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Hindi News ›   Automobiles News ›   Consumer Forum Orders Insurer to Pay Rs 4.25 Lakh Claim After Stolen Car Claim Rejection Over Keys in Ignition

चाबी गाड़ी में छूटने पर बीमा कंपनी ने खारिज किया कार चोरी का दावा: उपभोक्ता आयोग ने ठोका ₹4.25 लाख का जुर्माना

Thu, 29 Oct 2026 08:15 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Thu, 29 Oct 2026 08:15 PM IST
सार

  • कार चोरी होने के बाद बीमा क्लेम खारिज करना बीमा कंपनी को महंगा पड़ गया।
  • दिल्ली के एक जिला उपभोक्ता आयोग ने कार की चाबी इग्निशन में छोड़ने के आधार पर क्लेम ठुकराने के मामले में बीमा कंपनी को 4.25 लाख रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है।

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Consumer Forum Orders Insurer to Pay Rs 4.25 Lakh Claim After Stolen Car Claim Rejection Over Keys in Ignition
Consumer Commission on Car Theft Claim - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

दिल्ली के एक जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बीमा कंपनियों के मनमाने रवैये पर कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। आयोग ने एक बीमा कंपनी को निर्देश दिया है कि वह पीड़ित कार मालिक को 4.25 लाख रुपये का मुआवजा दे। बीमा कंपनी ने यह तर्क देकर कार चोरी का दावा खारिज कर दिया था कि पीड़ित ने कार की चाबी इग्निशन में ही छोड़ दी थी। उपभोक्ता आयोग ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि नीतिगत शर्तों का केवल तकनीकी उल्लंघन होने मात्र से बीमा कंपनी अपनी जिम्मेदारी से पूरी तरह से नहीं बच सकती। खासकर तब जब कार मालिक की ओर से किसी तरह की लापरवाही या साजिश का सबूत न हो। 

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यह कार चोरी की घटना कब और कैसे हुई थी?

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना 21 सितंबर 2020 की रात को घटी थी:
  • लूट की वारदात: पीड़ित व्यक्ति अपनी कार से घर लौट रहा था, तभी दो से तीन अज्ञात लोगों ने कथित तौर पर उससे कार छीन ली या लूट ली।
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  • FIR और क्लेम: शुरुआत में इस मामले में ई-एफआईआर (e-FIR) दर्ज की गई। बाद में अदालत के हस्तक्षेप पर प्राथमिकी में भारतीय दंड संहिता की अतिरिक्त धाराएं जोड़ी गईं। इसके बाद पीड़ित ने अपनी चोरी हुई कार के लिए बीमा दावा (इंश्योरेंस क्लेम) दर्ज किया।
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  • बीमा कंपनी का इनकार: बीमा कंपनी ने 12 अक्तूबर 2020 को पत्र भेजकर पॉलिसी की शर्त संख्या 5 का हवाला देते हुए क्लेम खारिज कर दिया। कंपनी का कहना था कि इग्निशन में चाबी छोड़ना घोर लापरवाही है और यह सुरक्षा शर्तों का उल्लंघन है।
 

उपभोक्ता आयोग के समक्ष बीमा कंपनी ने क्या-क्या तर्क दिए?

आयोग के समक्ष बीमा कंपनी ने अपनी कार्रवाई को सही ठहराने के लिए कई दलीलें दीं:
  • कंपनी का दावा: इंश्योरेंस कंपनी ने शिकायत को झूठा और बेबुनियाद बताते हुए आरोप लगाया कि कार मालिक ने मुख्य तथ्य छिपाए हैं और वह अनुचित लाभ उठाने की कोशिश कर रहा है।
  • बैंक फाइनेंस का हवाला: कंपनी ने यह भी तर्क दिया कि वाहन एक बैंक के पास हाइपोथिकेटेड (फाइनेंस) था। इसलिए संबंधित बैंक को भी इस कानूनी कार्यवाही में पक्षकार बनाया जाना चाहिए था।
 

उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी के तर्कों को क्यों खारिज कर दिया?

8 अक्तूबर 2026 को आयोग की अध्यक्ष सोनिका मेहोत्रा और सदस्य ऋचा जिंदल व अनिल कुमार की पीठ ने बीमा कंपनी की सभी दलीलों को खारिज कर दिया:
  • तकनीकी उल्लंघन ही काफी नहीं: आयोग ने माना कि बीमाकर्ता पॉलिसी की हर छोटी-मोटी शर्त के उल्लंघन पर स्वतः ही अपनी देनदारी से नहीं भाग सकता। यह देखना जरूरी है कि क्या उल्लंघन उस घटना का मुख्य कारण था या नहीं।
  • साजिश का कोई सबूत नहीं: आयोग ने पाया कि कार पार्किंग स्थल में खड़ी थी और केवल परिस्थितियों के आधार पर चोरी में किसी लापरवाही या सांठगांठ का अनुमान नहीं लगाया जा सकता।
  • आर्थिक व मानसिक उत्पीड़न: आयोग ने यह भी रेखांकित किया कि बीमा कंपनी की अपनी जांच रिपोर्ट में पीड़ित की वित्तीय स्थिति ठीक न होने की बात कही गई थी। क्लेम न मिलने से उसे अत्यधिक मानसिक पीड़ा और नुकसान झेलना पड़ा।
 

कंज्यूमर फोरम ने पीड़ित को कितना मुआवजा देने का आदेश दिया?

दिल्ली उपभोक्ता आयोग ने माना कि पीड़ित का दावा पूरी तरह से वैध था और उसे निम्नलिखित रकम का भुगतान किया जाए:
  • आईडीवी (IDV) राशि: गाड़ी की इंश्योर्ड डिक्लेयर्ड वैल्यू (IDV) के रूप में 4,00,000 रुपये।
  • मानसिक उत्पीड़न व कानूनी खर्च: मानसिक उत्पीड़न, परेशानी और मुकदमेबाजी के खर्च के एवज में 25,000 रुपये।
  • कुल देय राशि: बीमा कंपनी को कुल 4,25,000 रुपये का भुगतान कार मालिक को करना होगा।
 

इस फैसले से वाहन मालिकों और पॉलिसीधारकों को क्या सीख मिलती है?

यह फैसला सभी वाहन चालकों के लिए एक महत्वपूर्ण नजीर पेश करता है:
  • पॉलिसी शर्तों की समझ: हालांकि वाहन मालिकों से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने वाहन की सुरक्षा के लिए उचित सावधानी बरतें। लेकिन केवल तकनीकी आधार पर क्लेम खारिज होने पर बीमा कंपनी के फैसले को कंज्यूमर फोरम में चुनौती दी जा सकती है।
  • जरूरी दस्तावेजों का रखरखाव: वाहन चोरी या क्लेम खारिज होने की स्थिति में पॉलिसी दस्तावेज, एफआईआर, पत्राचार, क्लेम फॉर्म और रिजेक्शन लेटर को संभाल कर रखना चाहिए। ताकि कानूनी लड़ाई के दौरान मजबूत आधार बनाया जा सके।
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