Iron Battery: लिथियम से 80 गुना सस्ती बैटरी? चीन की नई तकनीक से ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा बदलाव संभव
पिछले कुछ वर्षों से, लिथियम-आयन बैटरियां वैश्विक नवीकरणीय ऊर्जा इकोसिस्टम की रीढ़ रही हैं। जो इलेक्ट्रिक वाहनों और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों को ऊर्जा प्रदान करती हैं। जब लिथियम-आयन बैटरियों को सस्ता और बेहतर बनाने पर लाखों खर्च किए जा रहे हैं, तब चीन ने इसके समानांतर ही 'ऑल-आयरन फ्लो बैटरी' विकसित करने का काम किया है।
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पिछले कुछ वर्षों से लिथियम-आयन बैटरियां इलेक्ट्रिक वाहनों और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसों की रीढ़ बनी हुई हैं। लेकिन उनकी लागत और सीमित जीवनकाल जैसी चुनौतियां लगातार बनी हुई हैं।
इसी बीच, चीन के वैज्ञानिकों ने ‘ऑल-आयरन फ्लो बैटरी’ तकनीक में बड़ी प्रगति की है> जो भविष्य में लिथियम बैटरियों का किफायती विकल्प बन सकती है।
आयरन बैटरी इतनी खास क्यों मानी जा रही है?
नई तकनीक के अनुसार, आयरन-आधारित बैटरियां लिथियम बैटरियों की तुलना में काफी सस्ती हो सकती हैं।
लोहे जैसे सस्ते और आसानी से उपलब्ध मटेरियल का इस्तेमाल इन्हें बड़े स्तर पर उपयोग के लिए उपयुक्त बनाता है।
साथ ही, इनमें पानी-आधारित इलेक्ट्रोलाइट का इस्तेमाल होता है, जो इन्हें ज्यादा सुरक्षित भी बनाता है।
पहले इस तकनीक में क्या समस्या थी?
अब तक ऑल-आयरन फ्लो बैटरियों की सबसे बड़ी समस्या उनकी कम स्थिरता और जल्दी खराब होना था।
बैटरी के अंदर रासायनिक असंतुलन के कारण इसकी क्षमता तेजी से घट जाती थी, जिससे इसका उपयोग सीमित हो जाता था।
नए शोध में क्या सफलता मिली है?
चीनी विज्ञान अकादमी के तहत वैज्ञानिकों ने इस समस्या का समाधान खोजने का दावा किया है।
उन्होंने एक नया और अधिक स्थिर इलेक्ट्रोलाइट विकसित किया है, जो हजारों चार्ज-डिस्चार्ज साइकिल के बाद भी क्षमता को लगभग बनाए रखता है।
यह उपलब्धि बैटरी की उम्र और भरोसेमंद प्रदर्शन को काफी बढ़ा सकती है।
यह बैटरी कैसे काम करती है?
ऑल-आयरन फ्लो बैटरियां लोहे और पानी-आधारित इलेक्ट्रोलाइट पर निर्भर करती हैं।
यह तकनीक सस्ती है और बड़े स्तर पर ऊर्जा स्टोरेज के लिए उपयुक्त मानी जा रही है।
हालांकि, अब तक इसकी स्थिरता की समस्या के कारण इसका व्यापक उपयोग नहीं हो पाया था।
इस सफलता के पीछे क्या तकनीक है?
वैज्ञानिकों ने ‘सिनर्जिस्टिक डिजाइन’ नामक रणनीति का उपयोग किया है।
इसमें एक विशेष आयरन कंप्लेक्स तैयार किया गया, जो बैटरी के अंदर सुरक्षा कवच की तरह काम करता है और रासायनिक प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित करता है।
यह तकनीक बैटरी के सक्रिय पदार्थ को खराब होने से बचाती है और उसकी कार्यक्षमता को लंबे समय तक बनाए रखती है।
क्या यह ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकता है?
अगर यह तकनीक बड़े स्तर पर सफल होती है, तो यह ऊर्जा भंडारण के क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती है।
कम लागत और लंबी उम्र के कारण यह नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को और बढ़ावा दे सकती है।
यह इलेक्ट्रिक वाहनों और अन्य डिवाइसों के लिए भी एक सस्ता और टिकाऊ विकल्प बन सकती है।

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