Delhi Budget 2025: सड़कों और बसों के लिए बड़ा एलान, जानें कैसे ये बजट आपकी यात्रा को बनाएगा सुगम और आसान
Transport Budget Delhi: दिल्ली सरकार ने 2025-26 वित्तीय वर्ष के लिए बजट आवंटनों में अहम संशोधन किए हैं। इसमें परिवहन, शिक्षा, आवास-शहरी विकास और यमुना पुनरुद्धार जैसे क्षेत्रों में खर्च बढ़ाया गया है। आइए इस बारे में विस्तार से जानें।
विस्तार
दिल्ली सरकार ने परिवहन क्षेत्र को इस बार सबसे ज्यादा फायदा दिया है। बजट अनुमान (BE) के तहत जहां इसके लिए 12,952 करोड़ रुपये रखे गए थे, वहीं संशोधित अनुमान (RE) में इसे बढ़ाकर 16,024 करोड़ रुपये कर दिया गया है। यह बढ़ोतरी इस बात का संकेत देती है कि सरकार सड़क, पुल और ट्रैफिक सुधार से जुड़े कामों को प्राथमिकता दे रही है। इससे आने वाले समय में सड़कों की हालत सुधारी जाएगी, नए पुल और फ्लाईओवर बनाए जाएंगे और ट्रैफिक जाम कम करने पर काम होगा। बेहतर सड़कों से न सिर्फ सफर आसान होगा, बल्कि धूल कम होने से प्रदूषण में भी कुछ राहत मिल सकती है।
सड़कों के सुदृढ़ीकरण पर जोर
सरकार ने सड़कों को मजबूत करने के लिए अलग से 496 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसका मकसद खराब सड़कों की मरम्मत, गड्ढों को भरना और सड़क की गुणवत्ता सुधारना है। अच्छी सड़कें न सिर्फ वाहन चालकों के लिए सुरक्षित होंगी, बल्कि उड़ती धूल कम होने से वायु प्रदूषण में भी कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
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बस सेवाओं को मिलेगा नया दम
दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (DTC) को 653 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि दी गई है। इससे नई बसों की खरीद, पुरानी बसों के रख रखाव और इलेक्ट्रिक बसों के विस्तार पर खर्च किया जाएगा। बेहतर बस सेवाओं से निजी वाहनों पर निर्भरता घटेगी, जिससे ट्रैफिक और प्रदूषण दोनों पर असर पड़ेगा।
मेट्रो नेटवर्क से ट्रैफिक पर लगाम
दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) को 2,117 करोड़ रुपये का अतिरिक्त आवंटन मिला है, जिससे कुल बजट 5,046.66 करोड़ रुपये हो गया है। मेट्रो नेटवर्क के विस्तार और बेहतर संचालन से सड़कों पर वाहनों का दबाव कम होगा, जो ऑटोमोबाइल ट्रैफिक को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाएगा।
आवास और शहरी विकास के लिए भी आवंटन बढ़ाकर 11,754 करोड़ रुपये किया गया है। बेहतर शहरी योजना, नई सड़कें और बेहतर कनेक्टिविटी सीधे तौर पर वाहनों की आवाजाही को आसान होगी। इससे शहर के अंदर और बाहरी इलाकों के बीच ट्रांसपोर्ट नेटवर्क मजबूत हो सकता है।
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पूंजीगत व्यय बढ़ने का क्या मतलब है?
पूंजीगत व्यय को 28,115 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 30,248 करोड़ रुपये किया गया है। इसका मतलब है कि सरकार स्थायी इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे सड़कें, पुल, बस डिपो और ट्रांसपोर्ट सिस्टम पर ज्यादा निवेश कर रही है।