुरानी नहीं होगी बल्कि समय के साथ और बेहतर होती जाएगी।
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2. एजेंटिक एआई: आपका पर्सनल असिस्टेंट

2025 का सबसे बड़ा शब्द था 'एजेंटिक एआई' और अब यह आपकी कार में आ रहा है। सुनने में यह मुश्किल लग सकता है लेकिन इसका काम बहुत आसान है, बस ऐसा समझिए कार अब आपके लिए सोचेगी। मान लीजिए आपको रास्ते में किसी ऐसे कैफे में रुकना है जहां आउटडोर सीटिंग हो और साथ में ईवी चार्जर भी लगा हो। आपको मैप पर खुद ढूंढने की जरूरत नहीं है। बस अपनी कार को बोलें और वह खुद रूट, स्टॉप और यहां तक कि पार्किंग भी ढूंढ लेगी। यह कार में बैठे एक समझदार असिस्टेंट की तरह है जो आपकी जरूरतों को पहले से समझता है।

3. नेविगेशन ऑन ऑटोपायलट (NOA)

हम अभी मैप्स का इस्तेमाल करते हैं और खुद ड्राइविंग करते हैं। लेकिन नेविगेशन ऑन ऑटोपायलट (NOA) इसे बदल देगा। इसमें कार आपके तय किए गए रूट को फॉलो करेगी, खुद लेन बदलेगी और स्पीड एडजस्ट करेगी। हालांकि यह पूरी तरह से 'सेल्फ-ड्राइविंग' नहीं है, लेकिन यह हाईवे पर ड्राइविंग को बहुत आसान और कम तनावपूर्ण बना देगा।

4. लोकेशन इंटेलिजेंस

इस सबके पीछे जो तकनीक काम कर रही है, वह है लोकेशन इंटेलिजेंस। यह सिर्फ नक्शे देखने के लिए नहीं है, बल्कि रीयल-टाइम फैसले लेने के लिए है। डिलीवरी कंपनियों के लिए इसका मतलब है कि पैकेट सिर्फ पते पर नहीं, बल्कि सही दरवाजे तक पहुंचेगा। आम ड्राइवरों के लिए इसका मतलब है बेहतर रास्ते, कम ट्रैफिक और समय की बचत।
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