Delhi EV: दिल्ली ईवी नीति का रुख सख्त, क्या डिलीवरी-राइड एग्रीगेटर फ्लीट में पेट्रोल-डीजल वाहन नहीं जुड़ेंगे?
दिल्ली सरकार द्वारा जारी ईवी नीति के मसौदा के अनुसार, इस साल से दिल्ली में डिलीवरी और राइड एग्रीगेटर फ़्लीट्स में पेट्रोल और डीजल वाली गाड़ियां अब और शामिल नहीं की जाएंगी। जानें पूरी डिटेल्स।
विस्तार
दिल्ली सरकार की ड्राफ्ट इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) नीति 2026-2030 के अनुसार, इस वर्ष 1 जनवरी से डिलीवरी और राइड एग्रीगेटर फ्लीट में पेट्रोल और डीजल से चलने वाले नए वाहनों को शामिल नहीं किया जाएगा।
ड्राफ्ट नीति में क्या स्पष्ट किया गया है?
ड्राफ्ट नीति में प्रस्ताव रखा गया है कि “पेट्रोल या डीजल पर चलने वाले पारंपरिक इंटरनल कंबशन इंजन (ICE) वाहनों को एग्रीगेटर और डिलीवरी सेवा प्रदाताओं द्वारा संचालित टू-व्हीलर और हल्के मालवाहक वाहनों के मौजूदा फ्लीट में शामिल नहीं किया जाएगा।”
क्या BS-VI टू-व्हीलर को अस्थायी छूट मिलेगी?
हालांकि, BS-VI उत्सर्जन मानक वाले टू-व्हीलर को 31 दिसंबर 2026 तक एग्रीगेटर फ्लीट में शामिल करने की अनुमति दी जाएगी। इसके बाद पूरी तरह से इलेक्ट्रिक वाहनों पर शिफ्ट होना अनिवार्य होगा।
इलेक्ट्रिक ऑटो-रिक्शा के लिए क्या प्रावधान हैं?
नीति में इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर, खासकर ऑटो-रिक्शा के लिए प्रोत्साहन की घोषणा की गई है।
नई नीति लागू होने के बाद पहले वर्ष में 50,000 रुपये, दूसरे वर्ष में 40,000 रुपये और तीसरे वर्ष में 30,000 रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी।
क्या यह प्रोत्साहन किन वाहनों पर लागू होगा?
यह प्रोत्साहन पुराने CNG ऑटो-रिक्शा को बदलने के साथ-साथ दिल्ली में नए पंजीकृत ऑटो-रिक्शा पर भी लागू होगा।
2027 से क्या बड़ा बदलाव होगा?
ड्राफ्ट के अनुसार, 1 जनवरी 2027 से राजधानी में केवल इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर (ऑटो-रिक्शा सहित) के नए पंजीकरण की अनुमति होगी।
सरकार का मुख्य उद्देश्य क्या है?
ये प्रावधान उन वाहनों पर केंद्रित हैं जो सबसे ज्यादा उपयोग में आते हैं, जैसे टू-व्हीलर, थ्री-व्हीलर और मालवाहक वाहन। ये वाहन रोजाना ज्यादा चलते हैं और प्रदूषण में बड़ी भूमिका निभाते हैं, इसलिए इन पर विशेष ध्यान दिया गया है।
क्या मौजूदा नियमों में कोई बदलाव होगा?
ड्राफ्ट नीति में यह भी स्पष्ट किया गया है कि दिल्ली मोटर व्हीकल एग्रीगेटर और डिलीवरी सर्विस प्रोवाइडर स्कीम (2023) के अन्य प्रावधान पहले की तरह लागू रहेंगे।
एग्रीगेटर फ्लीट और ऑटो-रिक्शा जैसे हाई-यूज सेगमेंट को लक्षित करके यह नीति इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को तेजी से बढ़ावा देने का प्रयास करती है, जिससे शहर में प्रदूषण के स्तर को कम किया जा सके।