Electric Vehicles: कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, क्या ईवी की तरफ बढ़ रहा है भारत का रुझान?
ईरान युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा कीमतों में आई भारी तेजी अब भारतीय कार खरीदारों को इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की ओर मोड़ने लगी है। क्योंकि पेट्रोल और सीएनजी की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी को लेकर चिंताएं बढ़ती जा रही हैं।
विस्तार
ईरान युद्ध के चलते वैश्विक ऊर्जा कीमतों में तेज उछाल आया है, जिसका असर अब भारत के ऑटो बाजार पर भी दिखने लगा है। पेट्रोल और सीएनजी के संभावित दाम बढ़ने की आशंका के बीच ग्राहक इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) की तरफ तेजी से रुख कर रहे हैं।
पिछले दो हफ्तों में ईवी के प्रति लोगों की पूछताछ में साफ बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसी दौरान कच्चे तेल की कीमतों में 22 प्रतिशत और प्राकृतिक गैस की कीमतों में 7-10 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है।
क्या भारत में अभी तक ईंधन कीमतें बढ़ी हैं?
अभी तक भारत ने पेट्रोल और सीएनजी की कीमतों में सीधा इजाफा नहीं किया है। केवल प्रीमियम पेट्रोल और इंडस्ट्रियल डीजल की कीमतों में सीमित बढ़ोतरी हुई है।
हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो यह स्थिति लंबे समय तक टिकाऊ नहीं होगी।
कच्चे तेल की कीमतों में कितना उछाल आया है?
23 मार्च की सुबह ब्रेंट क्रूड की कीमत 112 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। जो 28 फरवरी से शुरू हुए युद्ध के बाद करीब 60 प्रतिशत की बढ़ोतरी दिखाती है।
इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) ने इसे 1970 के दशक के बाद का सबसे बड़ा ऊर्जा संकट बताया है।
दुनिया और भारत में क्या फर्क देखने को मिल रहा है?
अमेरिका, जापान, चीन, ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में मार्च की शुरुआत से ही पेट्रोल की कीमतें बढ़ा दी गई हैं।
इसके उलट भारत ने अभी तक कीमतों को स्थिर रखा है, लेकिन यह स्थिति ज्यादा समय तक बरकरार रहना मुश्किल हो सकता है।
क्या ऑटो कंपनियां भी बदलाव महसूस कर रही हैं?
ऑटो कंपनियों और डीलर्स ने ईवी के प्रति बढ़ती दिलचस्पी की पुष्टि की है।
टाटा मोटर्स के अनुसार, पिछले हफ्ते ईवी के लिए ग्राहकों की संख्या और डीलरशिप पर फुटफॉल दोनों में बढ़ोतरी देखी गई है।
क्या आंकड़े भी इस ट्रेंड का समर्थन करते हैं?
मार्च के पहले तीन हफ्तों में ही 10,370 इलेक्ट्रिक कारों का रजिस्ट्रेशन हो चुका है। जो मार्च 2025 के कुल आंकड़े (12,356) का लगभग 85 प्रतिशत है।
इससे साफ है कि यह सेगमेंट इस साल नए रिकॉर्ड बना सकता है।
क्या ईंधन कीमतों की चिंता EV की मांग बढ़ा रही है?
बिल्कुल, 2024 से पेट्रोल लगभग 100 रुपये प्रति लीटर के आसपास स्थिर रहा है। लेकिन अब संभावित बढ़ोतरी की खबरें लोगों के खरीदारी फैसलों को प्रभावित कर रही हैं।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि जैसे ही ईंधन महंगा होने की आशंका बढ़ती है, लोग सस्ते विकल्प यानी ईवी की तरफ झुकते हैं।
क्या ईवी महंगे होने के बावजूद फायदेमंद हैं?
हालांकि ईवी की शुरुआती कीमत पेट्रोल कारों से 70-75 प्रतिशत ज्यादा होती है। लेकिन इनके रनिंग कॉस्ट 80 प्रतिशत तक कम होते हैं।
साथ ही, आसान फाइनेंसिंग ऑप्शंस इन्हें और ज्यादा किफायती बना रहे हैं।
क्या कंपनियां ऑफर्स भी दे रही हैं?
कंपनियां ईवी की बिक्री बढ़ाने के लिए आकर्षक ऑफर्स दे रही हैं।
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VinFast ने “गैस के बदले बिजली” स्कीम शुरू की है
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VF7 मॉडल पर 2.14 लाख रुपये तक के डिस्काउंट और एक्सचेंज बोनस
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बायबैक गारंटी और फ्री चार्जिंग जैसी सुविधाएं
वहीं BYD के अनुसार, फेस्टिव सीजन और वित्तीय वर्ष के अंत से पहले मिलने वाले फायदे भी मांग बढ़ा रहे हैं।
कुल मिलाकर क्या संकेत मिल रहे हैं?
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और संभावित ईंधन महंगाई भारत में ईवी अपनाने की रफ्तार तेज कर सकती हैं।
ऐसे में ईवी अब सिर्फ एक विकल्प नहीं, बल्कि भविष्य की जरूरत बनते जा रहे हैं। खासतौर पर तब, जब ईंधन बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।