Car Delivery: नई कार की डिलीवरी लेने जा रहे हैं? ये 'प्री-डिलीवरी इंस्पेक्शन' चेकलिस्ट करेगी आपकी हर टेंशन दूर
Car Inspection Checklist: नई कार लेना सभी के लिए रोमांचक होता है। लेकिन इस खुशी के चक्कर में कई बार हम कार की ठीक से जांच नहीं कर पाते। ऐसे में आपको सावधान रहने की जरूरत है। शोरूम से कार बाहर निकालने से पहले उसका सही तरीके से प्री-डिलीवरी इंस्पेक्शन (PDI) करना बहुत जरूरी है, ताकि बाद में कोई दिक्कत न आए। इस लेख में दिए कुछ आसान तरीकों से आप शोरूम पर ही कार के एक्सटीरियर, इंटीरियर और फीचर्स को चेक करके बिना किसी परेशानी के अपनी नई कार घर ले जा सकते हैं।
विस्तार
नई कार की डिलीवरी लेना पूरे खरीदारी के सफर का सबसे रोमांचक पल होता है। लेकिन, ये वो समय भी है जब आपको सबसे ज्यादा सावधान रहने की जरूरत होती है। कार को अपने नाम पर रजिस्टर कराने और घर ले जाने से पहले डीलरशिप पर उसकी अच्छे से जांच करना बहुत जरूरी है। अगर इस समय कोई कमी छूट जाए तो बाद में उसे ठीक कराना डीलरशिप के स्तर पर मुश्किल हो जाता है। इसलिए, कार की चाबी हाथ में लेने से पहले इन आसान टिप्स की मदद से अपनी कार को अच्छी तरह चेक करें:
1. बाहर से करें कार की जांच
नई कार की बाहरी जांच हमेशा दिन की प्राकृतिक रोशनी में करनी चाहिए, ताकि कोई भी बारीकी आपकी नजरों से न बचे। शुरुआत कार के पेंट से करें, ध्यान से देखें कि पूरी बॉडी पर कहीं कोई खरोंच, डेंट या पेंट के रंग में कोई फर्क तो नहीं है। इसके अलावा, कार के दरवाजों और बॉडी पैनल के बीच का गैप हर जगह एक समान होना चाहिए। इसके बाद बंपर, छत, डिग्गी और सभी शीशों पर अच्छी तरह नजर डालें कि कहीं कोई डैमेज न हो। आखिर में, कार की सभी लाइट्स को भी जरूर चेक करें ताकि यह पक्का हो सके कि उनके अंदर कोई नमी या पानी तो जमा नहीं है।
2. टायर और पहिए की जांच
कार के बाहरी हिस्से के बाद उसके टायरों और पहियों की जांच करना भी बेहद जरूरी है। शोरूम पर सभी टायरों की कंडीशन, उनका सही साइज और उन पर लिखी मैन्युफैक्चरिंग डेट जरूर चेक कर लें। इसके अलावा, इस बात पर भी खास ध्यान दें कि कार के एलॉय व्हील या व्हील कवर बिल्कुल नए हों और उन पर किसी तरह का कोई डैमेज या खरोंच न लगी हो।
3. स्पेयर व्हील और टूलकिट
कार के बाहरी हिस्से और टायरों की जांच के बाद, डिग्गी को खोलकर चेक करना भी उतना ही अहम है। तसल्ली कर लें कि वहां स्पेयर टायर (स्टेपनी), कार उठाने वाला जैक और टूलकिट अपनी सही जगह पर और बिल्कुल अच्छी कंडीशन में रखे हुए हैं। इसके साथ ही, यह भी जरूर चेक कर लें कि डिग्गी खोलने पर अंदर की लाइट ठीक से जल रही हो।
4. इंटीरियर और केबिन
कार के अंदर बैठें और सीटों की कंडीशन व अपहोल्स्ट्री (सीट कवर आदि) की क्वालिटी चेक करें। डैशबोर्ड और दरवाजों के प्लास्टिक पैनल सही से फिट होने चाहिए। सभी बटन, स्विच और स्टोरेज स्पेस को खोल-बंद करके देखें कि वे आराम से काम कर रहे हैं या नहीं।
5. इलेक्ट्रॉनिक्स और फीचर्स
कार के अंदर बैठकर सबसे पहले इग्निशन ऑन करें और तसल्ली से सभी इलेक्ट्रॉनिक फीचर्स को टेस्ट करें। शुरुआत इन्फोटेनमेंट सिस्टम (टचस्क्रीन), ब्लूटूथ कनेक्टिविटी और ऑडियो सिस्टम को चलाकर करें। इसके बाद सभी दरवाजों की पावर विंडो, बाहर के शीशे, सनरूफ और एयर कंडीशनिंग को भी ऑन-ऑफ करके चेक करना जरूरी है कि वे ठीक से काम कर रहे हैं या नहीं। इन सबके साथ ही, स्टीयरिंग के सामने वाले मीटर (इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर) पर भी खास नजर रखें और सुनिश्चित करें कि कार स्टार्ट होने के बाद वहां कोई फालतू वॉर्निंग लाइट तो नहीं जल रही है।
6. सभी लाइट्स की जांच
कार के बाहर की सभी लाइट्स जलाकर चेक करें। इनमें हेडलाइट्स, DRLs, इंडिकेटर, ब्रेक लाइट, रिवर्स लाइट और फॉग लैंप्स शामिल हैं। ये सभी ठीक से काम करने चाहिए।
7. बोनट के नीचे
बोनट खोलकर देखें कि कहीं से कोई तरल पदार्थ लीक तो नहीं हो रहा। कोई तार ढीला या कटा हुआ नहीं होना चाहिए। इंजन के फ्लूइड लेवल और बैटरी की कंडीशन पर भी नजर डालें।
8. ओडोमीटर रीडिंग
मीटर में देखें कि कार कितनी चली हुई है। नई कार आमतौर पर 50 किलोमीटर से कम चली होती है। अगर मीटर में रीडिंग इससे ज्यादा है, तो डीलर से इसका स्पष्ट कारण जरूर पूछें।
9. जरूरी कागजात
कार का VIN (व्हीकल आइडेंटिफिकेशन नंबर) आपके सभी कागजातों से मैच होना चाहिए। इसके अलावा बिल, इंश्योरेंस, रजिस्ट्रेशन (आरसी) और वारंटी के पेपर्स की हर डिटेल अच्छे से चेक कर लें ताकि कोई स्पेलिंग मिस्टेक या गलती न हो।
10. एक्सेसरीज
कार बुक करते समय आपने जो भी एक्स्ट्रा एक्सेसरीज लगवाने के लिए कहा था, उन्हें बुकिंग स्लिप से मिला लें और चेक करें कि कुछ छूटा तो नहीं है।