Old Vehicles: नियमों की सख्ती के बावजूद दिल्ली में गाड़ियों का सैलाब, जानें क्या कहते हैं 2026 के ताजा आंकड़े
Delhi Pollution Control Vehicles: दिल्ली में प्रदूषण कम करने के लिए प्रशासन ने 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों पर सख्ती दिखाते हुए अब तक 66.2 लाख से ज्यादा गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया है। इसके बावजूद, राजधानी की सड़कों पर वाहनों का बोझ कम होने के बजाय और बढ़ गया है। ताजा इकोनॉमिक सर्वे के अनुसार, दिल्ली में रजिस्टर्ड वाहनों की संख्या 87.6 लाख के पार पहुंच गई है। इसमें टू-व्हीलर्स का दबदबा बरकरार है। जानिए पिछले कुछ वर्षों में दिल्ली के ऑटोमोबाइल मार्केट में आए उतार-चढ़ाव और निजी वाहनों पर बढ़ती दिल्लीवालों की निर्भरता की पूरी कहानी।
विस्तार
अगर आप दिल्ली की सड़कों पर रोज सफर करते हैं तो आपने ट्रैफिक का हाल जरूर देखा होगा। प्रदूषण पर नियंत्रण पाने के लिए दिल्ली सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए लाखों पुरानी गाड़ियों को सड़कों से बाहर कर दिया है। हाल ही में पेश हुए इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 के मुताबिक, 19 मार्च 2026 तक दिल्ली में 66.2 लाख पुराने वाहनों का रजिस्ट्रेशन रद्द किया जा चुका है। आइए जानते हैं इस रिपोर्ट की खास बातें और दिल्ली की सड़कों का मौजूदा हाल।
क्यों उठाया गया इतना बड़ा कदम?
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के सख्त नियमों के कारण ये कार्रवाई की गई है। नियम के मुताबिक, दिल्ली में 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों को चलाना प्रतिबंधित है। इन पुरानी गाड़ियों की उम्र पूरी हो चुकी थी और ये शहर के प्रदूषण को बढ़ाने में बड़ा रोल निभा रही थीं।
पुरानी गाड़ियां हटीं, फिर भी दिल्ली की सड़कों पर वाहनों का सैलाब
दिल्ली में प्रदूषण कम करने के लिए प्रशासन ने भले ही कमर कस ली हो, लेकिन आंकड़ों की तस्वीर कुछ और ही बयां कर रही है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि 66 लाख से भी ज्यादा पुरानी गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन रद्द कर उन्हें कबाड़ घोषित किए जाने के बावजूद, दिल्ली में वाहनों की कुल संख्या थमने का नाम नहीं ले रही है। 19 मार्च 2026 तक के ताजा आंकड़ों के अनुसार, राजधानी की सड़कों पर अब कुल 87.6 लाख मोटर वाहन दर्ज हैं, जो पिछले साल (2024-25) के 81.2 लाख के मुकाबले 7.9% की बड़ी बढ़त को दर्शाता है।
परिवहन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि जितनी तेजी से पुरानी गाड़ियों को हटाया जा रहा है, लोग उससे कहीं ज्यादा रफ्तार से नए वाहन खरीद रहे हैं। यह ट्रेंड साफ तौर पर दिखाता है कि दिल्लीवासियों के बीच निजी वाहनों का क्रेज और जरूरत दोनों ही लगातार बढ़ते जा रहे हैं।
दिल्ली की सड़कों पर सबसे ज्यादा टू-व्हीलर्स
अगर आप सोच रहे हैं कि दिल्ली की सड़कों पर सबसे ज्यादा किन वाहनों की आवाजाही होती है तो हालिया सर्वे के आंकड़े इस तस्वीर को पूरी तरह साफ कर देते हैं। आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में आज भी टू-व्हीलर्स का एकतरफा राज कायम है। शहर में कुल रजिस्टर्ड वाहनों में मोटरसाइकिल और स्कूटर की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा यानी 68% है, जो इन्हें दिल्लीवासियों के लिए परिवहन का सबसे पसंदीदा साधन बनाता है। वहीं, अगर चार-पहिया वाहनों की बात करें तो कार और जीप जैसे वाहनों की हिस्सेदारी लगभग 24% दर्ज की गई है। यह आंकड़ा साफ करता है कि भले ही कारों की संख्या बढ़ रही हो, लेकिन सड़कों पर असली कब्जा अब भी दो-पहिया वाहनों का ही है।
बढ़ती 'व्हीकल डेंसिटी': हर 1 हजार लोगों पर अब 522 गाड़ियां
दिल्ली में निजी वाहनों पर बढ़ती निर्भरता का अंदाजा शहर की व्हीकल डेंसिटी यानी वाहनों के घनत्व से लगाया जा सकता है। सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि दिल्लीवासी सार्वजनिक परिवहन के बजाय अपनी निजी सवारी को ज्यादा तवज्जो दे रहे हैं। जहां साल 2024-25 में दिल्ली में हर 1 हजार लोगों पर गाड़ियों का औसत 484 था, वहीं महज एक साल के भीतर 2025-26 में यह आंकड़ा बढ़कर 522 पर पहुंच गया है। यह उछाल साफ तौर पर दर्शाता है कि राजधानी की सड़कों पर गाड़ियों का दबाव और लोगों की अपनी गाड़ी रखने की चाहत दोनों ही तेजी से बढ़ रही है।
बीते वर्षों का उतार-चढ़ाव
अगर पिछले कुछ वर्षों के रुझानों पर नजर डालें तो दिल्ली में वाहनों की संख्या का ग्राफ काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। साल 2016 से 2020 के बीच गाड़ियों की तादाद में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई थी, लेकिन 2021-22 में इसमें एक बड़ा गोता देखने को मिला। कोविड-19 महामारी के असर और पुरानी गाड़ियों के बड़े पैमाने पर रजिस्ट्रेशन रद्द होने के कारण वाहनों का कुल आंकड़ा गिरकर 79.2 लाख पर आ गया था। हालांकि, इसके बाद के वर्षों में ऑटोमोबाइल मार्केट ने जबरदस्त रिकवरी की और 2025-26 तक आते-आते इसमें एक बार फिर जोरदार उछाल दर्ज किया गया।
सर्वे का एक और महत्वपूर्ण पहलू पब्लिक ट्रांसपोर्ट की धीमी रफ्तार है। रिपोर्ट के अनुसार, जहां मालवाहक और निजी यात्री वाहनों की श्रेणी में अच्छी ग्रोथ हुई है, वहीं बस और टैक्सी जैसे सार्वजनिक परिवहन के साधनों में निजी गाड़ियों जैसी तेजी देखने को नहीं मिली है। यह संकेत देता है कि दिल्ली में लोग अब भी साझा परिवहन के मुकाबले अपनी निजी सवारी को ही प्राथमिकता दे रहे हैं।