भारत में हाईवे यात्रा के दौरान FASTag (फास्टैग) अब एक जरूरी सिस्टम बन चुका है। यह एक RFID टैग होता है जो गाड़ी की विंडस्क्रीन पर लगाया जाता है। इससे टोल प्लाजा से गुजरते ही टोल शुल्क अपने आप कट जाता है,।जिससे लंबी कतारों और इंतजार से छुटकारा मिलता है। साथ ही हर ट्रांजैक्शन की जानकारी भी एसएमएस के जरिए तुरंत मिलती है।
FASTag: फास्टैग के नियम समझें, हाईवे यूजर्स के लिए 5 जरूरी बातें, अतिरिक्त टोल शुल्क से ऐसे बचें
हालांकि ज्यादातर लोग फास्टैग का नियमित रूप से इस्तेमाल करते हैं, फिर भी कई ऐसी जरूरी बातें हैं जिनके बारे में बहुत से यूजर्स को अब भी जानकारी नहीं है। इन बातों को जानने से आप अतिरिक्त शुल्कों से बच सकते हैं और इस सिस्टम का बेहतर इस्तेमाल कर सकते हैं।
क्या FASTag का एनुअल पास महंगा हो गया है?
हां, 2026-27 वित्त वर्ष के लिए फास्टैग वार्षिक पास की कीमत बढ़ाकर 3,075 रुपये कर दी गई है। यह पास एक साल या 200 टोल क्रॉसिंग तक वैध रहता है।
एक बार भुगतान करने के बाद यह पास आपके मौजूदा फास्टैग पर एक्टिव हो जाता है। यह विकल्प खासकर उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो रोजाना हाईवे का इस्तेमाल करते हैं।
क्या FASTag लगाने का सही तरीका जरूरी है?
बिल्कुल, फास्टैग का सही प्लेसमेंट बहुत जरूरी है। इसे गाड़ी के फ्रंट विंडस्क्रीन के अंदर सही जगह पर लगाना चाहिए।
अगर टैग स्कैन नहीं होता है, तो आपको दोगुना टोल देना पड़ सकता है। यह नियम सिस्टम के दुरुपयोग को रोकने और ट्रैफिक को सुचारु बनाए रखने के लिए बनाया गया है।
क्या रोड कंस्ट्रक्शन के दौरान टोल कम हो जाता है?
हां, जब किसी हाईवे पर निर्माण या विस्तार का काम चल रहा होता है, तो टोल शुल्क आमतौर पर 50 प्रतिशत तक कम कर दिया जाता है।
यह सुविधा यात्रियों को होने वाली असुविधा, जैसे डायवर्जन, देरी और खराब रास्तों को ध्यान में रखते हुए दी जाती है।
FASTag काम न करे तो क्या करें?
अगर आपका फास्टैग काम नहीं करता या आप बिना फास्टैग वाली लेन में चले जाते हैं, तो आपको ज्यादा शुल्क देना पड़ता है।
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कैश देने पर: दोगुना टोल
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UPI से भुगतान करने पर: सामान्य टोल का 1.25 गुना
इसलिए ऐसी स्थिति में UPI पेमेंट एक बेहतर बैकअप विकल्प साबित होता है।