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Report: भारत में तेजी से बढ़ेंगी इलेक्ट्रिक बसें, जानें कैसे 2035 तक पब्लिक परिवहन का मुख्य हिस्सा होंगी ईवी
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Jagriti
Updated Fri, 15 May 2026 05:38 PM IST
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सार
Electric Bus India: भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी अब सिर्फ निजी गाड़ियों तक सीमित नहीं रही। आने वाले वर्षों में सार्वजनिक परिवहन में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में इलेक्ट्रिक बसों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ेगा और FY35 तक पब्लिक ट्रांसपोर्ट में ईवी की हिस्सेदारी 85% से ज्यादा हो सकती है। जानिए रिपोर्ट के बारे में विस्तार से...
इलेक्ट्रिक बस और ट्रक
- फोटो : एआई
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विस्तार
E-Bus Growth India: केपीएमजी की नई रिपोर्ट के अनुसार, भारत में इलेक्ट्रिक बसों का इस्तेमाल आने वाले वर्षों में तेजी से बढ़ने वाला है। FY26 में करीब 7 प्रतिशत ई-बस अपनाने की दर FY35 तक 35-40% पहुंच सकती है। सरकार की योजनाएं, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और बढ़ती मांग इस बदलाव को गति देंगे। केपीएमजी का कहना है कि यह ग्रोथ मुख्य रूप से सरकारी नीति समर्थन, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार, बेहतर ऑपरेटिंग कॉस्ट और और बढ़ती आर्थिक व्यवहार्यता की वजह से संभव होगी।
ईवी का बढ़ रहा दबदबा
रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले वर्षों में सबसे बड़ा बदलाव सार्वजनिक परिवहन में देखने को मिल रहा है। फिलहाल जहां पब्लिक ट्रांसपोर्ट में ईवी पेनेट्रेशन करीब 14% है, वहीं FY35 तक इसके 85% से ज्यादा होने की उम्मीद जताई गई है। सरकार की पीएम ई-बस सेवा या पीएम ई-ड्राइव योजनाएं इन बदलाव को तेज करने में बड़ी भूमिका निभा रही हैं।
शहरों के अंदर सबसे पहले दिखेगा बदलाव
रिपोर्ट में कहा गया है कि इलेक्ट्रिक बसों का सबसे तेज विस्तार इंट्रा-सिटी यानी शहर के अंदर चलने वाले परिवहन में होगा। इसके बाद इंटर-सिटी रूट्स पर भी ई-बसों का इस्तेमाल बढ़ेगा। टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी आने वाले वर्षों में बड़े स्तर पर ई-बस नेटवर्क तैयार किए जा सकते हैं।
अब तक कितनी E-Bus अलॉट हुईं?
रिपोर्ट की मानें तो अब तक करीब 62,000 इलेक्ट्रिक बसों के टेंडर जारी हुए, इनमें से लगभग 46,000 बसें अलॉट की जा चुकी हैं हालांकि, सड़कों पर अभी भी सीमित संख्या में ही ई-बसें चल रही हैं। मार्च 2026 तक लगभग 16,300 इलेक्ट्रिक बसें ही ऑपरेशन में थीं। वहीं, रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि FY30 तक करीब 40,000 और इलेक्ट्रिक बसों के टेंडर जारी हो सकते हैं। इस विस्तार में छोटे शहरों को भी शामिल किया जाएगा, जिससे ईवी आधारित सार्वजनिक परिवहन देशभर में तेजी से फैल सकेगा।
सप्लाई चेन पर चीन की निर्भरता चिंता
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इलेक्ट्रिक बस सेक्टर में सप्लाई चेन अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। खासतौर पर लिथियम-आयन सेल, दुर्लभ-मृदा चुंबक और अर्धचालक जैसे महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स के लिए चीन पर निर्भरता बनी हुई है। इससे सेक्टर में जोखिम भी बढ़ता है।
सरकार कैसे कम कर रही निर्भरता?
घरेलू मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने के लिए सरकार कई योजनाओं पर काम कर रही है, जिनमें PLI योजना, चरणबद्ध विनिर्माण कार्यक्रम (PMP), भारत सेमीकंडक्टर मिशन और राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन शामिल हैं। इनका उद्देश्य भारत में EV सप्लाई चेन को मजबूत बनाना है। केपीएमजी का मानना है कि आने वाला दशक भारत के इलेक्ट्रिक पब्लिक ट्रांसपोर्ट सेक्टर के लिए निर्णायक साबित होगा। अगर चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, लोकल मैन्युफैक्चरिंग, फाइनेंसिंग मॉडल और स्किल्ड वर्कफोर्स पर तेजी से काम किया गया, तो भारत दुनिया के सबसे बड़े इलेक्ट्रिक पब्लिक ट्रांसपोर्ट मार्केट्स में शामिल हो सकता है।
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ईवी का बढ़ रहा दबदबा
रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले वर्षों में सबसे बड़ा बदलाव सार्वजनिक परिवहन में देखने को मिल रहा है। फिलहाल जहां पब्लिक ट्रांसपोर्ट में ईवी पेनेट्रेशन करीब 14% है, वहीं FY35 तक इसके 85% से ज्यादा होने की उम्मीद जताई गई है। सरकार की पीएम ई-बस सेवा या पीएम ई-ड्राइव योजनाएं इन बदलाव को तेज करने में बड़ी भूमिका निभा रही हैं।
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शहरों के अंदर सबसे पहले दिखेगा बदलाव
रिपोर्ट में कहा गया है कि इलेक्ट्रिक बसों का सबसे तेज विस्तार इंट्रा-सिटी यानी शहर के अंदर चलने वाले परिवहन में होगा। इसके बाद इंटर-सिटी रूट्स पर भी ई-बसों का इस्तेमाल बढ़ेगा। टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी आने वाले वर्षों में बड़े स्तर पर ई-बस नेटवर्क तैयार किए जा सकते हैं।
अब तक कितनी E-Bus अलॉट हुईं?
रिपोर्ट की मानें तो अब तक करीब 62,000 इलेक्ट्रिक बसों के टेंडर जारी हुए, इनमें से लगभग 46,000 बसें अलॉट की जा चुकी हैं हालांकि, सड़कों पर अभी भी सीमित संख्या में ही ई-बसें चल रही हैं। मार्च 2026 तक लगभग 16,300 इलेक्ट्रिक बसें ही ऑपरेशन में थीं। वहीं, रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि FY30 तक करीब 40,000 और इलेक्ट्रिक बसों के टेंडर जारी हो सकते हैं। इस विस्तार में छोटे शहरों को भी शामिल किया जाएगा, जिससे ईवी आधारित सार्वजनिक परिवहन देशभर में तेजी से फैल सकेगा।
सप्लाई चेन पर चीन की निर्भरता चिंता
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इलेक्ट्रिक बस सेक्टर में सप्लाई चेन अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। खासतौर पर लिथियम-आयन सेल, दुर्लभ-मृदा चुंबक और अर्धचालक जैसे महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स के लिए चीन पर निर्भरता बनी हुई है। इससे सेक्टर में जोखिम भी बढ़ता है।
सरकार कैसे कम कर रही निर्भरता?
घरेलू मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने के लिए सरकार कई योजनाओं पर काम कर रही है, जिनमें PLI योजना, चरणबद्ध विनिर्माण कार्यक्रम (PMP), भारत सेमीकंडक्टर मिशन और राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन शामिल हैं। इनका उद्देश्य भारत में EV सप्लाई चेन को मजबूत बनाना है। केपीएमजी का मानना है कि आने वाला दशक भारत के इलेक्ट्रिक पब्लिक ट्रांसपोर्ट सेक्टर के लिए निर्णायक साबित होगा। अगर चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, लोकल मैन्युफैक्चरिंग, फाइनेंसिंग मॉडल और स्किल्ड वर्कफोर्स पर तेजी से काम किया गया, तो भारत दुनिया के सबसे बड़े इलेक्ट्रिक पब्लिक ट्रांसपोर्ट मार्केट्स में शामिल हो सकता है।
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