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Hindi News ›   Automobiles News ›   Delhi EV Policy 2026-30: Auto Industry Flags Concerns Over 2028 Petrol Bike Ban

Delhi EV Policy: 2028 से पेट्रोल टू-व्हीलर बैन प्रस्ताव पर ऑटो कंपनियां चिंतित, जानें क्यों उठाए बड़े सवाल

ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Jagriti Updated Mon, 27 Apr 2026 10:49 AM IST
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सार

Petrol two wheeler ban Delhi: दिल्ली सरकार की नई ईवी पॉलिसी 2026-2030 का ड्राफ्ट सामने आते ही ऑटो सेक्टर में हलचल तेज हो गई है। ये पॉलिसी राजधानी में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के मकसद से लाई जा रही है, लेकिन इसके सख्त प्रावधानों ने कंपनियों ने चिंता बढ़ा दी है। जानें क्यों ऑटोमेकर कंपनियां इस पॉलिसी को लेकर चिंता में हैं...
 

Delhi EV Policy 2026-30: Auto Industry Flags Concerns Over 2028 Petrol Bike Ban
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : adobe stock
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विस्तार

Auto industry reaction EV policy: पॉलिसी के अनुसार एक अप्रैल 2028 के बाद दिल्ली में नए पेट्रोल और डीजल टू-व्हीलर का रजिस्ट्रेशन बंद कर दिया जाएगा। यानी उस तारीख के बाद सिर्फ इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर ही खरीदे जा सकेंगे। वहीं 2027 से नए थ्री-व्हीलर भी केवल इलेक्ट्रिक ही होंगे, जिसमें डिलीवरी और एग्रीगेटर फ्लीट भी शामिल हैं। इस पॉलिसी की खबर सुनते ही जहां एक ओर ओला और एथर जैसी कंपनियां खुश हैं, वहीं दूसरी तरफ पारंपरिक ऑटोमेकर्स का मानना है कि बुनियादी ढांचा तैयार हुए बिना ऐसा करना ग्राहकों और कंपनियों दोनों के साथ अन्याय होगा।
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कंपनियों का क्या कहना है?
कंपनियों का तर्क है कि इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल्स अभी भी अपने शुरुआते दौर में है। खासकर हाई-परफॉर्मेंस और लंबी रेंज वाली बाइक्स। इनमें ईवी में विकल्प तो हैं, लेकिन या तो वो महंगे या फिर बाजार में मौजूद नहीं है। ऐसे में सिर्फ कुछ साल यानी 2028 तक पेट्रोल टू- व्हीलर्स को पूरी तरह बंद करना ग्राहकों से उनकी पसंद को छीनना जैसा हो सकता है।
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इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना किसकी जिम्मेदारी?
इसके अलावा पॉलिसी का एक प्रावधान कहता है कि हर डीलर को अपने पास कम से कम एक पब्लिक चार्जिंग स्टेशन लगाना होगा। कंपनियों का तर्क है कि इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करना सरकार की जिम्मेदारी होनी चाहिए। मैन्युफैक्चरर्स पर यह बोझ डालने से गाड़ियों की कीमतें और बढ़ सकती हैं। जिसका असर ग्राहकों के जेब पर पड़ेगा।

 वहीं, ऑटो इंडस्ट्री लंबे समय से हाइब्रिड गाड़ियों को ब्रिज टेक्नोलॉजी में देखने की मांग कर रही हैं, लेकिन दिल्ली की नई पॉलिसी केवल सिर्फ ईवी पर ही फोकस कर रही है। ऐसे में कंपनियों का मानना है कि अचानक स्विच करने के बजाय हाइब्रिड एक बेहतर विकल्प हो सकता है। जहां एक तरफ सरकार 30 लाख रुपये तक ही इलेक्ट्रिक कारों पर 100 प्रतिशत रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस माफ करने का लालच दे रही है, वहीं दूसरी तरफ पेट्रोल गाड़ियों पर बैन की तैयारी भी हो सकती है। इंडस्ट्री इसे कैरेट एंड स्टिक यानी की लालच और सजा की नीति कह रही है।

किसको क्या होगा असर?
ऑटो कंपनियाें के अनुसार इससे बजाज, हीरो मोटोकॉर्प, टीवीएस और होंडा जैसी गाड़ियां, जो सिर्फ अभी भी ICE (पेट्रोल) इंजन पर निर्भर हैं, उनके लिए समस्या हो सकती है। वहीं, ईवी कंपनियां जैसे ओला इलेक्ट्रिक, एथर एनर्जी और कार सेगमेंट में टाटा मोटर्स जैसी कंपनियां जो पहले ही ईवी में नाम बना चुकी हैं, उनके लिए यह पॉलिसी काफी मददगार साबित हो सकती है।

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